स्क्रैप के कपड़े और गली में बेबाक रैंप वॉक: कौन हैं भोपाल की ये दो बहनें, जिनके हौसले बड़े-बड़ों पर पड़े भारी

स्क्रैप के कपड़े और गली में बेबाक रैंप वॉक: कौन हैं भोपाल की ये दो बहनें, जिनके हौसले बड़े-बड़ों पर पड़े भारी


Street Model Preeti Prajapati : फैशन की दुनिया के बारे में जब भी हम सोचते हैं, तो दिमाग में क्या आता है? बड़े-बड़े डिजाइनर स्टूडियो, पेरिस और मिलान के चमचमाते रैंप, महंगे ब्रांड्स और बैकस्टेज पर काम करते सैकड़ों लोग. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्या एक साधारण घर की कतरनों (Scraps) और किसी बस्ती की टूटी-फूटी गली में भी फैशन का वही जादू पैदा किया जा सकता है? अगर आपका जवाब ‘नहीं’ है, तो भोपाल की रहने वाली प्रीति प्रजापति और उनकी बहन की कहानी आपकी सोच बदल देगी. यह सिर्फ कपड़ों या मॉडलिंग की कहानी नहीं है, यह उन सपनों की दास्तान है जो साधनों के मोहताज नहीं होते.

एक बहन कपड़ों की कतरनों को खूबसूरत आउटफिट में बदलती है, तो दूसरी उनमें आत्मविश्वास के साथ चलकर जान डाल देती है.Image Credit: Instagram-Preeti Prajapati

कौन हैं प्रीति प्रजापति और उनकी बहन?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल की एक मध्यमवर्गीय बस्ती में रहने वाले दिहाड़ी मिस्त्री की बेटी प्रीति प्रजापति का सपना हमेशा से कुछ अलग करने का था. उन्हें बचपन से ही मॉडलिंग और कैटवॉक का जुनून था. लेकिन फैशन इंडस्ट्री के दरवाजे उन लोगों के लिए अक्सर बंद रहते हैं, जिनके पास न तो बड़े बैकग्राउंड का सहारा होता है और न ही महंगे फैशन स्कूल की डिग्री.
Image Credit: Instagram-Preeti Prajapati

लेकिन जब दरवाजे बंद हों, तो रास्ते खुद बनाने पड़ते हैं. प्रीति के इस सपने को पंख दिए उनकी बहन ने. उनकी बहन सिलाई का काम जानती हैं. जब उनके पास महंगे कपड़े खरीदने के पैसे नहीं थे, तो दोनों बहनों ने मिलकर एक अनोखा रास्ता चुना.

दर्जी की दुकानों, मां की पुरानी साड़ी और घर में बचे हुए कपड़ों के छोटे-छोटे टुकड़ों (Scraps) को इकट्ठा किया गया. बहन की उंगलियों ने उन कतरनों को सीना शुरू किया और उन्हें एक-एक करके ऐसे शानदार आउटफिट्स में बदल दिया, जिन्हें देखकर कोई कह ही नहीं सकता कि वे बची हुई कतरनों से बने हैं.

जब बस्ती की गली बन गई ‘ग्लोबल रैंप’

कपड़े तो तैयार हो गए, लेकिन अगला सवाल था इन्हें पहनकर वॉक कहाँ करें? न कोई स्टूडियो था, न कोई स्टेज और न ही लाइट-कैमरा का सेटअप. प्रीति ने अपनी ही गली की पथरीली और संकरी गली को अपना रैंप बना लिया. बिना किसी झिझक के, सिर उठाकर, पूरे आत्मविश्वास के साथ जब वे उन कतरन के कपड़ों में वॉक करती हैं, तो आसपास का माहौल थम जाता है. कहा जाता है कि “मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है! पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है.”

प्रीति का यह विश्वास उनके हर एक कदम में झलकता है. उनके वीडियो सोशल मीडिया पर आए और रातों-रात वायरल हो गए. इंस्टाग्राम रील्स से लेकर यूट्यूब शॉर्ट्स तक, हर जगह लोगों ने उनकी वॉक और उनकी बहन की कारीगरी को सलाम किया. यहाँ तक कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया और फैशन से जुड़े लोगों ने भी इस टैलेंट की दाद दी.

उनकी कहानी की खूबसूरती यही है कि वह अपनी परिस्थितियों को अपनी पहचान की सीमा नहीं बनने देतीं. जिस जगह को कोई मॉडलिंग के लिए सही मंच नहीं मानेगा, प्रीति ने वहीं से शुरुआत की. यह हमें याद दिलाता है कि हर बार आगे बढ़ने के लिए सही मौके का मिलना जरूरी नहीं होता. कभी-कभी शुरुआत करने के बाद ही नए मौके बनने लगते हैं.

यह कहानी उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है, जो किसी काम को शुरू करना चाहते हैं, लेकिन पैसों की कमी या सही सहयोग न मिलने के कारण रुक जाते हैं.  प्रीति का सपना सिर्फ अपनी गली या स्थानीय स्तर पर पहचान बनाने तक सीमित नहीं है. उनकी महत्वाकांक्षा अंतरराष्ट्रीय फैशन मंचों तक पहुंचने की है.

फैशन इंडस्ट्री में एंट्री के लिए लोग लाखों रुपये खर्च करते हैं, पोर्टफोलियो बनवाते हैं और नेटवर्क तलाशते हैं. लेकिन प्रीति और उनकी बहन ने साबित कर दिया कि असली ताकत ‘पैशन’ में होती है.

सबसे खास बात यह है कि उनके चेहरे पर न तो कोई झिझक है और न ही इस बात की कमी का मलाल कि उनके पास बड़े साधन नहीं हैं. आज लाखों लोग उन्हें फॉलो करते हैं और उनकी हर नई रील का इंतजार करते हैं. 

प्रीति प्रजापति और उनकी बहन की यह जोड़ी आज देश की करोड़ों ऐसी लड़कियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो किसी छोटे शहर या बस्ती में बैठकर बड़े सपने देखती हैं. भोपाल की इन बहनों ने दिखा दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो बस्ती की कच्ची सड़क भी दुनिया का सबसे बड़ा रैंप बन सकती है!



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