‘संविधान जेब में रखने से समझ नहीं आता’: राहुल के CJI को पत्र पर बीजेपी का तंज
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CJI Suryakant Rahul Gandhi: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के तीखे तेवरों और सीजेआई से मिलने की कोशिश पर भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया है. सीजेआई सूर्यकांत द्वारा मामला विचाराधीन होने के चलते मिलने से इनकार किए जाने के बाद भाजपा ने इसे न्यायपालिका की गरिमा की जीत करार दिया.
सीजेआई सूर्यकांत ने राहुल गांधी से मिलने से इनकार कर दिया था. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) से मुलाकात का अनुरोध किए जाने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि न्यायपालिका को रोजाना की राजनीतिक लड़ाइयों से ऊपर रहना चाहिए. भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “शक्तियों के पृथक्करण से लेकर सत्ता के लिए बेचैनी तक, राहुल गांधी ने संवैधानिक कानून को राजनीतिक नाटकबाजी के साथ गड्डमड्ड कर दिया है.”
उन्होंने कहा कि सीजेआई द्वारा गांधी और विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार किया जाना एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि न्यायपालिका को राजनीतिक लड़ाइयों से ऊपर रहना चाहिए. भाटिया ने कहा, “संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक नाटकबाजी में नहीं घसीटा जा सकता.” कांग्रेस नेता पर निशाना साधते हुए भाटिया ने कहा कि केवल संविधान की प्रति साथ रखने का मतलब यह नहीं है कि कोई उसे समझता भी है.
उन्होंने कहा, “इसे पढ़िए, इसका सम्मान कीजिए और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को समझिए. संविधान शासन का मार्गदर्शक है, राजनीतिक प्रदर्शन का साधन नहीं.” मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करते हुए विपक्षी दल 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे. राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाने के लिए प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत से मुलाकात का अनुरोध किया था.
हालांकि, सूत्रों के अनुसार, सीजेआई ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर राहुल गांधी से मिलने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि इसी तरह के मामले सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं. राहुल गांधी और खरगे, दोनों ने सीजेआई को पत्र लिखकर सोमवार शाम चार से पांच बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था, ताकि उन्हें एक ज्ञापन सौंप कर ‘वोट चोरी’ रोकने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक लगाने और मतपत्र प्रणाली को फिर से लागू करने की मांग कर सकें.