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Communal Harmony in Nainital: नैनीताल की रामलीला में अनवर रजा केवट बनकर भगवान श्रीराम को नदी पार कराते हैं, तो नासिर अली कभी गुरु वशिष्ठ तो कभी मारीच की भूमिका निभाते हैं. वहीं, जावेद ताड़का वध और नारद मोह जैसे प्रसंगों में अभिनय करते हैं. सुखाताल की आदर्श रामलीला में ये कलाकार कई सालों से अपनी भूमिका निभा रहे हैं. खास बात यह है कि मुस्लिम समुदाय से होने के बावजूद रामलीला में उनकी भागीदारी लंबे समय से चली आ रही है. यहां कलाकार अपने धर्म से पहले अपने किरदार और रामलीला के प्रति जिम्मेदारी को महत्व देते हैं. जानिए, नैनीताल की रामलीला से जुड़े इन कलाकारों की कहानी और कैसे यह परंपरा आपसी भाईचारे की मिसाल बनी हुई है.
नैनीताल/गौरव जोशी: नवरात्र शुरू होते ही नैनीताल जगह-जगह रामलीला का मंचन भी शुरू हो गया है. इन रामलीलाओं में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. लेकिन सरोवर नगरी की सूखाताल रामलीला की एक खास बात है, जो इसे दूसरों से अलग बनाती है. यहां अनवर रजा केवट बनकर भगवान श्रीराम को नदी पार कराते हैं, तो नासिर अली गुरु वशिष्ठ बनकर राम और लक्ष्मण को शस्त्र विद्या सिखाते हैं. वहीं, जावेद ताड़का वध और नारद मोह जैसे प्रसंगों में अपने अभिनय से जान डाल देते हैं.
यहां रामलीला के मंच पर कलाकारों की पहचान उनके धर्म से नहीं, बल्कि उनके किरदारों से होती है. मुस्लिम समुदाय के ये कलाकार कई सालों से रामलीला का हिस्सा बनते आ रहे हैं. कोई मंच पर अभिनय करता है, तो कोई आयोजन की तैयारियों में हाथ बंटाता है. इन सभी की भागीदारी दिखाती है कि नैनीताल में रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और मिल-जुलकर रहने की परंपरा का भी हिस्सा है.
सूखाताल की रामलीला में नासिर अली पिछले 20 वर्षों से अलग-अलग किरदार निभा रहे हैं. कभी वह मारीच बनते हैं, तो कभी गुरु वशिष्ठ की भूमिका में नजर आते हैं. गुरु वशिष्ठ के रूप में वह भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को शस्त्र विद्या का ज्ञान देते हैं. इतने सालों से रामलीला से जुड़े नासिर के लिए यह केवल अभिनय करने का मौका नहीं, बल्कि ऐसा काम है, जिससे उन्हें खुशी और सुकून मिलता है. नासिर का मानना है कि रामलीला में जाति और धर्म से ज्यादा अहमियत अपनी भूमिका और उसके प्रति समर्पण की होती है. यहां सभी कलाकार मिलकर भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का मंचन करते हैं. यही वजह है कि नासिर हर साल उत्साह के साथ रामलीला में हिस्सा लेते हैं और अपनी भूमिका निभाते हैं.
अनवर बनते हैं केवट, जावेद के अभिनय का रहता है इंतजार
सूखाताल की रामलीला में अनवर रजा भी कई सालों से अलग-अलग किरदार निभा रहे हैं. वह केवट और मुनि जैसे पात्रों में नजर आते हैं. रामायण में केवट का प्रसंग भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़ा है, जब केवट उन्हें नदी पार कराते हैं. अनवर जब मंच पर यह भूमिका निभाते हैं, तो दर्शकों के सामने रामायण का यह प्रसंग जीवंत हो उठता है. वहीं, जावेद भी रामलीला के अहम कलाकारों में शामिल हैं. ताड़का वध और नारद मोह जैसे प्रसंगों में उनका अभिनय दर्शकों को देखने को मिलता है. इन किरदारों को निभाते हुए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है. रामलीला के मंच पर इन कलाकारों की मौजूदगी आयोजन को खास बनाती है.
रामलीला के मंच पर धर्म से पहले निभाया जाता है किरदार
नैनीताल में रामलीला के दौरान अलग-अलग समुदायों के लोगों का साथ मिलकर काम करना कोई नई बात नहीं है. सालों से मुस्लिम समुदाय के लोग भी इसमें अभिनय करते आ रहे हैं. मंच पर किरदार निभाने से लेकर पर्दे के पीछे की तैयारियों तक, हर कोई अपनी जिम्मेदारी निभाता है. इस तरह रामलीला लोगों को एक साथ जोड़ने का काम करती है. भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों में न्याय, मर्यादा और सद्भाव का संदेश मिलता है. सूखाताल की रामलीला में भी कलाकार अपने-अपने किरदारों के जरिए इन प्रसंगों को दर्शकों तक पहुंचाते हैं.