युवा किसान बना मिसाल, 180 बीघा में करता है खेती; सरकारी योजनाओं से मिला लाभ
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Madhubani Young Farmer: बिहार के मधुबनी जिले के राजनगर के खोईर गांव के विपिन कुमार झा एक युवा किसान हैं. खेती के क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है. वह बिहार में खेती के क्षेत्र में प्रथम स्थान पर आने वाले किसानों में शामिल हैं. विपिन करीब 180 बीघा जमीन में खेती और मत्स्य पालन करते हैं. वह पपीता, केला, मखाना और मछली का उत्पादन करते हैं. कृषि और संबंधित विभागों से उन्हें लाखों रुपये का अनुदान और करोड़ों रुपये से अधिक का फंड मिला है. आइए जानते हैं कि उन्होंने सरकारी योजनाओं का कैसे लाभ लिया और खेती में क्या काम करते हैं.
भारत एक कृषि प्रधान देश है. बिहार में भी बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका कृषि पर निर्भर है. हालांकि, आज के समय में रोजगार के लिए लोग दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते हैं. इस वजह से कृषि पर पहले की तुलना में कम ध्यान दिया जाता है. वहीं, जो लोग वैज्ञानिक तरीके से खेती करते हैं, वे इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं.
इसी तरह मधुबनी जिले के राजनगर के विपिन कुमार झा ने भी कृषि को अपना करियर बनाया. उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की है. उन्होंने एग्रीकल्चर, साइंस, एमबीए सहित कई विषयों में पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने खेती को अपना पेशा बनाया. उन्होंने एचसी फार्म (HC Farm) की शुरुआत की. आज उनके फार्म में करीब 50 लोगों को स्थायी रोजगार मिला हुआ है. उन्होंने अपने फार्म को भी सरकारी स्तर पर रजिस्टर्ड कराया है.
विपिन ने खेती के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है. वह एक साथ करीब 180 बीघा में अलग-अलग तरह की खेती करते हैं. उद्यान विभाग, बिहार सरकार की ओर से उन्हें करोड़ों रुपये का फंड भी मिला है. इसके अलावा उन्हें कई लाख रुपये का अनुदान भी मिला है. विपिन मुख्य रूप से पपीते की खेती करते हैं. इसके साथ ही केले की खेती भी करते हैं. वह मखाना उत्पादन और मत्स्य पालन भी करते हैं. इस तरह एक ही जगह पर वह खेती और उससे जुड़े कई काम कर रहे हैं.
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विपिन कुमार झा बताते हैं कि कृषि विभाग की ओर से किसानों को कई तरह की योजनाओं के तहत अनुदान दिया जाता है. कृषि के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले किसानों को प्रोत्साहित भी किया जाता है. उन्होंने बताया कि उन्हें अब तक करोड़ों रुपये से अधिक का फंड मिला हुआ है. विपिन के अनुसार, केले की खेती के लिए उन्हें प्रति हेक्टेयर 80 हजार रुपये का अनुदान मिलता है. पपीते की खेती पर प्रति हेक्टेयर 72 हजार रुपये का अनुदान मिलता है. मत्स्य पालन के लिए भी 82 हजार रुपये का अनुदान मिलता है. वहीं, मखाना उत्पादन के लिए भी उन्हें कई लाख रुपये का अनुदान मिला है.
विपिन बताते हैं कि बिहार में समस्तीपुर के एक किसान 100 एकड़ में खेती करते थे. अब वह मधुबनी जिले में अपनी जमीन के अलावा दूसरे किसानों की जमीन भी लीज पर लेकर खेती कर रहे हैं. उनके साथ कई लोग काम करते हैं. उनकी टीम करीब 180 बीघा जमीन में खेती करती है. विपिन का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति खेती में रुचि रखता है, तो वह उसे प्रशिक्षण देकर खेती करने में मदद करते हैं. उनके साथ कई किसान जुड़े हुए हैं. वह रिटेलर से लेकर ग्राहकों तक बेहतर गुणवत्ता वाले फल पहुंचाने पर भी ध्यान देते हैं. उनका प्रयास है कि ग्राहकों को अच्छी गुणवत्ता के फल उचित कीमत पर मिल सकें.