(रिपोर्ट: अनन्या भटनागर)
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि नागरिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन की स्थिति में देश के हर नागरिक को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि अदालत कानून के मुताबिक ऐसी शिकायतों पर सुनवाई करेगी. दिल्ली में प्रदर्शनों के मद्देनजर लगाई गई पाबंदियों और लोगों को हिरासत में लिए जाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच CJI का यह बयान अहम माना जा रहा है. CNN-News18 ने CJI सूर्यकांत से पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रीय राजधानी में मौजूदा हालात के बीच नागरिक स्वतंत्रता में बाधा पहुंचाने के आरोपों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तैयार है? इस पर CJI ने कहा कि अदालत पहले से ही कुछ मामलों की सुनवाई कर रही है.
CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘हम पहले से ही सुनवाई के लिए आ रहे कुछ मामलों पर विचार कर रहे हैं. अगर नागरिक स्वतंत्रता के उल्लंघन की कोई शिकायत है, तो इस देश का हर नागरिक, हर व्यक्ति अदालत का रुख करने के लिए स्वतंत्र है. उसे अदालत आने का अधिकार है और हम कानून के मुताबिक सुनवाई करेंगे.’
दिल्ली में पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट की नजर
CJI का यह बयान ऐसे समय आया है, जब सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में प्रदर्शनों से पहले लगाई गई पाबंदियों, वकीलों और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के बीच संतुलन बनाने जैसे मुद्दों पर विचार कर रहा है.
राष्ट्रीय राजधानी में लगाई गई पाबंदियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट पहले भी प्रदर्शन से जुड़े मामलों और जरूरी सार्वजनिक सेवाओं के सुचारु संचालन को लेकर हस्तक्षेप कर चुका है.
सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी INDIA गठबंधन की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित प्रदर्शनों के मद्देनजर लगाई गई पाबंदियों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा है. इन प्रदर्शनों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए थे.
प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और पाबंदियां लगाई गईं. अधिकारियों ने इन कदमों के पीछे सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और किसी तरह की अव्यवस्था रोकने की जरूरत का हवाला दिया.
आम लोगों के अधिकारों पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि नागरिकों के अधिकारों और पाबंदियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा. अदालत ने इन प्रतिबंधों के आम लोगों और यात्रियों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई. इसमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत शामिल थी कि सार्वजनिक परिवहन और जरूरी सेवाएं बेवजह प्रभावित न हों.
एक अलग घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह दिल्ली में मेट्रो सेवाओं को सामान्य बनाए रखने और लोगों की आवाजाही सुचारु करने के लिए अंतरिम आदेश पारित करेगा. अदालत संबंधित पक्षों को सुनने के बाद इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई करेगी.
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से यह बात भी सामने आई कि प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों को संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में परखा जाना चाहिए. इनमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार भी शामिल हैं.
‘मनमाने तरीके से हिरासत बर्दाश्त नहीं’
दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान सुप्रीम कोर्ट से जुड़े वकीलों को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने की खबरों के बाद नागरिक स्वतंत्रता को लेकर बहस और तेज हो गई.
रिपोर्टों के मुताबिक, हिरासत की खबरों के बाद CJI सूर्यकांत ने हस्तक्षेप किया. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मनमाने तरीके से हिरासत में लिए जाने को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठे कि क्या प्रदर्शन में शामिल होने या उसकी निगरानी करने की कोशिश कर रहे वकीलों और अन्य लोगों को अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोका जा रहा था.
इससे पहले, 10 अक्टूबर को CJP के प्रदर्शन से पहले लगाई गई पाबंदियों पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विरोध-प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया था.
अदालत की टिप्पणियों ने इस चुनौती को भी रेखांकित किया कि दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में प्रदर्शनों को नियंत्रित करते समय केवल प्रदर्शनकारियों ही नहीं, बल्कि आम निवासियों, दफ्तर जाने वालों, यात्रियों और कारोबारियों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखना जरूरी है.