Pratapgarh Navratri: कहीं चढ़ाई जाती हैं लोहे की बेड़ियां तो कहीं मुर्गे पर सवार हैं माता, जानें 9 देवी धामों की खासियत


Last Updated:

Navratri 2026: शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ ही प्रतापगढ़ जिले के प्रमुख देवी मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. प्रतापगढ़ में 9 ऐसे प्राचीन शक्तिपीठ हैं, जिनकी अपनी अनोखी धार्मिक मान्यताएं हैं. राज राजेश्वरी माता मंदिर में तीनों पहर आरती होती है, तो देवाकमाता में मन्नत पूरी होने पर बेड़ियां चढ़ाने की अनूठी परंपरा है. भंवरमाता, बीजमाता और कामेश्वरी माता सहित सभी धामों पर विशेष अनुष्ठान किए जा रहे हैं. इन मंदिरों में दर्शन के लिए राजस्थान के साथ मध्य प्रदेश से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

ख़बरें फटाफट

Top Deals Inside

Pratapgarh Navratri 2026: प्रतापगढ़ के 9 प्रमुख शक्तिपीठों का रहस्यZoom

Pratapgarh Navratri 2026: कहीं चढ़ाई जाती हैं लोहे की बेड़ियां तो कहीं मुर्गे पर सवार हैं माता, जानें 9 देवी धामों की खासियत

Navratri 9 Famous Devi Temples History & Significance: शक्ति की आराधना, आस्था की महान परंपरा और मां दुर्गा के प्रति अटूट विश्वास का पवित्र पर्व शारदीय नवरात्र आज से शुरू हो गया है. नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी. इसके साथ ही प्रतापगढ़ जिले के सभी प्रमुख देवी मंदिरों में भक्ति और उल्लास का विशेष माहौल देखने को मिल रहा है. प्रतापगढ़ जिले की पावन धरती पर ऐसे अनेक प्राचीन शक्तिपीठ मौजूद हैं, जिनकी अपनी एक अलग पहचान, ऐतिहासिक विरासत और अनूठी धार्मिक मान्यताएं हैं. कहीं माता की तीनों पहर आरती होती है, कहीं सदियों पुरानी चमत्कारी प्रतिमा श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है, तो कहीं मन्नत पूरी होने पर बेड़ियां चढ़ाने की अनोखी परंपरा आज भी निभाई जाती है. आइए विस्तार से जानते हैं जिले के नौ प्रमुख देवी धामों की विशेषताएं और उनसे जुड़ी आस्था की गहरी परंपराएं.

प्रतापगढ़ शहर के बीचों-बीच स्थित राज राजेश्वरी माता मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है. इस मंदिर में माता की तीनों पहर आरती की जाती है और यहां सदियों से अखंड दीपक जलने की परंपरा अनवरत रूप से चली आ रही है. वहीं, ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर के किला परिसर में स्थित बाणेश्वरी माता मंदिर भी अपनी एक अलग विशिष्टता लिए हुए है. यहां राजपरिवार की कुलदेवी बाणेश्वरी माता के साक्षात दर्शन होते हैं, जिनकी अलौकिक प्रतिमा घोड़े पर सवार है. नवरात्र के नौ दिनों में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.

देवगढ़ की बीजमाता और भंवरमाता का ऐतिहासिक महत्व
जिले के ग्रामीण और कस्बाई अंचलों में भी कई अत्यंत महत्वपूर्ण शक्तिपीठ स्थापित हैं. देवगढ़ की प्रसिद्ध बीजमाता और छोटीसादड़ी की भंवरमाता अत्यंत प्राचीन शक्तिपीठों के रूप में पूरे अंचल में विख्यात हैं. इन दोनों ही पवित्र धामों पर नवरात्र में भव्य मेलों का आयोजन होता है. दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मुरादें लेकर यहां आते हैं. इसी प्रकार, निनोर गांव में स्थित पद्मावती माता मंदिर में माता के तीन अलग-अलग अवस्थाओं में दर्शन करने की गहरी मान्यता है, जो इस धाम को अन्य मंदिरों से काफी अलग और खास बनाती है.

अखंड ज्योत और बेड़ियां चढ़ाने की अनूठी परंपरा
बारावरदा क्षेत्र का खेड़ा नाहरसिंह माता मंदिर अपनी चमत्कारी अखंड ज्योत के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. मान्यता है कि यहां जलने वाली ज्योत सदियों से कभी नहीं बुझी है. वहीं, आस्था का एक और बहुत बड़ा केंद्र देवाकमाता मंदिर है. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां आने वाले श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर माता के चरणों में लोहे की बेड़ियां भेंट स्वरूप चढ़ाते हैं. यह परंपरा सदियों से यहां निभाई जा रही है और मंदिर परिसर में चढ़ाई गई सैकड़ों बेड़ियां इस बात का जीता-जागता प्रमाण हैं.

नदी किनारे चामुंडा माता और मुर्गे पर सवार कामेश्वरी माता
प्रतापगढ़ जिले में प्राकृतिक सौंदर्य के बीच भी कई देवी धाम मौजूद हैं. शिवना नदी के किनारे स्थित चामुंडामाता मंदिर असीम शांति, शक्ति और भक्ति का केंद्र है. इसी तरह मेरियाखेड़ी के पास एक ऊंची पहाड़ी पर बने कामेश्वरी माता मंदिर की भी इस पूरे क्षेत्र में विशेष मान्यता है. कामेश्वरी माता की प्रतिमा मुर्गे पर सवार है, जो इस मंदिर को एक विशिष्ट और अत्यंत दुर्लभ पहचान प्रदान करती है.

अनुष्ठानों और भक्तों के सैलाब से गूंजेंगे देवी धाम
नवरात्र के इन पावन नौ दिनों के दौरान जिले के इन सभी प्रमुख देवी धामों में विशेष पूजा-अर्चना, हवन, दुर्गापाठ और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे. माता के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान रहेगा. इन धामों पर दर्शन के लिए न केवल प्रतापगढ़ बल्कि आसपास के अन्य जिलों और पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे. वास्तव में, ये नौ देवी धाम प्रतापगढ़ जिले की धार्मिक आस्था, अटूट लोकपरंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के अनूठे प्रतीक बने हुए हैं.



Source link