Last Updated:
मंदिरों को आकर्षक बनाने के लिए लोग एक से बढ़कर एक यूनिक और भव्य डिजाइन बनवाते हैं. कई मंदिर अपनी अनोखी बनावट को लेकर चर्चित भी हैं. बिहार की राजधानी पटना में भी एक अनोखा मंदिर है. यह मंदिर मां दुर्गा का है. इस मंदिर में माता रानी का दर्शन पाने के लिए उनकी सवारी शेर के मुंह में घुसना पड़ता है. यह मंदिर दर्गनीबाग इलाके में है.
पटना: आपने मां दुर्गा के कई मंदिरों में जाकर माता का दर्शन किया होगा. आज हम आपको जिस अनोखे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं हो सकता है कि आप अभी तक ऐसे किसी मंदिर घूमने ना गए हैं. बिहार की राजधानी पटना में मां दुर्गा का ऐसा मंदिर है जहां उनके दर्शन के लिए एक बड़े बाध के मुंह के अंदर घुसना पड़ता है. यहां प्रवेश द्वारा आकर्षक बाघ की डिजाइन बनाई गई है. यहां खुले मुंह वाला एक विशाल बाघ बना है. लोग इसी के मुंह के अंदर घुसकर मंदिर तक पहुंचते हैं. मंदिर के बाहर बने बाघ का विशाल चेहरा पहली नजर में ही लोगों का ध्यान खींच लेता है. इसकी बनावट ऐसी है कि यहां से गुजरने वाले लोग भी कुछ पल ठहरकर इसे देखने लगते हैं.
यह अनोखा मंदिर गर्दनीबाग क्षेत्र की यारपुर अम्बेडकर कॉलोनी में स्थित है. इसकी पहचान जय मां विंध्यवासिनी बाघ मंदिर के रूप में होती है. लोग इसे बाघ मंदिर के नाम से भी जानते हैं। यहां बाघ के खुले मुंह से प्रवेश करते ही भक्त माता के दरबार तक पहुंचते हैं और मां का आशीर्वाद लेते हैं.
बाघ का खुला मुंह ही है मंदिर की सबसे बड़ी पहचान
आमतौर पर मंदिरों के प्रवेश द्वार पर देवी-देवताओं की आकृतियां या भव्य तोरण देखने को मिलते हैं, लेकिन इस मंदिर की पहचान इसका विशाल बाघ है. बाघ के खुले मुंह को मुख्य प्रवेश द्वार के रूप में बनाया गया है. मंदिर की यही अनोखी संरचना इसे पटना के दूसरे मंदिरों से अलग बनाती है. मंदिर समिति के एक सदस्य दीनदयाल कुमार ने बताया कि किसी से इस मंदिर का रास्ता पूछना हो तो बाघ मंदिर का नाम बताने पर लोग आसानी से यहां पहुंचने का रास्ता बता देते हैं.
कभी झोपड़ी में होती थी पूजा, आज दूर-दूर तक है पहचान
इस मंदिर की कहानी भी इसकी बनावट की तरह दिलचस्प है. यह काफी पुराना धार्मिक स्थल है और समय के साथ इसका स्वरूप लगातार बदलता गया है. बताया जाता है कि कई दशक पहले यहां एक छोटी-सी झोपड़ी में माता की पूजा-अर्चना की जाती थी. धीरे-धीरे मंदिर का विकास हुआ और आज यह बाघ के विशाल मुंह वाली अनोखी संरचना के कारण अपनी अलग पहचान बना चुका है.
मंदिर परिसर में मां विंध्यवासिनी के अलावा महावीर जी और भैरव बाबा समेत अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा की जाती है. यहां शीतला महारानी का भी विशेष महत्व बताया जाता है. उन्होंने बताया कि शीतला महारानी इस स्थान की सबसे पुरानी आराध्य देवी हैं और उनकी वजह से भी मंदिर की धार्मिक पहचान जुड़ी हुई है.
अष्टमी-नवमी पर रात दो बजे से लगने लगती है कतार
नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ देखते ही बनती है. खासकर महाष्टमी और महानवमी के दिन भक्त बड़ी संख्या में माता के दर्शन करने पहुंचते हैं. दीनदयाल कुमार ने बताया कि इन दिनों रात करीब दो बजे से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो जाता है और दर्शन के लिए कतारें रात नौ से दस बजे तक लगी रह सकती है.
गर्दनीबाग की सड़क से गुजरने वाले कई लोग भी मंदिर की अनोखी बनावट देखकर यहां रुकते हैं. बाघ के मुंह से प्रवेश कर माता के दर्शन करना श्रद्धालुओं के लिए एक अलग अनुभव बन जाता है. नवरात्रि के दौरान मंदिर का धार्मिक माहौल और भक्तों की आस्था इस जगह को और खास बना देते हैं.