om jai ambe gauri aarti and maa shailputri puja aarti lyrics | ॐ जय अंबे गौरी, जय श्यामा गौरी, नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के साथ करें मां शैलपुत्


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नवरात्रि के पहले दिन पूरे मन से जरूर करें मां अंबे और मां शैलपुत्री की यह आरती

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Aarti Jai Ambe Gauri: आज से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है और नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना करने का विधान है. हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व है. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है. श्रद्धापूर्वक आरती करने से भक्त आध्यात्मिक शांति और सुखमय जीवन का आशीर्वाद मांगते हैं। यहां पढ़ें मां दुर्गा की आरती और मां शैलपुत्री की आरती…

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नवरात्रि के पहले दिन पूरे मन से जरूर करें मां अंबे और मां शैलपुत्री की यह आरतीZoom

Aarti Jai Ambe Gauri: आज से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है और नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना कर मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है. मान्यता है कि आरती के माध्यम से भक्त अपनी श्रद्धा और भक्ति मां के चरणों में अर्पित करते हैं. पूजा के अंत में दीपक जलाकर आरती करने से वातावरण भक्तिमय बनता है और मन को शांति मिलती है. भक्त मां दुर्गा से सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और संकटों से रक्षा की प्रार्थना करते हैं. इस आर्टिकल में आपको मां दुर्गा की आरती के साथ मां शैलपुत्री की आरती भी बताई गई है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की आराधना से साहस, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.

दुर्गाजी की आरती
ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
(ॐ जय अम्बे गौरी…)
माग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोऊ नैना, चंद्रबदन नीको॥
(ॐ जय अम्बे गौरी…)
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गलमाला, कंठन पर साजै॥
(ॐ जय अम्बे गौरी…)
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुःखहारी॥
(ॐ जय अम्बे गौरी…)
कानन कुंडल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम रजत ज्योति॥
(ॐ जय अम्बे गौरी…)
शुम्भ निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशाचर मूकती॥
(ॐ जय अम्बे गौरी…)
चण्ड मुण्ड संहारे, जो शोणित बीता।
मधुकैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन कीता॥
(ॐ जय अम्बे गौरी…)
ब्रह्मा रूपिणी तुमको, विद्या प्रदाता।
गावैं जो नर मन से, सुख-संपत्ति पाता॥
(ॐ जय अम्बे गौरी…)
रूप और चतुर्भुज तुमको, अधिक अति सोहें।
रूप तीनों लखता, मन हरता मोहें॥
(ॐ जय अम्बे गौरी…)
चन्दन आदम कुंकुम, भाल निशान राजै।
रक्तपुष्प गलमाला, कंठन पर साजै॥
(ॐ जय अम्बे गौरी…)
कहाँ लगि शोभा वरणी, केंहि विधि कहि जाऊँ।
कोटिक रूप धरे हैं, तुम रक्षक काहू॥
(ॐ जय अम्बे गौरी…)
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर कीजै।
जो सुख हो सके माता, सो हमको दीजै॥
(ॐ जय अम्बे गौरी…)

माता शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल पर सवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी।
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।

जोर से बोलो जय माता दी, सारे बोले जय माता दी…



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