सो रहे थे लोग, तभी आ गया सैलाब… नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी ने कैसे मचाई तबाही?


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सो रहे थे लोग, तभी आ गया सैलाब… नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी ने कैसे मचाई तबाही?

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नेपाल में फिर तबाही के हालात बन गए हैं. इस बार कारण बनी है बूढ़ी गंडक नदी. रविवार सुबह नदी में अचानक सैलाब आया. इससे कई घरों को नुकसान पहुंचाया है, तीन से ज्यादा पुल बह गए हैं और 4 लोग लापता हुए हैं. अचानक आए इस सैलाब की वजह भूस्खलन को माना जा रहा है.

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सो रहे थे लोग, तभी आ गया सैलाब... नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी ने कैसे मचाई तबाही?Zoom

नेपाल में अब बूढ़ी गंडकी नदी ने तबाही मचाई.

नेपाल में एक बार फिर तबाही मची. इस बार सैलाब वैसा तो नहीं था जैसा 45 दिन पहले आया था, मगर गोरखा जिले के लिए ये उससे कम भी नहीं था. बूढ़ी गंडकी में आई अचानक बाढ़ ने जिले के बुनियादी ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचाया. चुमनबुरी और धारचे में पुल बह गए और कई घरों के भी बहने की सूचना है. बाढ़ में 4 लोगों के लापता होने की भी बात सामने आई है.

ये बाढ़ उस वक्त आई जब लोग सो रहे थे, हालांकि नेपाल प्रशासन का दावा है कि लोगों को पहले से ही बाढ़ आने की आशंका थी, इसीलिए ज्यादातर लोग ऊंचाई वाले स्थानों पर चले गए थे. इस सैलाब में कुल कितने लोग हताहत हुए इसकी आधिकारिक सूचना नेपाल की ओर से नहीं दी गई. काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ का कारण भूस्खलन माना जा रहा है.

बूढ़ी गंडकी में आई बाढ़ से प्रभावित लोगों के मुताबिक सुबह चार बज उग्युलंग और सियार नदियों में तेज आवाज सुनी. यह बूढ़ी गंडक की सहायक नदियां हैं. जो सिरदिबास में मिलती हैं. यह इलाका गोरखा जिले से तकरीबन 40 से 45 किमी दूर है. तेज आवाज सुनकर यहां रहने वाले लोगों ने तुरंत ऊंचाई पर जाना शुरू किया और प्रशासन को इसकी सूचना दी, ताकि आने वाले सैलाब से लोगों को बचाया जा सके. लोगों के मुताबिक नदी के जलस्तर में जलगातार उतार-च्ढ़ाव आ रहा था, इसीलिए उन्हें अनहोनी की आशंका पहले से थी.

क्या है इस बाढ़ का कारण?

काठमांडू पोस्ट के मुताबिक फिलहाल प्रशासन ने जो अनुमान जताया है, उसके मुताबिक माना जा रहा है कि सियार नदी या उग्युलंग नदी में भूस्खलन की वजह से नदी का रास्ता बंद हुआ होगा. इससे नदी में पानी जमा होता रहा है और जब पानी का फोर्स ज्यादा बढ़ गया तो वो अवरोध टूटने की वजह से अचानक फ्लैश फ्लड के हालात बन गए. इसीलिए लोगों ने पहले सियार नदी और उग्युलंग नदी में पानी की तेज आवाज सुनी. सिरदिबास में ये दोनों पहाड़ी नदियों बूढ़ी गंडक में मिलती हैं. यहां से बाढ़ आगे पहुंची और हालात बेकाबू हुए.

बाढ़ ने कितना पहुंचाया नुकसान

गोरखा जिले के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार के हवाले से काठमांडू पोस्ट ने लिखा है कि चूमनबुरी के सिरदिबास के ऊपर भूस्खलन की जानकारी मिली है. फिलहाल पांच से सात घर बह गए हैं. हताहत कितने हुए हैं इसकी जानकारी नहीं मिलती है. चुमनुबरी ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष लक्ष्मी गुरुंग के मुताबिक वार्ड-3 में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, यहां 10 से ज्यादा घर बहे हैं. लोगों को नदी के किनारों से दूर रहने की चेतावनी दी गई है. अब तक जो सूचना मिली है उस केहिसाब से चुमनुबरी-3, सिरदिबास और आसपास की बस्तियां प्रभावित हुई हैं. सल्लेरी, पायून और जगत बागर में भी कुछ घर बहे हैं. फिलहाल बाए़ में चार लोगों के लापता होने की पुष्टि की गई है.

बाढ़ में बहे कई पुल

बाढ़ में न्याकचेत-सिरदिबास को जोड़ने वाला पैदल पुल बह गया है. गृह मंत्री सूडान गुरुंग ने यह भी बताया कि न्याकचेत और फिलिम बाजार को जोड़ने वाला पुल भी नष्ट हो गया है. धारचे-5 को जोड़ने वाला एक पैदल पुल भी बह गया है. प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, निचले इलाके में स्थित पांच से सात घरों और पांच से सात अस्थायी ढांचों में बाढ़ का पानी घुसा है. धारचे-3 में 20 से 22 घरों में अभी भी खतरा है. अरुघाट 2-3 में लोहे का पुल बह गया है. गंडकी जलविद्युत परियोजना का भी कुछ हिस्सा और उपकरण बह गए हैं.

नेपाल की प्रमुख नदी है बूढ़ी गंडकी

बूढ़ी गंडकी नदी हिमालय क्षेत्र की प्रमुख नदियों में से एक है. इसका उद्गम तिब्बत के हिमालयी क्षेत्र में माना जाता है जो धादिंग जिलों से होकर बहती है और आगे त्रिशूली नदी में मिलकर आगे बढ़ती है. नारायणी नदी बनकर ये भारत में प्रवेश करती है आगे गंडक कहलाती है. इस नदी की लंबाई तकरीबन 188 किलोमीटर है. नदी की भौगोलिक स्थिति ही इस तरह के सैलाब के प्रति इसे संवेदनशील बनाती है. यहां खड़ी पहाड़ियां हैं जिनमें भूस्लखन आम है. इसके अलावा नदी के आसपास में हिमनद और हिमनदीय झीलें भी बहुत हैं जो कई बार फ्लैश फ्लड का कारण बन चुकी हैं.



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