शिवलिंग पर फावड़ा लगते ही निकलने लगा रक्त, मऊ के 400 साल पुराने भूमि फोर बाबा मंदिर की अनोखी है कहानी

शिवलिंग पर फावड़ा लगते ही निकलने लगा रक्त, मऊ के 400 साल पुराने भूमि फोर बाबा मंदिर की अनोखी है कहानी


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Mau Famous Temple: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में एक बेहद अनोखा और चमत्कारी मंदिर मौजूद है, जिसे ‘भूमि फोर बाबा’ के नाम से जाना जाता है. करीब 400 साल पुराने इस मंदिर का इतिहास बेहद रहस्यमयी है. कहा जाता है कि जमीन की खुदाई के दौरान फावड़ा लगने से जब इस शिवलिंग से खून की धारा बह निकली थी, तब इस पावन स्थल की स्थापना हुई थी. मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से आने वाले हर भक्त की मुराद पूरी होती है और मंदिर परिसर में कदम रखते ही एक अलग ही सकारात्मक ऊर्जा का अहसास होता है.

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मऊ: भारत में आस्था और चमत्कारों से जुड़े कई ऐसे मंदिर हैं, जिनके इतिहास के बारे में जानकर लोग हैरान रह जाते हैं. उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में भी एक ऐसा ही बेहद विख्यात और चमत्कारी मंदिर स्थित है, जिसे स्थानीय लोग ‘भूमि फोर बाबा’ के नाम से जाना जाता है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां जमीन से निकले शिवलिंग पर फावड़ा लगने के बाद खून निकलने लगा था. इसके बाद लोगों ने यहां पूजा-पाठ शुरू कर दी. करीब 400 साल पुराने इस मंदिर को लेकर भक्तों में गहरी आस्था है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है. सावन के महीने में यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं.

लोकल 18 से बातचीत में स्थानीय निवासी गोपाल दास बताते हैं कि यह मंदिर करीब 400 साल पुराना है. पहले यहां चारों ओर झाड़ियां हुआ करती थीं. एक दिन इस जगह पर खुदाई के दौरान एक व्यक्ति के फावड़े से शिवलिंग पर चोट लग गई. बताया जाता है कि चोट लगते ही शिवलिंग से खून निकलने लगा और वह व्यक्ति अपना मानसिक संतुलन खो बैठा. इसके बाद ग्रामीणों ने इसे साधारण पत्थर नहीं, बल्कि शिवलिंग माना और यहां पूजा-पाठ शुरू कर दिया. बाद में मंदिर का निर्माण कराया गया.

लगभग 400 साल पुराना है यह मंदिर
गोपाल दास बताते हैं कि गांव के ही एक कलवार ने मंदिर का निर्माण कराया था. मान्यता है कि उसे रात में सपने में मंदिर पर गुंबद न बनाने और इसे खुला रखने का संकेत मिला था. लेकिन उसने गुंबद बनवा दिया. इसके बाद उसके परिवार पर मुसीबतें आने लगीं और उसका सर्वनाश हो गया. स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित इस मान्यता के कारण मंदिर के प्रति आस्था बढ़ गई. जमीन से शिवलिंग निकलने की वजह से ही इसे भूमिफोर बाबा के नाम से जाना जाता है.

पूजा करने से मिलती है अलग एनर्जी
मंदिर के पुजारी शशांक बाबा और चिंकी बताते हैं कि यहां पूजा करने आने वाले लोगों को अलग तरह की ऊर्जा महसूस होती है. सावन के महीने में मंदिर में काफी भीड़ रहती है और श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए सुबह से शाम तक कतार में लगना पड़ता है. पुजारियों के मुताबिक, मान्यता है कि हर सोमवार सच्चे मन से यहां पूजा-पाठ करने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी होती है. मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार मंदिर में कुछ न कुछ नया काम भी कराते हैं.

दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु
इस मंदिर में दर्शन करने के बाद भक्तों को वैसी ही ऊर्जा महसूस होती है, जैसी किसी ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद होती है. दूर-दराज के इलाकों से लोग यहां दर्शन करने आते हैं. जिन लोगों की मन्नत पूरी होती है, वे दूसरों को भी मंदिर के बारे में बताते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है. इसी आस्था के चलते यह मंदिर क्षेत्र में प्रसिद्ध है.



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