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Silver Price Prediction : अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत अपने रिकॉर्ड हाई से अब आधी रह गई है. गिरावट सोने के भाव में भी आई है, लेकिन गोल्ड सिल्वर से बहुत कम टूटा है. चांदी के रेट औंधे मुंह क्यों गिरे और क्या आगे और लुढ़केंगे या संभलेंगे, जानिए..
सोना जहां मुख्य रूप से ‘सेफ-हेवन’ है, वहीं चांदी की कुल मांग का 50% से अधिक हिस्सा इंडस्ट्रीज से आता है.
नई दिल्ली. इस साल कमोडिटी बाजार में खूब उठा-पटक मची हुई है. सोना और चांदी, दोनों में ही साल 2026 में खूब गिरावट आई है. लेकिन, चांदी की जो हालत हुई है उसने निवेशकों को जोर का झटका जोर से ही दिया है. जहां सोने ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच खुद को काफी हद तक संभाल रखा है, वहीं चांदी अपने रिकॉर्ड हाई से ताश के पत्तों की तरह ढह गई. 29 जनवरी 2026 को 121 डॉलर प्रति औंस के ऑल-टाइम हाई पर पहुंची चांदी आज टूटकर करीब 60 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है. यानी सीधे 50% का क्रैश. सोना अपने उच्चतम स्तर से केवल 25% ही फिसला है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर चांदी में सोने से दोगुनी गिरावट क्यों आई?
शॉर्ट टर्म में सोना बाजी मारता दिख रहा है, जबकि लंबी अवधि में चांदी ने ज्यादा मुनाफा निवेशकों को दिया है. पिछले एक महीने के प्रदर्शन को देखें तो चांदी में 8.14 फीसदी गिरी है तो सोने में केवल 3.83 फीसदी की सुस्ती आई है. छह महीने में चांदी का भाव 20.14 फीसदी गिरा है तो सोने का रेट 12.19 फीसदी डाउन हुआ है. इसी तरह साल 2026 में अब तक चांदी की कीमत 16.53 फीसदी टूट चुकी है तो सोना महज 3.14 फीसदी ही गिरा है.
लॉन्ग टर्म में चांदी ने मारी बाजी
लंबी अवधि के आंकड़े बिल्कुल अलग कहानी बयां करते हैं. बीते एक साल में चांदी ने 23.80 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया, जबकि सोने का रिटर्न मात्र 3.81 फीसदी रहा. वहीं पिछले पांच साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो चांदी ने 167.71 फीसदी का जबरदस्त मुनाफा निवेशकों को दिया है, जबकि सोने ने 138.77 फीसदी रिटर्न दिया है. सिल्वर इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2000 से सितंबर 2026 तक की 26 वर्षों की अवधि में सोने ने 1,447% (CAGR 10.8%) और चांदी ने 1,131% (CAGR 9.9%) का रिटर्न दिया है. इन आंकड़ों से साफ है कि बाजार के हालिया दबाव और छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव में सोना अधिक सुरक्षित साबित हुआ है, लेकिन लंबी अवधि में अधिक वेल्थ बनाने के मामले में चांदी ने बाजी मारी है.
क्यों सोने से ज्यादा टूटी चांदी?
- इंडस्ट्रियल डिमांड का झटका: सोना जहां मुख्य रूप से ‘सेफ-हेवन’ है, वहीं चांदी की कुल मांग का 50% से अधिक हिस्सा इंडस्ट्रीज से आता है. वैश्विक आर्थिक सुस्ती और ऊंची ब्याज दरों की वजह से जब मैन्युफैक्चरिंग प्रभावित होती है, तो चांदी पर दोहरा झटका लगता है. सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियों द्वारा चांदी का इस्तेमाल घटाने से इस साल सौर ऊर्जा क्षेत्र में इसकी मांग करीब 30% गिरने का अनुमान है.
- केंद्रीय बैंकों द्वारा न खरीदना: सोने को दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों का मजबूत सहारा मिलता है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, पिछले 3 वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने हर साल औसतन 1,000 टन से अधिक सोना खरीदा है. इसके उलट, कोई भी केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में चांदी नहीं रखता.
- छोटा बाजार और सट्टेबाजी: LBMA के आंकड़ों के मुताबिक, चांदी का साप्ताहिक कारोबार 137 अरब डॉलर का है जो सोने के कुल कारोबार 935 अरब डॉलर का महज 15% है. छोटा बाजार होने के कारण बिकवाली के मामूली ऑर्डर भी चांदी की कीमतों को तेजी से नीचे गिरा देते हैं. इसके अलावा CME द्वारा मार्जिन बढ़ाए जाने और डॉलर इंडेक्स की मजबूती के चलते सट्टेबाजों की ताबड़तोड़ बिकवाली ने गिरावट की आग में घी का काम किया.
क्या और गिरेगा चांदी का भाव
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ग्लोबल रिसर्च ने चांदी का औसत सालाना अनुमान 84 डॉलर से घटाकर 70 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. सिल्वर इंस्टीट्यूट का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में मांग करीब 10% घटेगी. हालांकि, राहत की बात यह है कि 2026 में लगातार छठे साल चांदी का बाजार डेफिसिट (आपूर्ति से ज्यादा मांग) में रहने का अनुमान है. कमोडिटी जानकारों का कहना है कि टिकाऊ रिकवरी से पहले कीमतों में थोड़ा और दबाव दिख सकता है.