सुप्रीम कोर्ट जज ने बीच बहस पकड़ी तुषार मेहता की चालाकी, फिर पूछा ये सवाल
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Supreme Court News: कुछ मेट्रो स्टेशनों को बंद कर और दर्जनों ट्रेनों को रोक कर क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की गई है? सॉलिसिटर जनरल ने इसको लेकर टॉप कोर्ट में जो दलील दी, बेंच में शामिल जज ने उसपर गंभीर सवाल पूछे हैं. याचियों की ओर से पेश वकीलों की टीम में कपिल सिब्बल भी शामिल थे.
vसुप्रीम कोर्ट में रविवार को सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान दिल्ली मेट्रो के स्टेशन को बंद करने के मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए.
दरअसल, सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को बंद करने को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे. उन्होंने कोर्ट को बताया कि दिल्ली मेट्रो ने 10 अक्टूबर को पूरे नेटवर्क में निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार कुल 4,157 ट्रेन सेवाओं का संचालन किया. मेट्रो प्रशासन के मुताबिक, कानून प्रवर्तन एजेंसी के निर्देशों के अनुरूप सुरक्षा कारणों से कुछ स्टेशनों पर प्रवेश यानी एंट्री और निकास यानी एग्जिट को प्रतिबंधित किया गया था. दिल्ली मेट्रो नेटवर्क में कुल 303 स्टेशन हैं, जिनमें से केवल 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास संबंधी पाबंदियां लगाई गईं. तुषार मेहता के अनुसार, यह कुल स्टेशनों का लगभग 15 प्रतिशत है. मेट्रो प्रशासन ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंध पूरे नेटवर्क पर लागू नहीं थे, बल्कि निर्देशों के अनुसार चुनिंदा स्टेशनों तक सीमित रखे गए थे.
मेट्रो ट्रेनों की संख्या में कटौती नहीं
एसजी तुषार मेहता ने आगे बताया कि 10 अक्टूबर को किसी भी मेट्रो सेवा में कटौती नहीं की गई. इस दिन मेट्रो ट्रेनों के ऑपरेशन की कुल संख्या में कोई कमी नहीं हुई. शनिवार के निर्धारित मानक शेड्यूल के अनुसार ही ट्रेनें चलाई गईं और 10 अक्टूबर को कुल 271 ट्रेनें परिचालन में लगाई गईं. तुषार मेहता ने आगे बताया कि जहां तक बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका का सवाल है, इसके संबंध में कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया. यहां जिन लोगों का जिक्र किया गया है, उनमें से ज्यादातर को दोपहर दो बजे हिरासत में लिया गया था और शाम करीब छह बजे रिहा कर दिया गया.
जज ने पकड़ी चालाकी, फिर पूछा कौन सा सवाल
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने तुषार मेहता के जवाब पर पूछा कि जब आप अपना हलफनामा दाखिल करेंगे, तो उसमें हमें स्पष्ट जानकारी चाहिए होगी. बात यह है कि शुरुआत में आपने 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का प्रस्ताव दिया था, फिर हमारे (सुप्रीम कोर्ट) आदेश के बाद 45 स्टेशन बंद कर दिए गए. हम चाहते हैं कि आप बताएं कि इन 45 स्टेशनों की स्थिति क्या थी. जस्टिस बागची ने आगे कहा कि इसे इस तरह समझिए कि मान लीजिए आपके 113 स्टेशन सीधी लाइन में स्थित हैं. एक छोर पर 20 स्टेशन खुले हैं और दूसरे छोर पर भी 20 स्टेशन खुले हैं, लेकिन बीच के पूरे हिस्से में आवागमन बंद है. हमें इस पहलू की जांच करनी है. इसलिए जब आप अपना जवाबी हलफनामा या अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें, तो कृपया एक नक्शे के जरिए स्पष्ट रूप से बताएं कि कौन-से स्टेशन खुले थे और कौन-से बंद थे. इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि वहां तक पहुंच की स्थिति क्या थी और प्रतिबंध किस प्रकार लगाए गए थे. ठीक है?