प्रेमानंद महाराज के आश्रम में शिष्य की मौत पर अनिरुद्धाचार्य ने तोड़ी चुप्पी, बोले- गलत रास्ता अपनाया, इसमें महाराज जी की क्या गलती?

प्रेमानंद महाराज के आश्रम में शिष्य की मौत पर अनिरुद्धाचार्य ने तोड़ी चुप्पी, बोले- गलत रास्ता अपनाया, इसमें महाराज जी की क्या गलती?


Premanand Maharaj Ashram Controversy: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े एक शिष्य की मौत को लेकर पिछले कुछ समय से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा हुई और कुछ लोगों ने इसे प्रेमानंद महाराज से जोड़कर देखना शुरू कर दिया. अब इस पूरे मामले पर प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने अपनी बात रखी है. न्यूज 18 के पत्रकार किशोर अजवाणी को दिए एक इंटरव्यू में अनिरुद्धाचार्य ने प्रेमानंद महाराज का समर्थन करते हुए कहा कि वह उच्च कोटि के संत और भगवान के सच्चे भक्त हैं. उनकी भक्ति और उपासना पर किसी को सवाल नहीं उठाना चाहिए. अनिरुद्धाचार्य ने शिष्य की मौत को दुखद बताते हुए कहा कि किसी शिष्य के व्यक्तिगत फैसले के लिए उसके गुरु को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है.

उन्होंने यह भी कहा कि शिष्य ने अपनी इच्छाओं पर काबू पाने के लिए शायद गलत रास्ता अपना लिया, जिसकी वजह से उसकी जान चली गई. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि शिष्य के मन में क्या चल रहा था, यह उन्हें नहीं मालूम. इंटरव्यू में उन्होंने इस घटना के बाद प्रेमानंद महाराज को लेकर उठ रहे सवालों और विराट कोहली से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया.

प्रेमानंद महाराज के आश्रम में क्या हुआ? अनिरुद्धाचार्य ने दिया जवाब
इंटरव्यू के दौरान पत्रकार किशोर अजवाणी ने अनिरुद्धाचार्य से पूछा कि उनकी नजर में प्रेमानंद महाराज के आश्रम में आखिर क्या हुआ था. इस सवाल पर अनिरुद्धाचार्य ने सबसे पहले प्रेमानंद महाराज के प्रति अपना सम्मान जाहिर किया. उन्होंने कहा कि वह प्रेमानंद महाराज के केवल दूर से दर्शन करते हैं. इसके बाद उन्होंने उन्हें उच्च कोटि का संत और भगवत भक्त बताया. अनिरुद्धाचार्य के मुताबिक, प्रेमानंद महाराज की उपासना और भक्ति को लेकर किसी तरह का संदेह नहीं होना चाहिए. हालांकि, जब बात आश्रम से जुड़े शिष्यों की आई तो अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि वह यह नहीं जानते कि किसी शिष्य के मन में क्या चल रहा है. उनका कहना था कि गुरु के प्रति सम्मान और शिष्य के व्यक्तिगत व्यवहार को अलग-अलग समझने की जरूरत है.

शिष्य ने ऐसा कदम क्यों उठाया? अनिरुद्धाचार्य ने कही बड़ी बात
बातचीत के दौरान अनिरुद्धाचार्य ने उस शिष्य की मौत का भी जिक्र किया, जिसने कथित तौर पर अपने निजी अंग को गंभीर नुकसान पहुंचाया था. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर शिष्य ने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसका जवाब अब कौन दे सकता है. अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि इस सवाल का सही जवाब वही शिष्य दे सकता था, लेकिन अब उसकी मौत हो चुकी है. इसलिए उसके मन में क्या चल रहा था और उसने ऐसा क्यों किया, इसके बारे में निश्चित तौर पर कुछ कहना मुश्किल है.

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उन्होंने यह संभावना जताई कि शायद शिष्य अपनी इच्छाओं पर काबू पाने की कोशिश कर रहा हो और इसी दौरान उसने गलत तरीका अपना लिया हो. हालांकि, यह अनिरुद्धाचार्य का अनुमान था, घटना की पुष्टि की गई वजह नहीं. उनके मुताबिक, शिष्य ने जो रास्ता चुना, वह गलत था और उसका नतीजा बेहद दुखद रहा.

संत इंद्रियों पर नियंत्रण की सीख देते हैं, शरीर को नुकसान पहुंचाने की नहीं
अनिरुद्धाचार्य ने इंटरव्यू में समझाया कि संत अपने शिष्यों को इंद्रियों और इच्छाओं पर नियंत्रण रखने की शिक्षा देते हैं. आध्यात्मिक जीवन में मन को संभालना और अपनी इच्छाओं पर काबू रखना महत्वपूर्ण माना जाता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति अपने शरीर को नुकसान पहुंचाए. उन्होंने कहा कि कोई संत अपने शिष्य से ऐसा कदम उठाने के लिए नहीं कहेगा. अनिरुद्धाचार्य के अनुसार, संभव है कि शिष्य ने इच्छाओं पर नियंत्रण रखने की बात को अपने तरीके से समझा हो और ऐसा रास्ता चुन लिया हो जो उसके लिए नुकसानदायक साबित हुआ. इस बयान के जरिए उन्होंने संतों की शिक्षाओं और किसी शिष्य द्वारा उठाए गए व्यक्तिगत कदम के बीच अंतर समझाने की कोशिश की.
शिष्य की मौत के लिए प्रेमानंद महाराज को जिम्मेदार मानना कितना सही?
इंटरव्यू में अनिरुद्धाचार्य ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी नजर में शिष्य की मौत का प्रेमानंद महाराज से कोई संबंध नहीं था. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति से जुड़ा कोई दूसरा व्यक्ति परेशानी में आकर गलत कदम उठा लेता है, तो क्या उसके लिए पहले व्यक्ति को जिम्मेदार माना जा सकता है? अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने एक सामान्य उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि मान लीजिए किसी का शिष्य है या कोई जानने वाला है.

अगर वह व्यक्ति किसी तनाव या परेशानी के चलते अपने साथ कुछ गलत कर लेता है, तो केवल जान-पहचान होने के कारण दूसरे व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. अनिरुद्धाचार्य का कहना था कि इसी तरह किसी शिष्य का प्रेमानंद महाराज से जुड़ा होना अपने आप में उन्हें उस घटना का जिम्मेदार नहीं बना देता. हालांकि, यह अनिरुद्धाचार्य की व्यक्तिगत राय है. किसी घटना में जिम्मेदारी तय करना जांच और उपलब्ध तथ्यों पर निर्भर करता है.

शिष्य महाराज जी के साथ नहीं रहता था, इंटरव्यू में किया दावा
अनिरुद्धाचार्य ने बातचीत में एक और महत्वपूर्ण बात कही. उनके अनुसार, जिस शिष्य की मौत हुई, वह अपने अपार्टमेंट में रह रहा था और प्रेमानंद महाराज के साथ नहीं रहता था. उन्होंने इसी बात का जिक्र करते हुए कहा कि घटना को सीधे महाराज जी से जोड़ना सही नहीं है. उनका तर्क था कि जब शिष्य अलग रह रहा था और उसने व्यक्तिगत तौर पर कोई कदम उठाया, तो केवल गुरु-शिष्य के संबंध के आधार पर प्रेमानंद महाराज पर सवाल उठाना उचित नहीं है. इस दौरान अनिरुद्धाचार्य ने यह भी साफ किया कि वह शिष्य की मानसिक स्थिति या उसके फैसले की असली वजह नहीं जानते. इसलिए उन्होंने किसी निश्चित कारण का दावा करने के बजाय अपनी समझ के आधार पर बात रखी.

एक मामला शांत हुआ तो दूसरे मुद्दे पर सवाल उठने लगे
अनिरुद्धाचार्य ने इंटरव्यू में प्रेमानंद महाराज को लेकर लगातार हो रही चर्चाओं पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि पहले शिष्य की मौत को महाराज जी से जोड़कर देखा गया. इसके बाद जब उस घटना को लेकर स्थिति स्पष्ट होने लगी तो दूसरे मामलों को लेकर सवाल उठाए जाने लगे. उन्होंने बातचीत में विराट कोहली का भी जिक्र किया. अनिरुद्धाचार्य का कहना था कि एक विवाद के बाद दूसरा मुद्दा सामने आने लगा और प्रेमानंद महाराज लगातार चर्चा के केंद्र में बने रहे. हालांकि, इस हिस्से में उन्होंने विराट कोहली से जुड़े किसी आरोप का विस्तार से प्रमाण नहीं दिया. उनका मुख्य जोर इस बात पर था कि किसी भी घटना को बिना पूरी जानकारी के किसी संत से जोड़कर नहीं देखना चाहिए.

प्रेमानंद महाराज की भक्ति पर सवाल नहीं उठाने चाहिए: अनिरुद्धाचार्य
अनिरुद्धाचार्य ने पूरी बातचीत में प्रेमानंद महाराज के प्रति सम्मान जताया. उन्होंने उन्हें उच्च कोटि का संत बताते हुए कहा कि उनकी भक्ति और उपासना को लेकर कोई किंतु-परंतु नहीं होना चाहिए. उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि किसी गुरु की शिक्षाओं और उसके शिष्य के व्यक्तिगत फैसलों को एक जैसा नहीं माना जा सकता. उन्होंने शिष्य के उठाए गए कदम को गलत बताया और कहा कि उससे प्रेमानंद महाराज को जोड़ना उचित नहीं है. इस इंटरव्यू में अनिरुद्धाचार्य ने प्रेमानंद महाराज के समर्थन में अपनी बात रखी, लेकिन शिष्य की मौत के पीछे की असली वजह बताने का दावा नहीं किया. उन्होंने खुद स्वीकार किया कि वह नहीं जानते कि शिष्य के मन में क्या चल रहा था.

ऐसे में इस पूरे मामले को समझते समय दो बातें महत्वपूर्ण हैं. पहली, अनिरुद्धाचार्य ने प्रेमानंद महाराज के पक्ष में अपनी राय रखी है. दूसरी, शिष्य की मौत की परिस्थितियों और उसके फैसले के पीछे की वास्तविक वजह का निर्धारण जांच के आधार पर ही किया जा सकता है.



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