पिथौरागढ़: पहाड़ में आसान होगी बेटियों की राह, स्कूली बच्चियों को अपने खर्च पर साइकिल चलाना सिखा रहे प्रिंसिपल साहब


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Pithoragarh News: पहाड़ की बेटियां पढ़ाई के साथ साइकिल चलाना भी सीखें, इसके लिए पिथौरागढ़ के एक स्कूल के प्रभारी प्रिंसिपल ने अपने स्तर पर पहल की है. गंगोलीहाट के भूलीगांव इंटर कॉलेज में आनंद मेहरा ने दूसरे शिक्षकों की मदद से चार साइकिल खरीदीं, जिनसे छात्राओं को स्कूल में ही ट्रेनिंग दी जा रही है. छात्राएं रोजाना स्कूल शुरू होने से एक घंटा पहले पहुंचती हैं और इसी दौरान साइकिल चलाना सीखती हैं. खास बात यह है कि जो छात्राएं साइकिल चलाना सीख चुकी हैं, वे अब अपनी जूनियर छात्राओं की मदद भी कर रही हैं.

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स्कूली बच्चियों को अपने खर्च पर साइकिल चलाना सिखा रहे प्रिंसिपल साहबZoom

पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट में छात्राओं को मिल रही फ्री साइकिल ट्रेनिंग

पिथौरागढ़: पहाड़ों में आज भी कई बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए रोज कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. ऐसे में अगर उन्हें साइकिल चलाना आ जाए, तो आने वाले समय में उनका सफर आसान हो सकता है. इसी सोच के साथ गंगोलीहाट तहसील के भूलीगांव इंटर कॉलेज के प्रभारी प्रिंसिपल आनंद मेहरा ने एक पहल शुरू की है. वह अपने खर्चे पर स्कूल की छात्राओं को साइकिल चलाना सिखा रहे हैं. इसके लिए उन्होंने दूसरे शिक्षकों की मदद से चार साइकिल खरीदी हैं.

स्कूल में छात्राएं पढ़ाई के साथ साइकिल चलाना भी सीख रही हैं. इसके लिए वे रोज स्कूल शुरू होने से करीब एक घंटे पहले पहुंच जाती हैं. इस दौरान शिक्षक उन्हें साइकिल चलाने की ट्रेनिंग देते हैं. खास बात यह है कि जो छात्राएं साइकिल चलाना सीख चुकी हैं, वे अब अपनी जूनियर छात्राओं को भी सिखाने में मदद करती हैं. इससे छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे एक-दूसरे का साथ देकर आगे बढ़ रही हैं.

अंग्रेजी पढ़ाते समय आया साइकिल सिखाने का ख्याल
प्रभारी प्रिंसिपल आनंद मेहरा ने बताया कि एक दिन वह कक्षा 11 में अंग्रेजी पढ़ा रहे थे, तभी उनके मन में ख्याल आया कि पहाड़ की बच्चियों के लिए कुछ अलग किया जाना चाहिए. शुरुआत में उन्होंने स्कूल में छात्राओं को घुड़सवारी सिखाने के बारे में सोचा. लेकिन बाद में उन्हें लगा कि साइकिल चलाना सीखना छात्राओं के ज्यादा काम आ सकता है. इसके बाद उन्होंने दूसरे शिक्षकों से बात की और उनकी मदद से चार साइकिल खरीदीं. मेहरा का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ साइकिल चलाना सीखना मुश्किल हो सकता है. इसलिए कम उम्र में ही इसे सीख लेना बेहतर है. उनका मानना है कि जब छात्राएं साइकिल चलाना सीख जाएंगी, तो आगे चलकर उनके लिए स्कूटी और मोटरसाइकिल चलाना सीखना भी आसान हो सकता है. जो उनके बहुत काम आएगा.

छह सदनों के हिसाब से मिलती है ट्रेनिंग
स्कूल की सभी छात्राएं साइकिल चलाना सीख सकें, इसके लिए व्यवस्था भी बनाई गई है. फिलहाल स्कूल में छह सदन हैं और छात्राओं को इन्हीं सदनों के हिसाब से ट्रेनिंग दी जाती है. इससे सभी छात्राओं को बारी-बारी से साइकिल सीखने का मौका मिलता है. शिक्षक छात्राओं को सिखाते हैं और जो छात्राएं पहले ही साइकिल चलाना सीख चुकी हैं, वे भी अपनी जूनियर छात्राओं की मदद करती हैं.



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