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समय के साथ लोगों के बात-व्यवहार और सोच-विचार के साथ ही तिथि-त्योहार में भी बदलाव आया है. पहले कई त्योहार जहां कुछ राज्यों तक ही सीमित थे अब वो कई अन्य राज्यों में भी बड़े धूम-धाम के साथ मनाए जाते हैं. डांडिया भी ऐसा पर्व है. राजस्थानी-गुजराती डांस डांडिया यूपी से लेकर बिहार और अन्य राज्यों में भी धूमधाम से मनाया जाता है. आप भी डांडिया करने की तैयारी में हैं तो दरभंगा में डांडिया डांस सिखाया जा रहा है.
दरभंगा: दुर्गा पूजा आते ही डांडिया नाइट्स का क्रेज सिर चढ़कर बोलता है. बड़े-बड़े पंडालों में जब डीजे पर डांडिया की थाप बजती है तो हर कोई झूमना चाहता है, लेकिन कई लोगों को डांडिया का एक स्टेप भी नहीं आता. हाथ में डांडिया पकड़ना तक नहीं आता और इसी शर्मिंदगी के कारण कई लोग प्रोग्राम बीच में ही छोड़कर चले जाते हैं. ऐसा हम नहीं, बल्कि वो छात्राएं कह रही हैं जो खुद इस शर्मिंदगी को झेल चुकी हैं. इसी अनुभव से सीख लेकर दरभंगा के युवाओं की एक टीम ने इस बार अनोखी पहल की है.
सृष्टि फाउंडेशन के बैनर तले सृष्टि डांस एकेडमी में दुर्गा पूजा स्पेशल डांडिया धमाल की तैयारी चल रही है. यहां युवक-युवतियां खुद भी सीख रहे हैं और आने वाले लोगों को भी डांडिया सिखा रहे हैं. खास बात यह है कि इसका क्रेज इतना बढ़ गया है कि दरभंगा ही नहीं, मधुबनी जिले से भी लड़कियां रोजाना दरभंगा आकर डांडिया सीख रही हैं. आसपास के जिलों में भी इसका जादू खूब दिख रहा है.
सृष्टि डांस एकेडमी की छात्रा दिव्या बताती हैं, “हम लोगों ने कई बार देखा है कि डांडिया नाइट्स में कई लोग शर्मिंदा महसूस करते हैं क्योंकि उन्हें डांडिया डांस नहीं आता. कई लोगों को डांडिया पकड़ना तक नहीं आता, तो वैसे लोगों के लिए ही यह पहल की गई है. यहां रोजाना मधुबनी से लोग सिर्फ डांडिया सीखने आ रहे हैं.”
मिथिलांचल में इस पर सवाल भी उठते हैं. कुछ लोग कहते हैं कि यहां मिथिला कल्चर चलता है, डांडिया तो राजस्थानी-गुजराती कल्चर है. अपने लोक नृत्य को छोड़कर ये सब क्यों? इस पर दिव्या कहती हैं, “ऐसा नहीं है. दुर्गा पूजा पूरे इंडिया में मनाया जाता है. जब गुजराती लोग दुर्गा पूजा मना सकते हैं, तो हम मिथिला के लोग डांडिया क्यों नहीं कर सकते? यह खुशी और भक्ति का त्योहार है.”