अक्टूबर में लगाएं हाइब्रिड आम, ये किस्म पूरे साल देगी फल, लगाने का आसान तरीका
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Mango Farming Tips: किसान यदुनंदन प्रसाद वर्मा अपने जैविक कृषि फार्म में आम की अलग-अलग किस्मों को लगाते हैं. वह ग्राफ्टेड यानी कलम से तैयार किए गए पौधों को प्राथमिकता देते हैं. ग्राफ्टेड पौधे सामान्य बीज से उगाए गए आम के पेड़ों की तुलना में जल्दी फल देते हैं.
बिलासपुर. आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसकी खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है. अगर आप भी अपने खेत या बाड़ी में आम के पौधे लगाने की योजना बना रहे हैं, तो अक्टूबर का महीना आपके लिए खास हो सकता है. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मल्हार में स्थित डीजे वर्मा जैविक कृषि फार्म में किसान यदुनंदन प्रसाद वर्मा अलग-अलग वैरायटी के ग्राफ्टेड आम के पौधे लगा रहे हैं. इनमें मियां जाकी और स्वीट कटिमन जैसी किस्में शामिल हैं. किसान का कहना है कि स्वीट कटिमन आम की खासियत यह है कि इसमें सामान्य आम की तरह केवल एक ही मौसम में नहीं बल्कि अनुकूल परिस्थितियों में अलग-अलग समय पर भी फल आ सकते हैं. फार्म में वर्ष 2024 में लगाया गया स्वीट कटिमन का पौधा अभी भी फल दे रहा है. आम के पौधों को सही तरीके से लगाने, उनकी शुरुआती देखभाल करने और उनके बीच सब्जियों की खेती कर अतिरिक्त उत्पादन लेने का तरीका भी यहां देखने को मिल रहा है.
यदुनंदन प्रसाद वर्मा अपने जैविक कृषि फार्म में आम की अलग-अलग किस्मों को लगा रहे हैं. इस दौरान वह ग्राफ्टेड यानी कलम से तैयार किए गए पौधों को प्राथमिकता दे रहे हैं. ग्राफ्टेड पौधे सामान्य बीज से उगाए गए आम के पेड़ों की तुलना में जल्दी फल देने की क्षमता रखते हैं. हालांकि फल आने का समय पौधे की किस्म, उसकी उम्र, देखभाल और मौसम जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करता है, इसलिए पहले ही साल फल मिलने की गारंटी नहीं होती.
स्वीट कटिमन आम की खासियत
फार्म में लगे स्वीट कटिमन आम के पौधे में फल दिखाई दे रहे हैं. किसान के मुताबिक, वर्ष 2024 में लगाए गए इस पौधे में अच्छे फल लगे हैं. इस किस्म को बारहमासी आम के रूप में बताया जा रहा है. हालांकि फल आने की निरंतरता स्थानीय जलवायु और पौधे की देखभाल पर निर्भर करती है. अधिक बारिश के कारण इस बार कुछ फलों पर दाग भी दिखाई दे रहे हैं. इसके बावजूद पौधे में फल लगना इसकी बढ़वार और उत्पादन की संभावनाओं को दर्शाता है.
आम का पौधा लगाने का आसान तरीका
आम का पौधा लगाने के लिए सबसे पहले उपयुक्त जगह का चयन करना जरूरी है. इसके बाद मिट्टी और जल निकासी के अनुसार गड्ढा तैयार कर पौधे को सावधानी से लगाया जाता है. पौधे की जड़ों को नुकसान पहुंचाए बिना मिट्टी भरनी चाहिए और उसके बाद पर्याप्त पानी देना चाहिए. पौधे के आसपास की मिट्टी को हल्के हाथों से दबाकर स्थिर किया जा सकता है. ध्यान रखें कि पौधे के तने के पास पानी जमा न हो क्योंकि लंबे समय तक जलभराव रहने से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है.
कम पानी में भी हो सकती है आम की खेती
यदुनंदन प्रसाद वर्मा के अनुसार, आम की खेती में पौधे स्थापित होने के बाद पानी की जरूरत परिस्थितियों के हिसाब से प्रबंधित की जा सकती है. हालांकि शुरुआती अवस्था में नियमित सिंचाई जरूरी है. खासकर गर्मी के मौसम में पौधे को नमी की कमी से बचाना चाहिए. वहीं अधिक बारिश के दौरान खेत में पानी की निकासी की व्यवस्था करना भी जरूरी है. सही किस्म का चयन, उचित दूरी, समय पर खाद और पौधों की देखभाल से बेहतर उत्पादन की संभावना बढ़ाई जा सकती है.
आम के साथ सब्जियों की खेती से अतिरिक्त आमदनी
आम के पौधे लगाने के बाद शुरुआती वर्षों में उनके बीच खाली जगह का उपयोग सब्जियों की खेती के लिए किया जा सकता है. इसे अंतरवर्तीय खेती यानी इंटरक्रॉपिंग कहा जाता है. किसान खेत की स्थिति और पौधों के बीच उपलब्ध जगह के अनुसार उपयुक्त सब्जियां लगा सकते हैं. इससे आम के पेड़ों के बड़े होने तक अतिरिक्त उत्पादन मिल सकता है और खेत का बेहतर उपयोग किया जा सकता है. हालांकि फसलों के बीच प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए पानी, पोषण और धूप की जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी है.
किसानों के लिए सलाह
यदुनंदन प्रसाद वर्मा किसानों से अपील करते हैं कि वे अपने खेतों और बाड़ियों में आम के पौधे लगाकर फल उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ें. ग्राफ्टेड पौधों का चयन करते समय उनकी किस्म, गुणवत्ता और विश्वसनीय नर्सरी से मिलने की पुष्टि करनी चाहिए. साथ ही पौधों को लगाने के बाद शुरुआती देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. सही प्रबंधन के साथ आम की खेती किसानों के लिए लंबे समय तक उत्पादन का विकल्प बन सकती है.