नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल की प्रसिद्ध नैनी झील को रिचार्ज करने वाली सुखताल झील इन दिनों पानी से लबालब भरी हुई है. मानसून के बाद झील के भरने से जहां यहां पानी की अच्छी उपलब्धता दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर झील में जमा प्लास्टिक और अन्य कचरे ने सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए सौंदर्यीकरण के बावजूद झील की बदहाल स्थिति स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा रही है.
लोगों का आरोप है कि झील में सीवर का पानी पहुंचने से आसपास के क्षेत्र में गंदगी और बदबू की समस्या बनी हुई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी सुखताल को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए.
पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा
दरअसल, करीब दो साल पहले कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) की कार्यदायी संस्था के रूप में सुखताल झील के सौंदर्यीकरण का काम कराया गया था. इस परियोजना के तहत झील के आसपास पाथवे, पार्क, रेलिंग और लाइट के पोल सहित अन्य सुविधाएं विकसित की गई थीं. योजना का उद्देश्य सुखताल को आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के साथ ही क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना था.
हालांकि, मानसून के बाद झील में पानी भरने से सौंदर्यीकरण के तहत विकसित किए गए कई हिस्से पानी में डूब गए. वहीं, झील में दिखाई दे रहा कचरा और स्थानीय लोगों की ओर से सीवर का पानी पहुंचने के लगाए जा रहे आरोप परियोजना की उपयोगिता और रखरखाव पर सवाल उठा रहे हैं.
सौंदर्यीकरण के नाम पर पैसा बर्बाद होने का आरोप
सुखताल निवासी जॉन हार्पर ने झील की मौजूदा स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सौंदर्यीकरण के नाम पर पैसा बर्बाद हुआ है. उनका आरोप है कि झील में लगातार सीवर का पानी पहुंच रहा है और पूरी झील में कूड़ा जमा है. उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार जल संस्थान के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नहीं उठा. जॉन हार्पर के मुताबिक, सुखताल के विकास के लिए करीब 26 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना थी.
इसके तहत शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने और झील में बोटिंग जैसी गतिविधियां शुरू करने की बात कही गई थी, लेकिन उनकी नजर में ये योजनाएं धरातल पर पूरी तरह साकार नहीं हो पाई हैं. उन्होंने कहा कि झील के आसपास करीब एक हजार परिवार रहते हैं. ऐसे में गंदगी और बदबू के बीच रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है.
वार्ड मेंबर ने उठाए योजना पर सवाल
सुखताल वार्ड की वार्ड मेंबर गजाला कमाल ने बताया कि झील के सौंदर्यीकरण का काम कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से कराया गया था. करीब 25 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत कुछ कार्य हुए हैं, लेकिन उनके मुताबिक काम अधूरा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब सुखताल में मानसून के दौरान पानी भरने की संभावना रहती है, तो परियोजना तैयार करते समय जलस्तर और मौसमी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बेहतर योजना क्यों नहीं बनाई गई.
पर्यटकों को आकर्षित करने की योजना
गजाला कमाल ने कहा कि झील में पानी भरने से सौंदर्यीकरण के कई हिस्से डूब गए हैं. ऐसे में पर्यटकों को आकर्षित करने की योजना कितनी प्रभावी साबित होगी, यह बड़ा सवाल है. उन्होंने मांग की है कि सबसे पहले झील में जमा कूड़े को बाहर निकाला जाए. उनका कहना है कि यदि समय रहते सफाई नहीं की गई, तो पानी उतरने के बाद कचरा और गाद झील के तल में जमा हो सकते हैं, जिससे सफाई की चुनौती और बढ़ जाएगी.
उन्होंने झील में आने वाले जलस्रोतों और पानी की निकासी की व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की. साथ ही सौंदर्यीकरण पर खर्च हुई धनराशि और कराए गए कार्यों की स्थिति स्पष्ट करने के साथ ही करीब 26 करोड़ रुपये की परियोजना की जांच कराने की मांग उठाई.
पर्यावरणीय व्यवस्था के लिए अहम है सुखताल
सुखताल केवल पर्यटन की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसे नैनी झील को रिचार्ज करने वाले प्रमुख जलस्रोतों में भी गिना जाता है. ऐसे में झील में कचरा जमा होने और सीवर का पानी पहुंचने की शिकायतें पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी गंभीर हैं. यदि समय रहते सफाई, सीवर प्रबंधन और जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो इसका असर झील के पर्यावरण और आसपास रहने वाले लोगों पर पड़ सकता है.
अब बड़ा सवाल यह है कि सुखताल के सौंदर्यीकरण पर खर्च हुई करोड़ों रुपये की राशि के अनुरूप सुविधाएं विकसित हुई हैं या नहीं. स्थानीय लोग झील की सफाई, अधूरे कार्यों को पूरा करने और परियोजना की लागत की जांच की मांग कर रहे हैं.