Dr Santosh Kumar Singh IPS: बीएचयू में मिला गोल्ड मेडल, जेएनयू से की पीएचडी, आईपीएस संतोष कुमार सिंह को अब मिली दिल्ली मेट्रो की कमान


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Dr Santosh Kumar Singh IPS: छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस डॉ. संतोष कुमार सिंह को दिल्ली मेट्रो में सीआईएसएफ का डीआईजी बनाया गया है. 9 जिलों में पुलिसिंग, IACP ’40 Under 40′ और जेएनयू-बीएचयू से गोल्ड मेडलिस्ट रहे संतोष सिंह अब दिल्ली में मेट्रो सुरक्षा की कमान संभालेंगे.

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Dr Santosh Kumar Singh IPS: डॉ. संतोष कुमार सिंह का एकेडमिक प्रोफाइल बहुत मजबूत है

नई दिल्ली (Dr Santosh Kumar Singh IPS). राजधानी दिल्ली में मेट्रो आम लोगों का सबसे बड़ा सहारा है. हाल के दिनों में दिल्ली में जारी विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक प्रदर्शनों के बीच मेट्रो स्टेशनों पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन चुनौती बन चुका है. रोजाना 80 लाख से ज्यादा यात्रियों को ले जाने वाली इस लाइफलाइन की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ कैडर के 2011 बैच के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी डॉ. संतोष कुमार सिंह को CISF का DIG (दिल्ली मेट्रो) नियुक्त किया है.

डॉ. संतोष कुमार सिंह गाजीपुर (यूपी) के रहने वाले हैं. indianmasterminds.com की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने जेएनयू और बीएचयू जैसे नामी संस्थानों से पढ़ाई की है. डॉ. संतोष कुमार सिंह केवल नक्सल प्रभावित इलाकों में जमीनी पुलिसिंग के लिए ही नहीं जाने जाते, बल्कि वे जाने-माने अकादमिक विद्वान भी हैं. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आए संतोष कुमार सिंह हैदराबाद में साउथ जोन-2 के डीआईजी के तौर पर बंदरगाहों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा देख रहे थे. पढ़िए आईपीएस की सक्सेस स्टोरी.

बस्तर के नक्सल मोर्चे से लेकर 9 जिलों की कप्तानी का सफर

डॉ. संतोष कुमार सिंह के पास जमीनी पुलिसिंग का लंबा अनुभव है. उन्होंने छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव और रायगढ़ समेत 9 जिलों में एसपी/एसएसपी के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं. इसके अलावा, उन्होंने सुकमा और बस्तर जैसे बेहद संवेदनशील नक्सल प्रभावित इलाकों में भी काम किया है. नक्सली हिंसा से निपटने और बेहद कठिन परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उनके इस अनुभव ने उन्हें मजबूत रणनीतिकार बनाया है.

‘निजात’ अभियान और इंटरनेशनल IACP ’40 Under 40′ अवॉर्ड

डॉ. संतोष कुमार सिंह को संवेदनशील पुलिसिंग के लिए भी पहचाना जाता है. उन्होंने नशीले पदार्थों और अवैध ड्रग्स के खिलाफ ‘निजात’ नाम से जन-जागरूकता अभियान चलाया था. इसमें कार्रवाई के साथ-साथ काउंसिलिंग और पुनर्वास पर जोर दिया गया था. इनोवेटिव पुलिसिंग और महासमुंद में बच्चों के अनुकूल पुलिसिंग पहल के लिए 2021 में अमेरिका की प्रतिष्ठित IACP (International Association of Chiefs of Police) ने उन्हें ’40 Under 40′ ग्लोबल अवॉर्ड से सम्मानित किया था.

‘स्कॉलर-वॉरियर’: बीएचयू गोल्ड मेडल से जेएनयू और पीएचडी तक

संतोष कुमार सिंह ने यूपीएससी सीएसई 2010 में 369वीं रैंक हासिल की थी. आमतौर पर पुलिस अफसरों की पहचान उनके फील्ड एक्शन से होती है, लेकिन डॉ. संतोष सिंह को ‘स्कॉलर-वॉरियर’ कहा जाता है.

  • उन्होंने बीएचयू (BHU) से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन में टॉप किया और पोस्ट-ग्रेजुएशन में गोल्ड मेडल हासिल किया.
  • इसके बाद UGC NET-JRF क्रैक कर जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशंस में M.Phil की और फिर Ph.D पूरी की.
  • वे संयुक्त राष्ट्र (UN) के पीसकीपिंग ऑपरेशन्स पर ‘Institutionalization of Peacebuilding’ नाम की किताब भी लिख चुके हैं.

औद्योगिक सुरक्षा से दिल्ली मेट्रो तक का नया सफर

मार्च 2026 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने के बाद डॉ. संतोष कुमार सिंह को हैदराबाद में CISF साउथ जोन-2 का DIG बनाया गया था. वहां उन्होंने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का नेतृत्व किया. अब दिल्ली मेट्रो जैसी विशाल सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में उनकी तैनाती से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार सुरक्षा प्रबंधन में कोई ढील नहीं चाहती.



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