अगेती गोभी से चमकेगी किसानों की किस्मत! अपनाएं किसान राजेंद्र की ये ट्रिक
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Sitamarhi Agriculture News: सीतामढ़ी के किसान राजेंद्र महतो आधुनिक तकनीक और सही समय पर अगेती गोभी की खेती कर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं. उनकी यह रणनीति अन्य किसानों के लिए प्रेरणा है. उन्होंने कहा कि इस खेती से किसान मालामाल हो सकते हैं. आइये जानते हैं इसकी खेती के बारे में.
सीतामढ़ी: आधुनिक तकनीक और सही समय पर फसलों के प्रबंधन से खेती को मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है. बिहार के अनुभवी किसान राजेंद्र महतो इसका एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहे हैं. राजेंद्र महतो लंबे समय से सब्जियों की अगेती खेती करते आ रहे हैं. इस वर्ष भी वे अगेती गोभी की खेती के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी में जुटे हैं. उनके अनुसार, बाजार में जब सब्जियों की आवक कम होती है, उस समय फसल को बाजार में पहुंचाकर सबसे बेहतरीन और आकर्षक दाम प्राप्त किए जा सकते हैं. इसी रणनीति के तहत वे अगेती गोभी की कटाई का लक्ष्य जनवरी और फरवरी महीने में रखते हैं, जिससे उन्हें फसल का अधिकतम मूल्य मिल सके.
जानें गोभी की कब करें खेती
किसान राजेंद्र महतो बताते हैं कि अगेती गोभी की सफल फसल के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण उसकी नर्सरी (पौध) तैयार करना होता है. वे इसके लिए बीज सीतामढ़ी से लाते हैं और उन्नत हाइब्रिड किस्मों (जैसे 72015, मेंघा और सेमिनेस की किस्में) का चयन करते हैं. जहां नर्सरी में बीज बोने के बाद पौधे को तैयार होने में लगभग 25 से 30 दिन का समय लगता है. वहीं, पौधों को मजबूती देने और उन्हें कीटों से सुरक्षित रखने के लिए वे मिट्टी में वैज्ञानिक संतुलन के साथ डीएपी (DAP) और खाद का उपयोग करते हैं. साथ ही पानी का छिड़काव वर्षा के अनुसार किया जाता है. बारिश न होने पर वे झरने की मदद से हल्की सिंचाई करते हैं.
जानें कितने दिनों में होती है तैयार
नर्सरी में पौधे तैयार होने के बाद इनकी रोपाई का सही समय दीपावली और नवंबर महीने के आसपास शुरू होता है. राजेंद्र महतो का मानना है कि खेत में एक-एक पौधा लगाने के बाद लगभग 15 से 20 दिनों के भीतर ही पूरी फसल तैयार होकर कटाई के लिए तैयार हो जाती है और खेत खाली हो जाता है. अगेती किस्मों की यह खूबी है कि कम समय में खेत खाली होने से किसान अगली फसल की योजना तुरंत बना सकते हैं. किसान राजेंद्र महतो के अनुसार, बाजार में मांग के हिसाब से अलग-अलग चार किस्मों की बुवाई करने से जोखिम कम होता है और उत्पादन का बेहतर औसतन मूल्य प्राप्त होता है.
किसान राजेंद्र महतो जैसे किसानों का यह अनुभव क्षेत्र के अन्य छोटे और मध्यम किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. पारंपरिक खेती के तरीकों से हटकर सही समय पर हाइब्रिड बीजों का चुनाव, नर्सरी का सही देखभाल और पोषक तत्वों का उचित प्रयोग खेती में पैदावार और कमाई दोनों को बढ़ा देता है. यदि अन्य किसान भी इसी तरह योजनाबद्ध ढंग से अगेती सब्जियों की खेती और समय पर बाजार प्रबंधन अपनाएं, तो वे न केवल अपनी लागत घटा सकते हैं, बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज कर सकते हैं.