Chitrakoot News : सामूहिक खेती से महीने में कमा रहीं 20-20 हजार, चित्रकूट की इन महिलाओं ने लगाया ऐसा दिमाग

Chitrakoot News : सामूहिक खेती से महीने में कमा रहीं 20-20 हजार, चित्रकूट की इन महिलाओं ने लगाया ऐसा दिमाग


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Chitrakoot ki local news : चित्रकूट के बगरेही गांव की महिलाएं इन दिनों घर की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी जुटी हैं. करीब 10 महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मूली, करेला, भिंडी, ककड़ी, खीरा, मक्का, टमाटर, बैंगन, मिर्च, गोभी, पालक, मटर, आलू और प्याज उगा रही हैं. एक साल पहले समूह से जुड़कर इन महिलाओं ने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया था. समूह की अध्यक्ष दुजिया देवी लोकल 18 से बताती हैं कि रोजाना करीब 50 किलो सब्जियों का उत्पादन होता है. महीने में करीब 20 हजार रुपये की आमदनी हो रही है.

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चित्रकूट. बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की जिंदगी अक्सर घर के कामकाज, बच्चों की देखभाल और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच गुजर जाती है, लेकिन अब गांव की महिलाएं इन जिम्मेदारियों को निभाने के साथ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी जुटी हैं. चित्रकूट के बगरेही गांव की महिलाओं ने साबित कर दिया है कि अगर सही मार्गदर्शन, थोड़ी आर्थिक मदद और मेहनत करने का जज्बा हो, तो गांव में रहकर भी रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं. यहां भावना स्वयं सहायता समूह में करीब 10 महिलाएं मिलकर सब्जियां उगाती हैं. एक साल पहले समूह से जुड़कर इन महिलाओं ने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया था. आज यही पहल इनके लिए आमदनी का जरिया बन गई है. महिलाएं मूली, करेला, भिंडी, ककड़ी, खीरा, मक्का, टमाटर, बैंगन, मिर्च, गोभी, पालक, मटर, आलू और प्याज समेत कई तरह की सब्जियां उगा रही हैं. दूर-दूर से लोग सब्जी खरीदने आते हैं.

1.82 लाख से शुरू किया काम

समूह की महिलाओं को आजीविका मिशन के माध्यम से 1.82 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली. यह राशि एक प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध कराई गई थी, ताकि समूह की महिलाएं रोजगार शुरू कर सकें और जरूरत के अनुसार ऋण लेकर उसकी किस्तें जमा कर सकें. इस आर्थिक मदद ने महिलाओं को खेती के जरिए अपनी कमाई शुरू करने का अवसर दिया. समूह की अध्यक्ष दुजिया देवी लोकल 18 से बताती हैं कि एक साल पहले तक वे घरेलू कामकाज में व्यस्त रहती थीं. स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद अब वे मिलकर खेतों में सब्जियां उगाती हैं. रोजाना करीब 50 किलो सब्जियों का उत्पादन होता है. इस काम से उन्हें महीने में करीब 20 हजार रुपये की आमदनी हो रही है. ये समूह जैविक विधि से खेती करता है.

ये मिशन बना सहारा

स्वयं सहायता समूह कार्यालय के शेषमणि गौतम कहते हैं कि आजीविका मिशन के माध्यम से जिले की कई महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का काम किया जा रहा है. बगरेही गांव में समूह का गठन करने के बाद महिलाओं को कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र की सहायता से सब्जियों की खेती के लिए पौधे उपलब्ध कराने में सहयोग मिला. समूह की महिलाएं सब्जियां बेचकर रोजाना करीब एक हजार रुपये तक की कमाई कर लेती हैं.



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