न DJ, न चमचमाती गाड़ियां, बैलगाड़ी से जाती थी बारात, दूल्हे के पहुंचने से पहले बाराती पहुंच जाते थे अस्पताल, जानें बुजुर्ग से किस्सा

न DJ, न चमचमाती गाड़ियां, बैलगाड़ी से जाती थी बारात, दूल्हे के पहुंचने से पहले बाराती पहुंच जाते थे अस्पताल, जानें बुजुर्ग से किस्सा


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Jamui News: जमुई के 80 वर्षीय कैलाश सिंह ने बैलगाड़ी के जमाने की शादियों के पुराने और दिलचस्प किस्से साझा किए. उन्होंने बताया कि तब बारात में गाड़ियां नहीं बल्कि बैलगाड़ियां चलती थीं और कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था. उस दौर में दुल्हे के बारात में पहुंचने से पहले ही कई बाराती अस्पताल पहुंच जाते थे.

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जमुई: आज की शादियों में चमचमाती गाड़ियों का काफिला होता है. लोगों का हुजूम होता है, आगे डीजे बज रहा होता है तो बड़े पैमाने पर लोग एयर कंडीशन गाड़ियों में बैठकर बारात में शामिल होते हैं, लेकिन एक जमाना ऐसा भी हुआ करता था. जब इतनी चमक धमक नहीं होती थी. ना तो चमचमाती गाडियां होती थी, और ना ही बारातियों का काफिला होता था. मुश्किल से 40 से 50 लोग बारात में शामिल होते थे और बैलगाड़ी से बारात जाती थी.

ऐसे में कई सारे किस्से भी ऐसे हो जाया करते थे, जो आज तक लोगों को याद है. जमुई जिले के रहने वाले 80 वर्षीय बुजुर्ग कैलाश सिंह बताते हैं कि बारात में बैलगाड़ी से जाने के दौरान ऐसी घटनाएं होती थी, जो आज हमें मजेदार लगती हैं, लेकिन उसे दौर में हमारे लिए परेशानी बन जाती थी, लेकिन लोग बारात जाते जरुर थे. आइये जानते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा.

बारात की बजाय पहुंचना पड़ा था अस्पताल

कैलाश सिंह ने बताया कि मेरे बड़े भाई स्व. अर्जुन सिंह की शादी में भी एक ऐसा ही किस्सा हुआ था. बारात जमुई जिले के खैरा से सोनो जा रही थी, जिसकी दूरी करीब 20 किलोमीटर है. करीब 40 से 50 लोग उस बारात में शामिल थे और हम सब बैलगाड़ी से बारात जा रहे थे. उन्होंने बताया कि इसी बीच हमारे ही गांव का एक व्यक्ति बैलगाड़ी पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था. गाड़ी में बैलों को बांधा गया था और वह बैलगाड़ी के पहिए के धूरे पर से चढ़कर बैलगाड़ी में सवार होने की कोशिश कर रहा था. तभी पीछे से किसी ने बेल के पीठ पर हाथ रख दिया, जिसके बाद बल बिदक गया.

कैलाश सिंह बताते हैं कि बैल बिदकने के बाद वह गाड़ी लेकर सरपट भाग निकला. इससे चक्के पर चढ़ा शख्स नीचे गिर गया और बैलगाड़ी का पहिया उसके पेट से होकर गुजर गया. उसे चोट भी लगी और वह बारात की बजाय उसे अस्पताल ले जाना पड़ा. करीब 7 दिन तक उसका इलाज चला था. ऐसे कई सारे किस्से बारात के दौरान हुआ करते थे.

भीग जाता था जूता और धोती

उन्होंने बताया कि बारात में जाने के दौरान जहां नदी मिल जाती थी. वहां बारातियों के लिए मुसीबत खड़ी हो जाती थी. अभी के जमाने में तो उन नदियों पर पुल बन गए हैं. उस पर से होकर गाड़ियां जाती हैं, लेकिन उस जमाने में पुल नहीं थे, तो नदी से होकर ही बैलगाड़ियों को गुजरना पड़ता था. नदी में रेतीली जमीन में बैलगाड़ी का पहिया धंस जाता था, तो बारातियों को बैलगाड़ी से उतरकर उसे धक्का लगाना पड़ता था. कभी-कभार तो स्थिति ऐसी भी बनती थी कि बैलों को खोलकर गाड़ी को कंधे पर उठाकर नदी के पार करना पड़ता था, तब बारात आगे बढ़ पाती थी.

उन्होंने बताया कि उस जमाने में लोगों के घर में खेती के लिए बैल हुआ करता था और घर-घर जाकर लोग उनके बैलों को मांग कर लाते थे. जिसे गाड़ी में लगाकर बारात में ले जाया जाता था. आज भले ही तमाम तरह की सुविधाएं हैं, लेकिन आज उस जमाने में जो सुकून और खुशी लोगों को मिलती थी. वह अब लोगों के नसीब नहीं हो पाती है.



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