जब अपने पति की चिता पर लेट गई थी महिला… सुल्तानपुर के इस मंदिर का रोचक इतिहास, भक्तों के मन में गहरी आस्था

जब अपने पति की चिता पर लेट गई थी महिला… सुल्तानपुर के इस मंदिर का रोचक इतिहास, भक्तों के मन में गहरी आस्था


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Sultanpur News: सुल्तानपुर के 5 से 7 फीट ऊंचा एक छोटा मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है. आज आसपास के गांवों के लोग यहां पूजा-पाठ करने पहुंचते हैं और इस जगह को श्रद्धा से देखते हैं. आइए इस मंदिर के इतिहास के बारे में बताते हैं.

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सुल्तानपुर: गांव की आबादी से दूर एक बाग में बना महज 5 से 7 फीट ऊंचा यह छोटा सा मंदिर आज ग्रामीणों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. दूर से देखने पर यह मंदिर बेहद साधारण नजर आता है, लेकिन इससे जुड़ी कहानी लोगों को हैरान कर देती है. ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों पहले एक महिला अपने पति की चिता पर लेट गई थी. इसके बाद उसी स्थान से जुड़ी याद में यहां मंदिर बनाया गया और धीरे-धीरे लोगों की आस्था इससे जुड़ती चली गई. आज आसपास के गांवों के लोग यहां पूजा-पाठ करने पहुंचते हैं और इस जगह को श्रद्धा से देखते हैं.

पति की चिता पर लेट गई थी महिला
इस मंदिर से जुड़ी कहानी ग्रामीणों के बीच पीढ़ियों से प्रचलित है. गांव के रहने वाले राम नाइक मिश्र ने लोकल 18 को बताया कि वर्षों पहले गांव की एक महिला अपने पति की चिता पर लेट गई थी. ग्रामीणों के अनुसार, इस घटना के बाद उस स्थान को विशेष महत्व दिया जाने लगा. धीरे-धीरे यहां मंदिर का निर्माण कराया गया और लोग पूजा-पाठ करने लगे. हालांकि, इस घटना से संबंधित कोई ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध होने की पुष्टि नहीं है. ऐसे में इससे जुड़ी जानकारी को स्थानीय लोगों की मान्यता और प्रचलित कहानी के रूप में ही देखा जाता है.

पांडेय परिवार ने बनवाया था मंदिर
ग्रामीण राम नाइक मिश्र के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण गांव के पांडेय परिवार ने करवाया था. मंदिर भले ही आकार में छोटा है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए इसका धार्मिक महत्व काफी अधिक है. गांव की आबादी से दूर बाग में स्थित होने के कारण यहां का वातावरण भी शांत रहता है. ग्रामीण इस स्थान को अपनी पुरानी परंपराओं और पूर्वजों से जुड़ी यादों का प्रतीक मानते हैं. यही वजह है कि लंबे समय से इस मंदिर के प्रति लोगों की श्रद्धा बनी हुई है.

आज भी करही चढ़ाने पहुंचते हैं ग्रामीण
करीब दो शताब्दी पुराने इस मंदिर में आज भी ग्रामीण पूजा-अर्चना करने आते हैं. राम नाइक मिश्र ने लोकल 18 को बताया कि यहां लोगों की गहरी आस्था है और श्रद्धालु आए दिन करही चढ़ाने पहुंचते हैं. आसपास के गांवों के लोग भी इस स्थान पर आकर पूजा-पाठ करते हैं. मंदिर का छोटा आकार और आबादी से दूर इसकी स्थिति इसे दूसरे मंदिरों से अलग बनाती है. स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ पूजा करने का स्थान नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल भी है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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