Vietnam Oil Gas : वियतनाम में मिला तेल-गैस का खजाना, लूटने को दौड़ पड़े अमेरिका-जापान और रूस, शैतान बच्चों वाली हरकत कर रहा चीन

Vietnam Oil Gas : वियतनाम में मिला तेल-गैस का खजाना, लूटने को दौड़ पड़े अमेरिका-जापान और रूस, शैतान बच्चों वाली हरकत कर रहा चीन


साउथ चाइना सी का पानी एक बार फिर दुनिया की महाशक्तियों का सबसे बड़ा अखाड़ा बन चुका है. वियतनाम के पास समंदर में छिपे तेल और प्राकृतिक गैस के अकूत खजाने को निकालने के लिए अमेरिका, जापान और रूस जैसी महाशक्तियों के बीच जबरदस्त होड़ शुरू हो गई है. पश्चिम एशिया में जारी जंग और होर्मुज संकट के कारण वैश्विक ईंधन बाजार में हाहाकार मचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ वियतनाम अपने देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए समंदर की गहराइयों को खंगाल रहा है. लेकिन ये सिर्फ व्यापार का मामला नहीं है, ये सीधी जियोपॉलिटिक्स है, जहां चीन की अवैध ‘नाइन-डैश लाइन’ के ठीक सामने दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने गैस प्लेटफॉर्म खड़े कर रही हैं और चीन यहां शैतान बच्चों वाली हरकत कर रहा है.

समंदर के बीचों-बीच 100 अरब येन का किला: साओ वांग-दाई गुयेत

वियतनाम के दक्षिणी तट से करीब 350 किलोमीटर दूर साउथ चाइना सी में जापान की ‘इदेमित्सु कोसान’ कंपनी का एक विशाल सेंट्रल प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म खड़ा है. नारंगी रंग के लोहे के ढांचे से बना ये प्लेटफॉर्म दूर से ही समंदर का राजा दिखाई देता है. इसे बनाने में लगभग 632 मिलियन डॉलर से ज्यादा का खर्च आया है.

  • रोजाना 40 लाख घन मीटर गैस: साल 2020 से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में समंदर के नीचे हजारों मीटर गहरे गड्ढे खोदकर रोज 40 लाख क्यूबिक मीटर गैस निकाली जा रही है.
  • 10 में से सिर्फ 3 कुएं सफल: तेल और गैस की खुदाई आसान काम नहीं है. कंपनी के इंजीनियरों का कहना है कि 10 अरब येन से ज्यादा खर्च करके खोदे जाने वाले 10 कुओं में से औसतन सिर्फ 3 में ही सफलता मिलती है, और उनमें से भी कई कभी व्यापारिक उत्पादन तक नहीं पहुंच पाते.
  • परमाणु रिएक्टर जितनी ताकत: इस एक प्लेटफॉर्म से निकलने वाली गैस अगर बिजली बनाने में लगा दी जाए, तो ये 1 गीगावाट के परमाणु रिएक्टर के बराबर बिजली पैदा कर सकती है.

चीन की ‘शैतानी’: संदिग्ध जहाजों का मंडराना और रंगबाजी

ये पूरा गैस फील्ड केवल पैसों का खेल नहीं है, बल्कि चीन के साथ सीधे टकराव की सीमा पर स्थित है. ये प्लेटफॉर्म चीन द्वारा किए जाने वाले एकतरफा दावे ‘नाइन-डैश लाइन’ के बेहद करीब है.

चीन यहां किसी शैतान बच्चे की तरह हरकतें कर रहा है. न तो वो खुद इस क्षेत्र में कोई वैध काम कर पा रहा है और न ही वियतनाम को चैन से काम करने देना चाहता है. वियतनाम ने जब-जब अपने जलक्षेत्र में विकास की कोशिश की, चीन ने वहां अपने सर्वे जहाज और कोस्ट गार्ड भेजकर डराने-धमकाने की हरकतें कीं.

गैस प्लेटफॉर्म के प्रोडक्शन हेड जेमी मैकफर्सन का कहना है कि समंदर के इस इलाके में लगभग हर दिन चीन या अन्य देशों के संदिग्ध जहाज चक्कर काटते हुए दिखाई देते हैं. लेकिन सुरक्षा और विदेशी कंपनियों के भारी-भरकम निवेश के दम पर वियतनाम बिना किसी डर के यहां काम जारी रखे हुए है. पश्चिम एशिया संकट के दौरान जब तेल की किल्लत हुई, तब इसी प्लेटफॉर्म से निकले हल्के कच्चे तेल ने वियतनाम की रिफाइनरियों को चालू रखा.

वियतनाम के समंदर में किसकी-किसकी एंट्री?

1990 के दशक में जब वियतनाम के रिश्ते पश्चिमी देशों से सुधरे, तब कई प्रोजेक्ट शुरू हुए थे. अब पुराने तेल के कुओं में उत्पादन घटने के बाद नए प्रोजेक्ट्स की बाढ़ आ गई है.

  1. अमेरिका की एंट्री : अमेरिका की ‘मर्फी ऑयल’ दक्षिण कोरिया के ‘एसके ग्रुप’ के साथ मिलकर ‘लाक दा वांग’ ऑयल फील्ड पर काम कर रही है. वहीं, अमेरिकी दिग्गज कंपनी ‘एक्सॉनमोबिल’ दा नांग के तट पर ‘का वोई छान’ गैस फील्ड को डेवलप करने की अगुआई कर रही है, जो वियतनाम का सबसे बड़ा गैस फील्ड बनने जा रहा है.
  2. जापान का बड़ा दांव : मोगरा और मरुबेनी जैसी जापानी कंपनियां ‘ब्लॉक बी’ प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं. गल्फ ऑफ थाईलैंड में स्थित इस प्रोजेक्ट से अगले साल तक गैस का उत्पादन शुरू हो जाएगा.
  3. रूस की 40 साल पुरानी दोस्ती : रूस इस इलाके में नया खिलाड़ी नहीं है. रूसी सरकारी कंपनी ‘जारुबेझनेफ्ट’ पिछले चार दशकों से वियतनाम के समंदर में तेल-गैस निकाल रही है. जून 2026 में वियतनामी प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग ने रूसी सीईओ से मुलाकात कर नए ब्लॉक्स में निवेश का पूरा समर्थन दिया है.

कर्मचारियों की ‘पोचिंग’ और भारी सैलरी का खेल

साउथ चाइना सी में तेल और गैस निकालने की इस होड़ ने वियतनाम में कर्मचारियों की भारी मांग पैदा कर दी है. आलम ये है कि इदेमित्सु कंपनी के दफ्तरों में काम के दौरान ही कर्मचारियों के पास दूसरी कंपनियों से जॉब ऑफर के कॉल आ रहे हैं.

खासकर अमेरिकी कंपनियां भारी-भरकम सैलरी और पैकेज का लालच देकर अनुभवी इंजीनियरों और कर्मचारियों को अपनी ओर खींच रही हैं. विदेशी कंपनियों के बीच टैलेंट को चुराने की ये जंग दिन-ब-दिन तेज होती जा रही है.

वियतनाम के लिए क्यों जरूरी है ये ‘गैस गेम’?

वियतनाम की अर्थव्यवस्था तेजी से भाग रही है और इसके साथ ही देश में बिजली की मांग भी आसमान छू रही है. अब तक वियतनाम बिजली बनाने के लिए पनबिजली और कोयले पर निर्भर रहा है.

  1. बिजली बास्केट: वियतनाम में लगभग 50% बिजली कोयले से और 30% पनबिजली से बनती है. बाकी हिस्सा गैस, सौर और पवन ऊर्जा से आता है.
  2. 2030 तक का मास्टरप्लांट: वियतनामी सरकार का प्लान है कि 2030 तक गैस से बनने वाली बिजली की क्षमता को बढ़ाकर 37 गीगावाट तक पहुंचाया जाए.
  3. एलएनजी इंपोर्ट का खतरा: जनवरी में वियतनाम ने अपना पहला LNG पावर प्लांट चालू किया था. लेकिन विदेश से एलएनजी मंगवाना बेहद जोखिम भरा है, क्योंकि ईरान युद्ध और मध्य-पूर्व तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में गैस के दाम रातों-रात आसमान छूने लगते हैं. इसीलिए वियतनाम विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर अपने समंदर में ही गैस खंगाल रहा है.

अमेरिका, जापान और रूस की एंट्री के बाद भी वियतनाम के लिए मुसीबत कम नहीं

भले ही अमेरिका, जापान और रूस की कंपनियां वियतनाम के समंदर में अरबों डॉलर बहा रही हों, लेकिन आगे का रास्ता बेहद चुनौतीपूर्ण है. वियतनाम के बचे हुए गैस और तेल के भंडार समंदर की बहुत ज्यादा गहराई में स्थित हैं. गहरे पानी में खुदाई करने के लिए न केवल नई और महंगी तकनीक की जरूरत होगी, बल्कि लागत भी कई गुना बढ़ जाएगी.

इसके साथ ही चीन का आक्रामक रवैया और साउथ चाइना सी का तनाव इस पूरे बिजनेस के ऊपर हमेशा खतरे का बादल बनाकर रखता है. लेकिन इतना तय है कि इस इलाके में तेल और गैस की ये लड़ाई आने वाले दिनों में जियोपॉलिटिक्स का सबसे बड़ा केंद्र बनी रहेगी!



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