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पाकिस्तान में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की लगातार ताकत बढ़ रही है. इस बीच खबर है कि मुनीर पाकिस्तान के राज्यों को बांटना चाहते हैं. पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान को छोटे प्रशासनिक हिस्सों में बांटने का प्लान किया जा रहा है. वहीं, सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती में भी उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से पूछना जरूरी नहीं समझा.
आसिम मुनीर हर चीज में शहबाज शरीफ को बाइपास कर रहे हैं.(Reuters)
Pakistan News: पाकिस्तान में अब सरकार और विपक्ष के बीच सत्ता की लड़ाई नहीं है. बल्कि सवाल यह भी उठ रहा है कि देश के बड़े फैसले आखिर ले कौन रहा है? सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की ताकत लगातार बढ़ती जा रही है. वहीं अब मुनीर पाकिस्तान के चार बड़े राज्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने का प्लान बना रहे हैं. दूसरी तरफ, सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों के खिलाफ पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती को लेकर भी खबर यही है कि मुनीर ने इसके बारे में शहबाज शरीफ या संसद से पूछा भी नहीं. दोनों घटनाएं पाकिस्तान में सेना और चुनी हुई सरकार के बीच ताकत के संतुलन पर सवाल खड़े कर रही हैं.
पाकिस्तान में बनेंगे नए राज्य?
द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, आसिम मुनीर पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे चार बड़े प्रांतों को छोटे प्रशासनिक हिस्सों में बांटने के पक्ष में हैं. इस योजना के तहत 12 से 15 नए राज्य बनाए जाने या 160 तक छोटी प्रशासनिक इकाइयां बनाने के विकल्प की चर्चा है. हालांकि, अभी इसे अंतिम सरकारी फैसला नहीं माना जा सकता.
राज्यों को बांटने के पीछे प्रशासनिक तर्क भी दिया जा रहा है. पाकिस्तान का पंजाब प्रांत करीब 12.8 करोड़ लोगों का घर है, जबकि क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा बलूचिस्तान करीब डेढ़ करोड़ लोगों की आबादी वाला प्रांत है. इतने बड़े और अलग-अलग परिस्थितियों वाले इलाकों में सरकारी सेवाएं पहुंचाना एक चुनौती है. लेकिन मामला सिर्फ प्रशासन को आसान बनाने का नहीं है. पंजाब में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और सिंध में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) का मजबूत राजनीतिक आधार है. इन प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटने से उनकी राजनीतिक ताकत और केंद्र के सामने खड़े होने की क्षमता पर असर पड़ सकता है.
सेना में भी मुनीर की मनमानी
मुनीर की ताकत कैसे बढ़ी?
नवंबर 2025 में पाकिस्तान में संवैधानिक बदलावों के बाद मुनीर को सेना, नौसेना और वायुसेना की कमान से जुड़ी भूमिका मिली. उनके 2030 तक इस पद पर रहने का रास्ता बना और उन्हें फील्ड मार्शल का पद आजीवन बनाए रखने के साथ आपराधिक मुकदमों से आजीवन छूट भी दी गई. इन बदलावों की आलोचना करने वालों का कहना है कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की निगरानी कमजोर हो सकती है.