Navi Pillay Mocks Donald Trump : ‘तो शेयर कर लूंगी नोबेल’, नावी पिल्लई ने डोनाल्ड ट्रंप के जख्मों पर छिड़का नमक

 Navi Pillay Mocks Donald Trump : ‘तो शेयर कर लूंगी नोबेल’, नावी पिल्लई ने डोनाल्ड ट्रंप के जख्मों पर छिड़का नमक


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कितनी शिद्दत से नोबेल पीस प्राइज हासिल करना चाहते हैं, ये बात पूरी दुनिया जानती है. पिछले साल नहीं मिला तो ट्रंप ने बवंडर खड़ा कर दिया और इस बार भी उनकी आंखों से सामने सपना चूर-चूर हो गया है. 9 अक्टूबर को अफ्रीकी न्यायविद नवनेथम ‘नावी’ पिल्लई को वही नोबेल पीस प्राइज मिलने के बाद से ट्रंप बिलबिलाए फिर रहे हैं. उनकी हालत पर नावी पिल्लई ने भी चुटकी लेली है. सम्मान अनाउंस होने के बाद जब नावी मीडिया के सामने आईं तो उन्होंने ट्रंप के साथ नोबेल शेयर करने की बात कहते हुए जले पर नमक छिड़ने के काम किया.

नोबेल पीस प्राइज विनर ने ट्रंप के जख्मों पर कैसे छिड़का नमक?

जर्मनी के नूर्नबर्ग शहर में एक कानूनी सेमिनार के दौरान उन्हें खबर मिली कि उन्हें वर्ष 2026 के ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ से नवाजा गया है, तो उनके आसपास मौजूद वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट शुरू कर दी.

नावी पिल्लई ने माइक पकड़ा, चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान लाई और ऐसा मजेदार तंज कसा कि पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा. उन्होंने हंसते हुए कहा- ‘अगर आप लोग थोड़ी और जोर से तालियां बजाएंगे, तो शायद मैं इस नोबेल प्राइज का कुछ हिस्सा ट्रंप के साथ भी शेयर कर लूं’. एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कॉलार्ड ने इस खास पल का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर कर दिया और देखते ही देखते ये वीडियो पूरी दुनिया में वायरल हो गया.

‘अरे ये तो मजाक लग रहा है!’, जब नोबेल विजेता को खुद नहीं हुआ यकीन

नावी पिल्लई, जो रवांडा इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल की पूर्व प्रेसिडेंट और संयुक्त राष्ट्र (UN) की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख रह चुकी हैं, को जब पहली बार ये खबर दी गई तो उन्हें खुद भरोसा नहीं हुआ.

द जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, पिल्लई ने हंसते हुए कहा, ‘मुझे तो लगा कोई मेरे साथ मजाक कर रहा है!’ लेकिन ये कोई मजाक नहीं था. नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने उन्हें दशकों तक युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और जनसंहार के खिलाफ बिना डरे निष्पक्ष आवाज उठाने के लिए इस सर्वोच्च सम्मान से नवाजा था.

सांतवें आसमान पर ट्रंप का गुस्सा

डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर प्यार किसी से छुपा नहीं है. वो कई बार इंटरनेशनल मंचों से अपनी निराशा जता चुके हैं कि दुनिया उनके ‘ऐतिहासिक कामों’ को अनदेखा कर रही है. नावी पिल्लई के मजाकिया तंज और नोबेल जीतने की खबर आते ही ट्रंप साहब सोशल मीडिया पर भड़क उठे. उन्होंने लिखा ‘नावी पिल्लई अमेरिका और इजरायल से खुलेआम नफरत करने वाली महिला हैं. उन्होंने अपनी फर्जी जांच रिपोर्टों के जरिए हमास जैसे संगठनों को बढ़ावा दिया है. उन्होंने शांति के लिए तो कुछ नहीं किया, बल्कि इजरायल पर मनगढ़ंत आरोप लगाए’.

ट्रंप का गुस्सा उस जांच आयोग को लेकर था जिसकी अध्यक्ष नावी पिल्लई थीं और जिसने गाजा में इजरायल की कार्रवाइयों को मानवाधिकारों का उल्लंघन माना था.

‘अरे मैंने तो अब्राहम एकॉर्ड दिया, यूक्रेन युद्ध रुकवा रहा हूं’, ट्रंप की दलीलें

अपनी भड़ास निकालते हुए ट्रंप साहब ने दुनिया को याद दिलाया कि वो ही हैं जो नोबेल के असली हकदार हैं. उन्होंने अपनी उपलब्धियों का पहाड़ा पढ़ना शुरू कर दिया.

  • अब्राहम एकॉर्ड्स: ‘मैंने मिडिल ईस्ट में वो ऐतिहासिक समझौता करवाया जिसे दुनिया असंभव मानती थी!’
  • बंधकों की वापसी और युद्ध विराम: ‘मैं ईरान को रोक रहा हूं, बंधकों को छुड़ा रहा हूं और गाजा को फिर से बसाने में जुटा हूं’
  • रूस-यूक्रेन जंग: ‘मैं अकेले दम पर रूस और यूक्रेन के युद्ध को खत्म करवाने में लगा हूं!’

इतना ही नहीं, ट्रंप ने इतिहास के पन्ने पलटते हुए नोबेल कमेटी के पुराने फैसलों पर भी सवाल उठा दिए. उन्होंने यासिर अराफात को नोबेल दिए जाने की आलोचना की और 2009 में बराक ओबामा को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर अपनी वही पुरानी कसक फिर से जाहिर कर दी.

शहबाज शरीफ की मेहनत पर पानी: ‘पाकिस्तान ने तो नाम भेजा था!’

मजेदार बात ये है कि नोबेल पुरस्कार का ऐलान होने से महज कुछ ही घंटे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर खुलेआम ट्रंप के नाम की सिफारिश की थी. शहबाज शरीफ को पूरी उम्मीद थी कि इस बार उनके ‘ट्रंप’ की मेहनत रंग लाएगी और ओस्लो से ट्रंप के नाम का ढोल बजेगा.

पाकिस्तान को लग रहा था कि ट्रंप को नोबेल मिलते ही वो भी खुशी में मिठाई बांटेंगे, लेकिन नोबेल कमेटी ने शहबाज शरीफ की सिफारिश को किनारे करते हुए 85 साल की उस महिला को चुन लिया, जो कभी किसी राजनीतिक दबाव में नहीं झुकीं. पाकिस्तान के इस ‘नोबेल प्लान’ का गुब्बारा भी नावी पिल्लई के एक बयान से फुस्स हो गया!

वोनेजुएला वाली मेडल स्टोरी: जब असली नोबेल न मिला, तो दूसरे का मेडल रख लिया!

ट्रंप का नोबेल को लेकर क्रेज इस हद तक है कि इस साल जनवरी में जब वोनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो व्हाइट हाउस में उनसे मिलने आईं, तो उन्होंने अपना नोबेल मेडल ही ट्रंप को थमा दिया! मारिया माचाडो को पिछले साल लोकतंत्र की रक्षा के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला था.

ट्रंप ने बिना किसी झिझक के वो असली सोने का मेडल स्वीकार किया और मारिया को धन्यवाद भी दे दिया! बाद में नॉर्वेजियन नोबेल इंस्टीट्यूट को बाकायदा सफाई देनी पड़ी और बयान जारी करके बताना पड़ा कि ‘कोई विजेता अपने गले का मेडल किसी को दान जरूर दे सकता है, लेकिन ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ का खिताब या सम्मान किसी दूसरे इंसान के नाम ट्रांसफर नहीं हो सकता!’

यानी ट्रंप मेडल तो जेब में रख सकते हैं, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में उनका नाम ‘नोबेल विजेता’ के रूप में दर्ज नहीं हो सकता!



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