Kota News: मिट्टी नहीं, गाय के गोबर से बने दीये बढ़ाएंगे दिवाली की चमक, कोटा की महिलाओं ने संभाली 2.5 लाख दीपक बनाने की कमान


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Women are making eco-friendly cow dung diyas for Diwali In kota: कोटा में इस दिवाली महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं. डॉ. रूपा आनंद झा की पहल पर महिलाएं गाय के गोबर से आकर्षक और डिजाइनर दीपक तैयार कर रही हैं. एक महिला दिनभर में करीब 300 दीपक बना रही है और इस दिवाली 2.5 लाख दीपक बनाने का लक्ष्य है. इस काम में खुद की बनाई हैंडमेड मशीन का उपयोग हो रहा है. यह पहल न केवल स्थानीय महिलाओं को रोजगार और सशक्तिकरण दे रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का एक शानदार माध्यम भी बन रही है.

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कोटा में गोबर से बन रहे ढाई लाख इको-फ्रेंडली डिजाइनर दीयेZoom

कोटा में गोबर से बन रहे इको-फ्रेंडली डिजाइनर दीये, ढाई लाख दीपक बनाने का लक्ष्य

Kota: दीपावली का त्योहार रोशनी और खुशियों का प्रतीक है. इस बार दीवाली पर घर-आंगन को रोशन करने वाले दीपक रोशनी के साथ-साथ महिलाओं की आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लिखेंगे. राजस्थान के कोटा शहर में गाय के गोबर से आकर्षक और डिजाइनर दीपक तैयार किए जा रहे हैं. डॉ. रूपा आनंद झा की इस अनूठी पहल से स्थानीय महिलाओं को सीधा रोजगार मिल रहा है. सबसे खास बात यह है कि पारंपरिक गोबर को एक उपयोगी उत्पाद में बदलकर इस दिवाली पर दो से ढाई लाख दीपक तैयार करने का एक बड़ा लक्ष्य रखा गया है.

ये खूबसूरत और इको-फ्रेंडली दीपक सिर्फ दिवाली की सजावट का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये महिलाओं की कड़ी मेहनत और उनकी आत्मनिर्भरता की सच्ची पहचान भी बन रहे हैं. कोटा में गाय के गोबर से साधारण दीये नहीं, बल्कि फैंसी, फ्लावर और लाइनिंग डिजाइन वाले बेहद आकर्षक दीपक तैयार किए जा रहे हैं. बाजार में इन दिनों मिट्टी के दीयों के साथ-साथ इन गोबर के दीयों की भारी मांग देखने को मिल रही है. इस अनूठी और पर्यावरण के अनुकूल पहल की शुरुआत डॉ. रूपा आनंद झा ने की है. डॉ. रूपा को इस काम की प्रेरणा राजधानी जयपुर में आयोजित हुए गो महाकुंभ की एक विशाल प्रदर्शनी से मिली थी. वहां से प्रेरित होकर उन्होंने गोबर से विभिन्न उपयोगी उत्पाद बनाने की विशेष ट्रेनिंग ली. इसके बाद उन्होंने धूपबत्ती, हवन सामग्री, कंडे और खास तौर पर गोबर के दीपक बनाने का अभिनव काम शुरू कर दिया.

हैंडमेड मशीन से बन रहे 300 दीये प्रतिदिन
अब डॉ. रूपा का सबसे ज्यादा फोकस गोबर से बने इन डिजाइनर दीपकों के उत्पादन पर है. इन दीपकों को बड़ी संख्या में और बेहतर डिजाइन के साथ तैयार करने के लिए उन्होंने खुद के स्तर पर एक हैंडमेड मशीन भी विकसित की है. हालांकि यह मशीन पूरी तरह से ऑटोमेटिक नहीं है, इसलिए इसके जरिए दीये बनाने के उत्पादन में थोड़ा अधिक समय लगता है. इसके बावजूद, महिलाओं के हौसले बुलंद हैं. इस काम में लगी एक महिला दिनभर में करीब 250 से 300 दीपक आसानी से तैयार कर रही है. फिलहाल इस स्वरोजगार से करीब पांच महिलाएं सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं और वे पूरी लगन से इस काम को अंजाम दे रही हैं. इस मशीन के जरिए दीयों की फिनिशिंग भी काफी शानदार आ रही है.

स्वदेशी और ऑर्गेनिक उत्पादों को बढ़ावा
डॉ. रूपा आनंद झा का मुख्य लक्ष्य इस दीपावली के पावन अवसर पर करीब दो से ढाई लाख गोबर के दीपक तैयार करके बाजार में उतारना है. उनके इस नेक काम में नारी शक्ति ग्रुप और कई अन्य गैर-सरकारी संगठनों से भी भरपूर सहयोग और समर्थन मिल रहा है. डॉ. रूपा का स्पष्ट कहना है कि हाड़ौती अंचल में गोबर से बने ऑर्गेनिक और प्राकृतिक उत्पादों को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने की बहुत सख्त जरूरत है. उनका निरंतर प्रयास है कि गाय के गोबर जैसे पारंपरिक और आसानी से उपलब्ध संसाधनों को रोजगार का एक मजबूत जरिया बनाया जाए. इससे ज्यादा से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी और अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकेंगी. दिवाली के मौके पर स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की यह शानदार पहल पर्यावरण संरक्षण और हमारी पुरानी परंपरा से जुड़े विकल्पों की ओर भी समाज का ध्यान खींचती है. यह पहल साबित करती है कि छोटे प्रयासों से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है.



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