Business Idea: बहराइच के किसान त्रिलोकी ने केले की खेती में सह-फसली खेती का शानदार मॉडल अपनाया, कर रहे बंपर कमाई

Business Idea: बहराइच के किसान त्रिलोकी ने केले की खेती में सह-फसली खेती का शानदार मॉडल अपनाया, कर रहे बंपर कमाई


बहराइच: कृषि क्षेत्र में नवाचार और स्मार्ट तकनीकों को अपनाकर किसान अब अपनी आय को कई गुना बढ़ाने लगे हैं. केले की खेती करने वाले अक्सर इस बात से चिंतित रहते हैं कि जब तक केले के पौधे बड़े नहीं होते, तब तक खेत की ज़मीन खाली पड़ी रहती है. लेकिन मिर्जापुर गांव के युवा किसान त्रिलोकी ने इस खाली ज़मीन का उपयोग करके सह-फसली खेती का एक ऐसा मॉडल तैयार किया है. जिससे केले की पूरी लागत अन्य फसलों से ही निकल जाती है और केले का मुनाफा पूरी तरह से शुद्ध बचत बन जाता है.

​ढैंचे की जगह तिल क्यों? किसान ने बताई खास वजह

​आमतौर पर किसान खेत की उर्वरता बढ़ाने और हरी खाद तैयार करने के लिए ढैंचा बोते हैं. लेकिन युवा किसान त्रिलोकी बताते हैं कि ढैंचे को सड़ने और मिट्टी में मिलने में अधिक समय लगता है. चूंकि उन्हें एक हफ्ते के भीतर ही शिमला मिर्च की रोपाई करनी है, इसलिए उन्होंने तिल की बुवाई की. ​तिल की हरी फसल को जोतकर खेत में मिलाने से मिट्टी को प्राकृतिक पोषण तो मिलता ही है, साथ ही यदि इसे पकने दिया जाए तो तिल का तेल और बीज बाजार में अच्छे दामों पर बिकता है.

​केले के साथ लेंगे 3 फसलें, समझें पूरा चक्र

​किसान त्रिलोकी के अनुसार, जब तक केले की मुख्य फसल पूरी तरह तैयार होगी, तब तक वे उसी ज़मीन से 3 अतिरिक्त फसलें ले चुके होंगे. तिल की बुवाई करके उसे हरी खाद के रूप में जोत दिया जाएगा, जिससे मिट्टी उपजाऊ बनेगी. तिल की जुताई के तुरंत बाद शिमला मिर्च लगाई जाएगी, जिसकी पैदावार और बिक्री मार्च-अप्रैल तक चलेगी. शिमला मिर्च समाप्त होने के बाद खाली समय में पत्तीदार हरी धनिया बोई जाती है.

​5 बीघे में 150 क्विंटल केले का उत्पादन और गणित

​किसान त्रिलोकी ने बताया कि उनके पास 5 बीघे का केले का बागान सब्जी वाला केला है, 1 बीघे से लगभग 30 से 35 क्विंटल सब्जी वाला केला निकलता है. 5 बीघे के बागान से लगभग 150 क्विंटल केले की पैदावार होती है। बाजार में औसतन ₹15 प्रति किलोग्राम का भाव मिल जाता है. ​सह-फसली खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बीच में ली जाने वाली तीन अतिरिक्त फसलें तिल, शिमला मिर्च और धनिया केले की खेती में लगने वाली खाद, पानी और जुताई की पूरी लागत निकाल लेती हैं. इसके बाद जब केले का फल तैयार होकर बिकता है, तो उससे मिलने वाली पूरी राशि किसान का शुद्ध मुनाफा होती है.

अन्य किसानों के लिए त्रिलोकी का संदेश

किसान से बातचीत में यह बात सामने आई कि अन्य किसान भाई भी इस तकनीक को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं. केले के बागान में खाली जगह पर केवल तिल ही नहीं, बल्कि लौकी, कद्दू, शिमला मिर्च, धनिया या अन्य मौसमी सब्जियों की सह-फसली खेती करके कम लागत में दोगुना मुनाफा बड़े आराम से कमा सकते है.



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