Brinjal Farming : 6 महीने तक छापोगे नोट…गोंडा के राजा निषाद ने लगाई बैंगन की ऐसी वैरायटी, कहां से आया आइडिया?

Brinjal Farming : 6 महीने तक छापोगे नोट…गोंडा के राजा निषाद ने लगाई बैंगन की ऐसी वैरायटी, कहां से आया आइडिया?


होमताजा खबरकृषि

6 महीने तक छापोगे नोट…गोंडा के राजा निषाद ने लगाई बैंगन की ऐसी वैरायटी

Last Updated:

Brinjal farming tips : बैंगन एक ऐसी सब्जी है, जिसकी मांग हमेशा बनी रहते हैं और इसे किसी भी सीजन में उगाया जा सकता है. लोकल 18 से गोंडा के किसान राजा निषाद बताते हैं कि वे ग्रेजुएशन कर रहे हैं. पढ़ाई के बाद खाली समय में बैंगन की खेती करते हैं. राजा ने श्रीनाथ वैरायटी का बैंगन लगाया है. यह वैरायटी गोंडा के वातावरण के लिए अच्छी है. रोपाई के करीब 60 दिन बाद पौधों में फल आना शुरू हो जाता है. करीब छह महीने तक फसल मिलती रहती है. राजा निषाद कहते हैं कि बैंगन की खेती करने का आइडिया उन्हें अपने आसपास के किसानों को देखकर मिला.

Top Deals Inside

गोंडा. युवा किसान खेती के तौर तरीके तेजी से बदल रहे हैं. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले का एक युवा किसान पढ़ाई के साथ फसलें भी उगाने में जुटा है. उसने बैंगन की खेती शुरू की है. मेहनत और सही देखभाल से खेत में बैंगन की अच्छी पैदावार हो रही है. लोकल 18 से गोंडा के किसान राजा निषाद बताते हैं कि वे ग्रेजुएशन कर रहे हैं. पढ़ाई के बाद खाली समय में बैंगन उगाते हैं. सिंचाई से लेकर निराई-गुड़ाई और जरूरत का हर कृषि कार्य खुद करते हैं. इस तरह वे पढ़ाई के साथ खेती भी संभाल रहे हैं. राजा निषाद बताते हैं कि वे करीब दो बीघे में बैंगन की खेती कर रहे हैं. उन्होंने श्रीनाथ वैरायटी का बैंगन लगाया है. उनके मुताबिक यह वैरायटी गोंडा के वातावरण के लिए अच्छी है. पौधे लगाने के करीब 60 दिन बाद इसमें फल आना शुरू हो जाता है. करीब छह महीने तक फसल मिलती रहती है.

हर चौथे दिन तुड़ाई

राजा निषाद कहते हैं कि बैंगन की खास बात यह है कि इसमें लगातार तुड़ाई होती रहती है. एक बार हार्वेस्टिंग करने के बाद करीब चौथे दिन दोबारा बैंगन तोड़ने लायक हो जाता है. अगर पौधे की कटिंग कर दी जाए तो कुछ दिनों बाद फिर से फल आना शुरू हो जाता है. इससे लंबे समय तक खेत से उत्पादन मिलता रहता है. बाजार में बैंगन की मांग हमेशा बनी रहती है. वह अपने खेत में तैयार बैंगन को नवाबगंज सब्जी मंडी में सप्लाई करते हैं. इससे उन्हें फसल बेचने के लिए बाजार भी आसानी से मिल जाता है.

दो बीघे में कितनी लागत

राजा निषाद बताते हैं कि दो बीघे बैंगन की खेती करने में करीब 20 हजार रुपये की लागत आई है. फसल की अच्छी पैदावार और बाजार में मांग को देखते हुए उन्हें इस खेती से लाखों रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है. फसल को कीटों से बचाने के लिए जरूरत के अनुसार कीटनाशक दवा का छिड़काव भी करते हैं. राजा निषाद कहते हैं कि बैंगन की खेती करने का आइडिया उन्हें अपने आसपास के किसानों को देखकर मिला. उनका लक्ष्य भविष्य में खेती के काम को और आगे बढ़ाना है. वह पढ़ाई के साथ खेती को आमदनी का जरिया बनाना चाहते हैं.



Source link