नहीं देखे होंगे जहानाबाद के रंजीत राजन जैसा पशु प्रेमी, बिना दूध वाली गाय पर कर डाले 10 लाख रुपए खर्च

नहीं देखे होंगे जहानाबाद के रंजीत राजन जैसा पशु प्रेमी, बिना दूध वाली गाय पर कर डाले 10 लाख रुपए खर्च


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आपने अब तक कई तरह के पशु प्रेमी को देखा होगा. किन्हीं को डॉग्स से लगाव होता है तो कोई पक्षियों के रखने के शौकीन होते हैं. कुछ घोड़ा पालने के शौकीन होते हैं. हालांकि, उनमें से कई ऐसे भी होते हैं, जिनको गाय से बहुत लगाव रहता है. उन्हीं पशु प्रेमियों में से एक हैं, जहानाबाद जिले के रहने वाले रंजीत राजन.

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जहानाबाद: आपने अब तक कई तरह के पशु प्रेमी को देखा होगा. किन्हीं को डॉग्स से लगाव होता है तो कोई पक्षियों के रखने के शौकीन होते हैं. कुछ घोड़ा पालने के शौकीन होते हैं. हालांकि, उनमें से कई ऐसे भी होते हैं, जिनको गाय से बहुत लगाव रहता है. उन्हीं पशु प्रेमियों में से एक हैं, जहानाबाद जिले के रहने वाले रंजीत राजन. वो अपने घर बहुत साल पहले गाय खरीद कर लाया था. उसी गाय की चौथी पीढ़ी उनके पास बची है. हालांकि, जो गाय उनके पास है, वो 10 साल से है, लेकिन दूध नहीं देती है. इसके बावजूद उनके गौ के प्रति समर्पित लगाव ऐसा है कि अब तक उस गाय पर 10 लाख रुपए तक खर्च कर दिया है.

रंजीत राजन का मानना है कि हमारे पास जो गाय है वो दूध नहीं दे सकती है फिर भी हम इस गाय पर 10 हजार रुपए हर महीने खर्च करते हैं. हम इसको न तो गौशाला में रख सकते हैं और न ही किसी को दे सकते हैं. उनका मानना है कि ऐसा करने से उनकी गाय बूचड़खाने या कसाई खाने भी पहुंच सकती है. रंजीत का कहना है कि जब तक यह गाय रहेगी वह इसे दूर नहीं कर सकते हैं. भले यह दूध दे या नहीं दे.

बिना दूध देने वाली गाय पर हर महीने 10,000 का खर्च
दरअसल, रंजीत राजन जिला मुख्यालय के नया टोला के निवासी हैं. जब वह जहानाबाद में ही किराए के घर में रहते थे वहां वह गाय खरीदकर घर लाए. समय के साथ उनका अपना घर बन गया. उनके किराए के घर में आई गाय की चौथी पीढ़ी के बच्चे तक रंजीत के घर आ गए. चौथी पीढ़ी वाली इस गाय की उम्र 10 साल हो रही है और यह एक बार भी दूध नहीं दे सकी है. उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह काली गाय है. यह गिर और साहीवाल नस्ल का मिश्रण है.

रंजीत ने बताया कि पहली रोटी गाय को खिलाने के बाद ही खाना खाते हैं. वह बताते हैं कि सिर्फ हमारे घर से ही नहीं, बल्कि आस पास के भी लोग हमारी गाय को अपने घर की पहली रोटी देते हैं.

इस तरह हुई गंभीर रोग का शिकार
वह आगे कहते हैं कि हमसे जाने अनजाने में गलती यह हुई कि हम अपनी गाय को ईंट की सोलिंग पर रखने लगे. इससे उठने-बैठने में गाय का थन रगड़ खा गया और छिल गया. धीरे-धीरे घाव बढ़ता चला गया और इस इन्फेक्शन के चलते थन से दूध ही निकलना बंद हो गया. उन्होंने कहा कि हमने पहले बिहार के कई नामी पशु चिकित्सक से संपर्क किया और दिखाया भी, लेकिन सही नहीं हो पाया. इसके बाद उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित पशु चिकित्सालय भी ले गए. वहां के डॉक्टर भी बीमारी को ठीक नहीं कर पाए. रंजीत ने कहा कि इसके बाद उन्होंने गाय को घर में ही रखने का फैसला लिया.

10 साल में 10 लाख खर्च चुका यह शख्स
रंजीत राजन ने बताया कि गाय की बीमारी के इलाज में उन्होंने अब तक 10 लाख रुपए खर्च किया है. शायद यही असली और नि:स्वार्थ पशु प्रेम है. रंजीत जानते हैं कि उनकी गाय दूध नहीं देगी इसके बाद भी वह रोज उसकी देखरेख और सेवा करते हैं.

ऐसे रखें अपने पशुओं का ख्याल
पशु रखने वालों से हमारी एक अपील रहेगी कि आप अपने पशु धन का ख्याल रखें. थोड़ी लापरवाही भारी पड़ सकती है. जिन भी दुधारू पशुओं का थन बड़ा होता है उनको ऊंचे नीचे स्थानों पर न रखें. इसके लिए बाजार से रबर बेड खरीद लाएं और उस पर ही रखें. ऐसा करने से आपका पशु सुरक्षित रहेगा और आपका व्यापार भी चलता रहेगा.



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