जब बंदूक थाम पाक को सबक सिखाने पहुंचे थे नाना, कारगिल युद्ध में रहे थे 60 दिन
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नाना पाटेकर उन अभिनेताओं में शामिल थे जो सिर्फ पर्दे पर नहीं बल्कि रियल में भी हीरो थे. कारगिल युद्ध के दौरान तो नाना बॉर्डर पर ही पहुंच गए थे. इस दौरान वे 60 दिन तक सेना के साथ रहे थे. नाना पाटेकर ने सेना के कमांडो की ट्रेनिंग भी ले रखी थी और वे नेशनल लेवल के शूटर भी थे.
नाना पाटेकर कारगिल युद्ध के दौरान 60 दिन तक सेना में तैनात रहे थे. (फोटो-सोशल मीडिया)
नाना पाटेकर नहीं रहे. 75 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया. वे ऐसे गिने-चुने अभिनेताओं में थे जिन्हें रियल लाइफ हीरो कहा जाता है. 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान तो वे बंदूक थामकर पाकिस्तान को सबक सिखाने पहुंच गए थे. इसके लिए उन्हें तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिज से स्पेशल परमीशन लेनी पड़ी थी. मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ एक मेजर के तौर पर नाना पाटेकर ने एक एक्टिव सैनिक के तौर पर काम किया था. अपनी 60 दिन की सेवा के दौरान वे कई बार पाक सीमा पर गश्त करने भी गए थे.
नाना पाटेकर का देश प्रेम सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं था. चाहे सामाजिक मुद्दा हो, किसानों का मुद्दा हो या फिर देश की सुरक्षा पर बात आए. नाना पाटेकर हमेशा एक्टिव रहते थे. 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान वह स्पेशल परमीशन लेकर बॉर्डर पर पहुंच गए थे. कई सालों बाद खुद नाना पाटेकर ने इसका खुलासा एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान किया था. सेना के साथ उनका ये सफर 1988 में तब शुरू हुआ था जब वे टेरिटोरियल आर्मी के मानद कैप्टन बनाए गए थे.
3 साल तक ली थी सेना की ट्रेनिंग
1988 में नाना पाटेकर टेरिटोरियल आर्मी में शामिल हुए. बेशक उनकी तैनाती मानद थी, लेकिन उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ आर्मी की ट्रेनिंग पूरी की. नाना पाटेकर कमांडो ट्रेनिंग का भी हिस्सा रहे थे. एक बार नाना पाटेकर ने खुद बताया था कि पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह उस समय लेफ्टिनेंट कर्नल हुआ करते थे. 1991 में आई प्रहार फिल्म में वीके सिंह ने एक छोटी सी भूमिका भी निभाई थी.
कारगिल युद्ध में अधिकारियों ने कर दिया था मना
1999 में जब कारगिल युद्ध शुरू हुआ तो नाना पाटेकर अकेले ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने अग्रिम मोर्चे पर तैनात होने की इच्छा जताई. नाना पाटेकर एक अभिनेता थे, सेना के अधिकारियों को डर था कि इस भीषण युद्ध के बीच उन्हें कैसे भेजा जाए. जब अधिकारियों ने इंकार कर दिया तो नाना पाटेकर ने सीधे तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिज से बात की. नाना पाटेकर ने उन्हें बताया कि वे नेशनल लेवल के राइफल शूटर रह चुके हैं. उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ की गई ट्रेनिंग के बारे में भी बताया. उन्होंने इच्छा जताई कि वे अग्रिम मोर्चे पर जाना चाहते हैं, उन्हें अनुमति दी जाए.
कारगिल युद्ध में तैनाती के दौरान नाना पाटेकर (फोटो-सोशल मीडिया)
रक्षा मंत्री की अनुमति के बाद पहुंच गए सीमा पर
तत्तकालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिज की अनुमति के बाद नाना पाटेकर बॉर्डर पर पहुंचे. वे मराठा लाइट इन्फैंट्री की क्विक रिएक्शन टीम का हिस्सा रहे. इस दौरान उनकी तैनाती युद्ध से प्रभावित द्रास, सोपोर, बारामूला और लेह सेक्टर में रही. इस दौरान कई बार उन्होंने सैनिकों के साथ जाकर बॉर्डर पर गश्त भी की. वे अस्पतालों में जाकर सेवा करते हैं और सैनिकों का हौसला बढ़ाते रहे. 60 दिन तक सेना में मेजर के तौर पर तैनात रहने के दौरान नाना पाटेकर कुछ गुप्त ऑपरेशन की प्लानिंग और एक्यूकेशन का भी हिस्सा रहे.
कुछ समय पहले एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने ऑपरेशन सीक्रेट्स और सुरक्षा प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए किसी भी गोपनीय बात को साझा नहीं किया था. उन्होंने बताया था कि उस दौरान उनका तकरीबन 20 किलो वजन कम हो गया था. नाना पाटेकर ने 25 साल तक टेरिटोरियल आर्मी में सेवा दी. 2013 में वे रिटायर हो गए थे.