Dharohar: उदयपुर का 2500 साल पुराना जैन मंदिर, यहां विराजमान हैं भगवान पार्श्वनाथ, उमड़ते हैं श्रद्धालु

Dharohar: उदयपुर का 2500 साल पुराना जैन मंदिर, यहां विराजमान हैं भगवान पार्श्वनाथ, उमड़ते हैं श्रद्धालु


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Udaipur Ancient Shvetambar Jain Temple: लेक सिटी उदयपुर सिर्फ राजसी महलों के लिए नहीं जाना जाता है बल्कि अपने ऐतिहासिक धरोहरों के लिए भी जाना जाता है. सवीना खेड़ा क्षेत्र स्थित 2500 साल पुरानी श्री पार्श्वनाथ भगवान का प्राचीन श्वेतांबर जैन मंदिर भी खास जगह है. यह श्रद्धालुओं के बीच विशेष धार्मिक आस्था का केन्द्र है. रविंद्र जैन बताते हैं कि यह मंदिर उदयपुर शहर के बसने से पहले का माना जाता है. श्रद्धालु यहां भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन कर नवकार मंत्र का जाप करते हैं और अपनी मनोकामना रखते हैं. मान्यता है कि सच्ची आस्था के साथ यहां दर्शन करने और नवकार मंत्र का स्मरण करने से मनोकामना पूरी होती है.

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उदयपुर. राजस्थान के उदयपुर को झीलों और राजसी महलों के शहर के रूप में तो पूरी दुनिया जानती है, लेकिन यहां कई ऐसी प्राचीन धार्मिक धरोहरें भी हैं, जो शहर के इतिहास को अपने अंदर समेटे हुए हैं. सवीना खेड़ा क्षेत्र स्थित श्री पार्श्वनाथ भगवान का प्राचीन श्वेतांबर जैन मंदिर भी ऐसी ही खास जगह है. मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार यहां विराजमान भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा करीब 2500 साल पुरानी मानी जाती है. यही वजह है कि यह मंदिर जैन समाज के साथ-साथ इतिहास और प्राचीन कला में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी खास है.

यह मंदिर देश के प्रमुख 108 जैन तीर्थों में शामिल बताया जाता है. शिखरबंद शैली में बने मंदिर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ हाथियों की आकर्षक आकृतियां बनी हुई है. मंदिर के अंदर प्रवेश करते ही पुराने समय की शिल्पकला और धार्मिक परंपरा की झलक देखने को मिलती है. मंदिर के मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ की काले पाषाण की प्रतिमा 19 इंच ऊंची है. सर्प छत्र सहित इसकी ऊंचाई 21 इंच और परिकर सहित प्रतिमा की ऊंचाई 41 इंच है. मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार यह प्रतिमा करीब 2500 साल पुरानी मानी जाती है. इसे पंचतीर्थी प्रतिमा माना जाता है और इसी वजह से श्रद्धालुओं के बीच इसकी विशेष धार्मिक मान्यता है.

विक्रम संवत 1699 का शिलालेख भी है मौजूद

मंदिर में धर्मनाथ स्वामी की सफेद संगमरमर की प्रतिमा भी स्थापित है. प्रतिमा के नीचे विक्रम संवत 1699 का शिलालेख मौजूद है. इसमें उस समय के उपकेश वंश और दानदाताओं से जुड़ी जानकारी मिलती है. मूलनायक प्रतिमा के दाहिनी ओर 19 इंच ऊंची श्वेत पाषाण की प्रतिमा भी स्थापित है. इसके अलावा सभा मंडप की आलियों में पार्श्वयक्ष और पद्मावती देवी की प्रतिमाएं भी देखने को मिलती है. श्री जैन श्वेतांबर महासभा की ओर से संरक्षित इस मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर के अनुसार सामान्य दिनों में 200 से ज्यादा श्रद्धालु यहां आते हैं, जबकि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान यह संख्या 4 से 5 हजार तक पहुंच जाती है. खास तौर पर पौष दशमी के अवसर पर मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं.

उदयपुर शहर के बसने से पहले का माना जाता है यह मंदिर

रविंद्र जैन बताते हैं कि यह मंदिर उदयपुर शहर के बसने से भी पहले का माना जाता है. श्रद्धालु यहां भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन कर नवकार मंत्र का जाप करते हैं और अपनी मनोकामना रखते हैं. मान्यता है कि सच्ची आस्था के साथ यहां दर्शन करने और नवकार मंत्र का स्मरण करने से मनोकामना पूरी होती है. सवीना खेड़ा का यह प्राचीन जैन मंदिर आज भी उदयपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजे हुए है. करीब 2500 साल पुरानी मानी जाने वाली प्रतिमा, प्राचीन शिल्पकला और विक्रम संवत 1699 का शिलालेख इस मंदिर को शहर की खास ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल करते हैं.



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