Akhilesh Yadav New look | Akhilesh Yadav Ayodhya

Akhilesh Yadav New look | Akhilesh Yadav Ayodhya


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Akhilesh Yadav New Look: अखिलेश यादव ने साफ संदेश दे दिया है कि आगामी विधान सभा चुनाव में उनकी पार्टी किसी जाति या धर्म विशेष वाली छवि लेकर नहीं चलने वाली. पिछले कुछ महीने में सपा की छवि काफी बदली-बदली सी नजर आ रही है. कैसे सवर्ण वोटर को साधने के लिए अखिलेश ने तगड़ा दांव खेला है. इसका ताजा उदाहरण अखिलेश की अयोध्या दौरा है. इस दौरान उन्होंने अपनी कट्टर सनातनी इमेज दिखाने की कोशिश की.

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Akhilesh Yadav News Formula: आगामी उत्तर प्रदेश (यूपी) विधानसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) को ले कर चल अखिलेश यादव ने तगड़ा दांव खेला है. वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सबसे मजबूत वोट बैंक यानी सवर्णों को रिझाने में जुटे हुए हैं. अगर सबसे पहले साधु-संत और शंकराचार्य तो कभी लखनऊ में ब्राह्मण सम्मेलन और ब्राह्मण नेताओं से मुलाकात. अब अखिलेश की हाथों में शंख, चक्र और त्रिशूल के साथ तस्वीर आई है. जी हां, अखिलेश इन तस्वीरों में जताने की कोशिश की वे भी कम सनातनी नहीं. ये हिंदुत्व रंग ये बता रहा है कि 2027 की चुनाव के लिए वे कोई भी कसर नहीं छोड़ने वाले हैं.

दरअसल, अखिलेश अयोध्या में अपने पार्टी के नेता पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय के पैतृक घर श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होने पहुंचे थे. इस दौरान मंच पर उनका फूल-माला और गदा के साथ स्वागत हुआ. मंच पर अखिलेश साधुओं और पंडितों के साथ मुस्कुराते हुए खड़े रहे. इसके बाद पीतांबरी वस्त्र धारण किए अखिलेश हाथों में सुदर्शन चक्र, त्रिशूल और डमरू लिए खड़े हो गए थे. अखिलेश की अपनी पुरानी एमवाई (M-Y) वाली छवि काफी हद तक खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं. इसके पीछे एक और राजनीतिक संदेश छिपा है कि सपा एक वर्ग या जाति विशेष की पार्टी नहीं, बल्कि सनातनियों और सवर्णों की सच्ची हितैषी है.

समझिए अखिलेश का सॉफ्ट हिंदुत्व और सवर्ण प्रेम

  • सपा का बदला-बदला रूप- हाल के दिनों में सपा के ऑफिस और अखिलेश यादव के सार्वजनिक कार्यक्रमों की तस्वीर पूरी तरह से बदली-बदली हुईं नजर आ रही हैं. मंचों पर विधिवत वैदिक मंत्रोच्चारण गूंजते हैं, शंख बजाए जाते हैं और साथ ही अखिलेश साधु-संतों से माथे पर विजय तिलक लगाकर उनसे आशीर्वाद लेते हैं.
  • आज की तस्वीर- 8 अक्टूबर को अयोध्या से आया वीडियो वीडियो और तस्वीरें साफ कर रही हैं कि चुनाव से पहले अखिलेश सवर्णों को साधने में लगे हैं. पीले और भगवा ड्रेस, संतों के बीच एक हाथ में त्रिशूल-डमरू और दूसरे सुदर्शन चक्र लिए अखिलेश सच्चे सनातनी का संदेश दे रहे हैं.
  • पीडीए में ‘पी’ का मतलब पंडित- हाल ही अखिलेश यादव की पार्टी ने सपा के कद्दावर नेता जनेश्वर मिश्र की जयंती प्रबुद्ध सम्मेलन आयोजित किया. इस दौरान उन्होंने मंच से साफ कहा कि उनके पीडीए फॉर्मूले में ‘पी’ का अर्थ सिर्फ ‘पिछड़ा’ नहीं है, बल्कि इसमें अगड़े और ‘पंडित’ (ब्राह्मण) भी शामिल हैं. उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अटूट मित्रता का पौराणिक उदाहरण देकर यह बताने की कोशिश की कि सपा के शासनकाल में हमेशा से सवर्णों, प्रबुद्ध जनों और ब्राह्मणों को पूरा सम्मान दिया गया है.

बीजेपी के कोर वोट बैंक में तगड़ी सेंधमारी की तैयारी

उत्तर प्रदेश में तकरीबन 10 से 12 प्रतिशत ब्राह्मण मतदाता हैं, जो पिछले एक दशक से पारंपरिक रूप से बीजेपी का अभेद्य कोर वोट बैंक माने जाते हैं. अखिलेश यादव यह भली-भांति जानते हैं कि यदि वे अपने मजबूत यादव-मुस्लिम-दलित आधार को बरकरार रखते हुए सवर्णों का एक छोटा सा हिस्सा भी अपने पाले में करने में सफल हो गए, तो 2027 में यूपी की सत्ता में वापसी की उनकी राह बेहद आसान हो जाएगी. वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय को उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाकर अखिलेश यादव ने पहले ही इस सवर्ण-हितैषी राजनीति का बड़ा संकेत दे दिया था.



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