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मध्य प्रदेश के कटनी जिले के कैमोर में करीब चार दशक पहले बंद हुई एस्बेस्टस फैक्ट्री से जुड़ा कथित कचरा अब एक बार फिर चर्चा में है. स्थानीय लोगों का दावा है कि 1934 से 1988 के बीच संचालित फैक्ट्री से निकला एस्बेस्टस वेस्ट आज भी शहर के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद है. करीब 10 लाख टन कचरा होने और 1200 से 1300 लोगों के प्रभावित होने का दावा करते हुए
92 साल पुरानी फैक्ट्री बंद, लेकिन कैमोर में आज भी एस्बेस्टस का खतरा!
मध्य प्रदेश के कटनी जिले के कैमोर में करीब चार दशक पहले बंद हुई एस्बेस्टस फैक्ट्री से जुड़ा कथित कचरा अब एक बार फिर चर्चा में है. स्थानीय लोगों का दावा है कि 1934 से 1988 के बीच संचालित फैक्ट्री से निकला एस्बेस्टस वेस्ट आज भी शहर के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद है. करीब 10 लाख टन कचरा होने और 1200 से 1300 लोगों के प्रभावित होने का दावा करते हुए स्थानीय लोगों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर इसके स्थायी और वैज्ञानिक निस्तारण की मांग की है.
1934 से 1988 तक हुआ था उत्पादन
स्थानीय निवासी और समाजसेवी सरवर खान के मुताबिक, कैमोर में Everest की सीमेंट और एस्बेस्टस शीट फैक्ट्री 1934 से 1988 तक संचालित हुई थी. उस दौरान उत्पादन से निकला फाइबर और मलबा फैक्ट्री के आसपास अलग-अलग स्थानों पर डाला गया और बाद में मिट्टी से ढक दिया गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ी मात्रा में यह कचरा आज भी जमीन के नीचे मौजूद हो सकता है.
1300 लोगों के प्रभावित होने का दावा
स्थानीय लोगों ने एस्बेस्टस फाइबर के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चिंता जताई है। उनका दावा है कि कैमोर में करीब 1200 से 1300 लोग प्रभावित पाए गए हैं. यह दावा Krishnendu Mukherjee London Trust की टीम के सर्वे से जोड़ा जा रहा है. स्थानीय लोगों ने प्रभावित लोगों के मुआवजे के लिए फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया शुरू करने और पूरे मामले का सर्वे कराने की मांग भी रखी है.
प्रशासन ने 7-8 जगह लिए मिट्टी के सैंपल
क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कटनी सुधांशु तिवारी के मुताबिक, कलेक्टर के निर्देश पर जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने उन संभावित स्थानों को चिन्हित किया है, जहां पुराने एस्बेस्टस वेस्ट को डाले जाने की जानकारी मिली है। इनमें रिहायशी क्षेत्र, प्ले ग्राउंड और खाली जमीनें शामिल हैं.अधिकारी के अनुसार 7-8 स्थानों पर 3 से 4 फीट गहराई तक खुदाई कर मिट्टी के सैंपल लिए गए हैं। इसके अलावा 5-6 स्थानों से ग्राउंड वाटर के सैंपल भी लिए गए हैं. सभी सैंपल पर्यावरणीय प्रावधानों के तहत सेंट्रल लैब भेजे गए हैं. रिपोर्ट आने तक जमीन के नीचे एस्बेस्टस वेस्ट की मौजूदगी या उसके प्रभाव को लेकर निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता.
स्वास्थ्य विभाग कराएगा मेडिकल कैंप
अधिकारी ने बताया कि एस्बेस्टस के संपर्क से सांस और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम हो सकता है. मामले में स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से मेडिकल कैंप और सर्वे कराने की तैयारी है. इसमें कैंसर से जुड़े मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री भी देखी जाएगी, ताकि स्थिति का आकलन किया जा सके.
वेस्ट निकालने के बजाय कवर करने पर विचार
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी के मुताबिक, अगर जमीन के नीचे एस्बेस्टस वेस्ट मिलता है तो उसे निकालकर दूसरी जगह ले जाना जोखिम बढ़ा सकता है. ऐसे में विशेषज्ञों की राय के आधार पर संबंधित क्षेत्र में 3-4 फीट मोटी मिट्टी की परत डालकर वेस्ट को सुरक्षित तरीके से कवर करने और उसके ऊपर प्लांटेशन या ग्राउंड विकसित करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है. अब स्थानीय लोगों को सैंपल रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार है.