नई दिल्ली. ‘मरने के बाद भी जिंदा रहते हैं हम, आत्मा को मौत भी तोहफा लगती है.’ यह किसी दार्शनिक के नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के विचार हैं, जिन्होंने अपनी ठेठ अंदाज से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया. गुरुवार सुबह जब नाना पाटेकर के निधन की खबर आई, तो पूरा देश स्तब्ध रह गया.
उन्होंने 75 वर्ष की आयु में गोवा में कार्डियक अरेस्ट के कारण दुनिया को अलविदा कह दिया. उनके जाने के बाद, सोशल मीडिया पर उनके पुराने वीडियो तेजी से वायरल होने लगे, जिनमें वे जिंदगी और मौत की सच्चाई को बड़ी ही बेबाकी और सहजता से समझाते नजर आ रहे हैं.
‘लोग मरने के बाद भूल जाएंगे तुम्हें’
उनका एक वीडियो क्लिप काफी चर्चा में है, जिसमें वे कहते हैं, ‘लोग मरने के बाद भूल जाएंगे तुम्हें.’ इस पर उनसे सवाल किया जाता है कि मरने के बाद जिंदा कौन रहता है? फिर, नाना पाटेकर अपने चिर-परिचित अंदाज में अपनी बात रखते हैं, बिल्कुल एक दार्शनिक की तरह, जिसने मानो जिंदगी और मौत के बीच के महीन अंतर को पाट दिया हो. नाना पाटेकर कहते हैं, ‘मौत के बाद 10 मिनट तक दिल, 20 मिनट तक दिमाग और 4 घंटों के लिए आंखें जिंदा रहती हैं. उन चार घंटों में आंखें अपनों का रवैया देखती होंगी. उसके बाद मुर्दे को तो मौत एक तोहफे जैसी लगती होगी.’
मौत को बहुत पहले कर चुके थे स्वीकार
इन बातों से नाना पाटेकर ने न सिर्फ जिंदगी की असलियत को दुनिया के सामने रखा, बल्कि आज के बदलते दौर और गुजर चुके लोगों के बीच के रिश्ते की सच्चाई को भी जाहिर कर दिया. इस वीडियो को देखकर आपको भी यकीन हो जाएगा कि ऐसा सिर्फ नाना पाटेकर ही कह और सोच सकते थे, क्योंकि, उन्होंने अपनी साफगोई और जिंदगी को जीने के अंदाज से खुद को उस सच्चाई से मिलने के लिए तैयार कर रखा था, जिसे जानते सभी हैं, लेकिन, स्वीकार कुछ लोग ही करते हैं.
’12 मन लकड़ी, वो मेरी प्रॉपर्टी’
नाना पाटेकर के जीवन का फलसफा बेहद सीधा था. एक अन्य वायरल वीडियो में वे अपनी चिर-परिचित शैली में कहते हैं, ‘हमको मालूम है कि कल हमको जाना है. हमको 12 मन लकड़ी लगने वाली है. उतनी ही लगनी है. ‘दैट इज माई फाइनल प्रॉपर्टी’. मैंने वो अपनी लकड़ी जमा करके रखी है और वह सूखी है. उसमें जलाना, गीली लकड़ी मत इस्तेमाल करना. नहीं तो धुआं आएगा. दोस्त लोग और बाकी सभी लोग जमा होंगे. धुआं उनकी आंख में जाएगा, आंख से पानी आएगा. और मरते वक्त मुझे ये गलतफहमी होगी कि वे मेरे लिए रो रहे हैं. तो, मरते वक्त कम से कम गलतफहमी नहीं होनी चाहिए.’
मौत के मानते थे अटल सच
नाना पाटेकर मौत को एक अटल सत्य मानते थे और जीवन को बिना किसी भ्रम के जीना चाहते थे. नाना पाटेकर की यह सादगी केवल उनके विचारों तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि उनकी जीवनशैली भी इसके प्रमाण देखने को मिलते थे. इतने बड़े स्टार होने के बावजूद, वे मायानगरी की चकाचौंध से दूर रहना पसंद करते थे.
‘मैं फिल्म इंडस्ट्री से नहीं हूं’
जून 2025 में जब नाना पाटेकर महानायक अमिताभ बच्चन के शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 17’ में पहुंचे थे, तो उन्होंने अपनी इस जीवनशैली का जिक्र किया था. जब अमिताभ बच्चन ने उनसे पूछा कि सब कुछ हासिल करने के बाद वह गांव क्यों लौट गए? इस सवाल पर नाना पाटेकर का जवाब उनके व्यक्तित्व का आईना बनकर सामने आया था. उन्होंने कहा था, ‘मैं फिल्म इंडस्ट्री से नहीं हूं. मैं बस यहां काम करने आता हूं और फिर वापस चला जाता हूं. मैं कभी किसी पार्टी में नहीं गया, न ही शहर में ज्यादा रुका. मैं गांव का हूं और वहीं रहना पसंद करता हूं. मुझे वहां की जिंदगी अच्छी लगती है.’