भारत में टेलीकॉम सेक्टर अब सिर्फ तेजी से 5G नेटवर्क लगाने के दौर से आगे बढ़ रहा है. अगला फोकस इस बात पर है कि देश में इस्तेमाल होने वाले टेलीकॉम इक्विपमेंट का ज्यादा हिस्सा भारत में ही तैयार हो. भारत से इनकी सप्लाई दूसरे देशों को भी की जाए. इसी दिशा में Nokia भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी मौजूदगी को और मजबूत करने की तैयारी में है. कंपनी सरकार की प्रस्तावित Telecom PLI 2.0 नीति को समर्थन दे रही है. Nokia का मानना है कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी के साथ यहां उपलब्ध इंजीनियरिंग टैलेंट और रिसर्च सुविधाएं उसे ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका दे सकती हैं.
Nokia के भारत कारोबार प्रमुख समर मित्तल ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कहा कि भारत अब कंपनी के लिए केवल घरेलू बाजार नहीं है. चेन्नई स्थित Nokia की फैक्ट्री में बनने वाले टेलीकॉम इक्विपमेंट का करीब 40% हिस्सा विदेशों में भेजा जाता है. कंपनी के भारत में R&D, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और रिपेयर से जुड़े काम भी हैं. ऐसे में कंपनी भारत को सिर्फ असेंबली सेंटर के बजाय ज्यादा वैल्यू जोड़ने वाले मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करना चाहती है.
PLI 2.0 से लोकल मैन्युफैक्चरिंग को मिल सकता है बढ़ावा
सरकार मौजूदा टेलीकॉम PLI योजना के बाद नए इंसेंटिव प्रोग्राम पर काम कर रही है. मौजूदा योजना का कुल आउटले 12,195 करोड़ रुपये है और यह मार्च 2027 में खत्म होने वाली है. इसके बाद आने वाली नई योजना वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही में शुरू किए जाने का टारगेट है.
नई नीति में केवल तैयार टेलीकॉम इक्विपमेंट बनाने पर जोर नहीं होगा. इसमें कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, बैकवर्ड इंटीग्रेशन और देश के अंदर ज्यादा वैल्यू जोड़ने पर फोकस रहने की उम्मीद है. Nokia इस बदलाव को अहम मानता है. इससे भारत में स्थानीय सप्लायर नेटवर्क मजबूत हो सकता है और टेलीकॉम इक्विपमेंट की पूरी सप्लाई चेन देश में विकसित होने का रास्ता खुल सकता है.
चेन्नई प्लांट से विदेशों तक पहुंच रहा सामान
भारत में Nokia की मैन्युफैक्चरिंग मौजूदगी पहले से मजबूत है. कंपनी का चेन्नई प्लांट घरेलू बाजार के साथ दूसरे देशों की जरूरत भी पूरी करता है. कंपनी के मुताबिक, इस प्लांट के करीब 40% उत्पादन का निर्यात किया जाता है. Nokia के लिए भारत की अहमियत सिर्फ फैक्ट्री तक सीमित नहीं है. कंपनी यहां सॉफ्टवेयर और रिसर्च से जुड़े काम भी करती है. भारतीय इंजीनियरिंग टीम से विकसित ज्ञान और समाधान का इस्तेमाल ग्लोबल ऑपरेशंस में भी किया जा रहा है.
5G लगाने के बाद अब नेटवर्क से कमाई पर नजर
भारत में 5G नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो चुका है. अब टेलीकॉम कंपनियों के लिए अगली चुनौती यह है कि इस नेटवर्क से नए कारोबार और कमाई के रास्ते कैसे बनाए जाएं. Nokia के मुताबिक, इसमें नेटवर्क स्लाइसिंग, प्राइवेट नेटवर्क और सॉफ्टवेयर आधारित सर्विसेस अहम भूमिका निभा सकती हैं.
मिसाल के तौर पर किसी फैक्ट्री को सामान्य मोबाइल नेटवर्क के बजाय अपने काम के लिए ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद कनेक्टिविटी चाहिए. प्राइवेट 5G नेटवर्क ऐसी जरूरत पूरी कर सकता है. इसी तरह नेटवर्क स्लाइसिंग के जरिए एक ही नेटवर्क पर अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से वर्चुअल नेटवर्क तैयार किए जा सकते हैं.
Nokia अब सिर्फ नेटवर्क इक्विमेंट्स बेचने के बजाय ग्राहकों के साथ मिलकर ऐसे इस्तेमाल के मामले विकसित करने पर जोर दे रहा है. कंपनी का मानना है कि 5G की असली कमाई तब बढ़ेगी, जब इसके नए कारोबारी इस्तेमाल बड़े पैमाने पर सामने आएंगे.
AI-RAN बन सकता है अगला बड़ा मौका
टेलीकॉम सेक्टर में अगला बड़ा बदलाव AI-RAN के रूप में देखा जा रहा है. Nokia भारतीय ऑपरेटरों के साथ इस तकनीक को लेकर बातचीत कर रहा है और कंपनी के कुछ ट्रायल भी आगे बढ़ रहे हैं. AI-RAN में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को रेडियो एक्सेस नेटवर्क के साथ जोड़ा जाता है. इससे नेटवर्क को ज्यादा स्मार्ट तरीके से चलाने, ट्रैफिक संभालने और उपलब्ध स्पेक्ट्रम का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है.
AI के बढ़ते इस्तेमाल से डेटा ट्रैफिक भी तेजी से बढ़ेगा. ऐसे में नेटवर्क, क्लाउड, डेटा सेंटर और सुरक्षा से जुड़ी जरूरतें बढ़ेंगी. Nokia का फोकस इसी बदलते माहौल के लिए कनेक्टिविटी के साथ ऑटोमेशन और सिक्योरिटी को जोड़ने पर है. भारत के लिए इसका फायदा केवल Nokia के निवेश तक सीमित नहीं रहेगा. अगर कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात बढ़ता है, तो स्थानीय कंपनियों को नए कारोबार के मौके मिल सकते हैं.