गोवा में क्या कर रहे थे नाना पाटेकर? 4 दिन पहले सफेद कुर्ते-गमछे में आए थे नजर, 4 अक्टूबर को हो गया था मौत का आभास!


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Nana Patekar Death News: नाना पाटेकर की आखिरी झलक अब उनकी यादों से जुड़ी तस्वीर बन गई है. गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान चार दिन पहले वह बिल्कुल सादगी भरे अंदाज में नजर आए थे. सफेद कुर्ता, गमछा और चेहरे पर वही ठहराव. तब उनकी कही कुछ बातें शायद सामान्य लगी हों, लेकिन आज उन्हीं शब्दों का मतलब कुछ और महसूस होता है. मानो वक्त ने पहले ही कोई इशारा कर दिया था.

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 गोवा में क्या कर रहे थे नाना पाटेकर? 4 दिन सफेद कुर्ते और गमछे में आए थे नजरZoom

नाना पाटेकर ने सिनेमा इंडस्ट्री में 5 दशक तक काम किया.

नई दिल्ली. नाना पाटेकर के निधन की खबर ने सिनेमा की दुनिया को भीतर तक झकझोर दिया है. 75 साल की उम्र में भी पर्दे पर अपनी बुलंद आवाज और दमदार अंदाज से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले नाना आखिरी दिनों में गोवा में थे. महज चार दिन पहले यानी 4 अक्टूबर को वह सफेद कुर्ते और गमछे में नजर आए थे. चेहरे पर वही सादगी थी और बातों में जिंदगी को लेकर वही बेबाकी. उस दौरान उन्होंने कुछ ऐसी बातें भी कहीं, जिन्हें आज याद किया जाए तो दिल भारी हो जाता है. शायद उन्हें खुद भी अंदाजा नहीं था कि उनकी कही बातें इतनी जल्दी यादों का हिस्सा बन जाएंगी. उस आखिरी सार्वजनिक मौजूदगी में नाना ने जिंदगी, रिश्तों और अपने नजरिए पर खुलकर बात की थी. आज उनकी वही झलक और शब्द उनके चाहने वालों के लिए एक भावुक याद बन गए हैं.

नाना पाटेकर पिछले कुछ दिनों से गोवा में थे. उन्होंने 4 अक्टूबर 2026 को उन्होंने डोना पाउला में आयोजित सम्राट क्लब इंटरनेशनल इंस्टॉलेशन समारोह में हिस्सा लिया था. ये इनकी आखिरी पब्लिक अपीयरेंस साबित हुई. कार्यक्रम में नाना सफेद कुर्ते और गमछे में नजर आए थे.

मंच से की थी मनोहर पर्रिकर की तारीफ

उन्होंने मंच से गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और अपने करीबी दोस्त मनोहर पर्रिकर को याद किया. नाना ने मनोहर पर्रिकर की तारीफ करते हुए कहा कि वह उनसे उम्र में छोटे थे, लेकिन उनका कद और व्यक्तित्व ऐसा था कि उनके सामने सम्मान से सिर झुक जाता था. उन्होंने पर्रिकर के काम करने के जुनून और अपने मिशन के प्रति समर्पण को भी याद किया.

‘पता नहीं कल रहूं या न रहूं’

इस कार्यक्रम में नाना पाटेकर ने जिंदगी को लेकर जो बात कही, वह उनके निधन के बाद और भी भावुक कर देने वाली है. उन्होंने कहा था कि हर इंसान को एक दिन जाना है और उन्हें नहीं पता कि वह अगले दिन यहां होंगे या नहीं. उन्होंने खुद से सवाल करने की बात कही थी कि जब तक जिंदगी है, क्या वह वह सब कर पा रहे हैं, जो करना चाहते हैं. नाना का कहना था कि सिर्फ अपने बच्चों, पत्नी और घर तक दुनिया को सीमित रखना ही जिंदगी का मकसद नहीं होना चाहिए. इंसान को समाज के लिए भी कुछ लौटाना चाहिए. उस वक्त मौजूद लोगों के लिए यह एक अभिनेता का जीवन और समाज को लेकर विचार था, लेकिन उनके निधन के बाद यही शब्द नाना की आखिरी सार्वजनिक बातों में शामिल होकर बेहद मार्मिक बन गए हैं.

राजनीति पर भी खुलकर रखी थी राय

नाना पाटेकर अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते थे और गोवा के इस कार्यक्रम में भी उन्होंने अपनी बात बिना किसी लाग-लपेट के रखी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा था कि उन्हें उनकी कुछ बातें पसंद हैं और कुछ पसंद नहीं हैं. उनके मुताबिक, लोगों को अपनी असहमति जाहिर करना सीखना चाहिए. उन्होंने विरोध यानी प्रोटेस्ट के मायने समझाते हुए कहा कि जब किसी चीज से हम सहमत नहीं होते तो अपनी बात रखना जरूरी है, लेकिन विरोध का तरीका भी मायने रखता है. नाना ने कहा था कि अगर उन्हें किसी से कोई शिकायत है तो वह अपनी बात रखेंगे, लेकिन किसी के खिलाफ अभद्र या अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं करेंगे.

कुछ ही दिनों बाद थम गई सांसे

4 अक्टूबर को गोवा में लोगों के बीच खड़े होकर जिंदगी के मकसद पर सवाल उठाने वाले नाना पाटेकर अब नहीं रहे. आज यानी 8 अगस्त को तड़के गोवा स्थित उनके आवास पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया. वह बेहोश पाए गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. नाना पाटेकर ने करीब पांच दशक के करियर में हिंदी और मराठी सिनेमा को कई यादगार किरदार दिए.



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