Wheat Farming : कल्ले कम, पौधा कमजोर…समय से पहले गेहूं की बुवाई इतनी घातक, ये रहा सही समय

Wheat Farming : कल्ले कम, पौधा कमजोर…समय से पहले गेहूं की बुवाई इतनी घातक, ये रहा सही समय


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कल्ले कम, पौधा कमजोर…समय से पहले गेहूं की बुवाई इतनी घातक, ये रहा सही समय

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Wheat farming tips : शाहजहांपुर में धान की कटाई के बाद किसान गेहूं की बुवाई की तैयारी में हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी किसानों को थोड़ा रुकना चाहिए. बंपर उत्पादन के लिए नवंबर के पहले सप्ताह में बुवाई करें, ताकि पहली सिंचाई पर ठंड मिलने से अधिक कल्ले निकलें. शाहजहांपुर के किसान रनजोद सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि इस समय तापमान थोड़ा अधिक है. गर्म मौसम में गेहूं बोने से पौधों की ग्रोथ पर बुरा असर पड़ता है. गर्म मौसम होने की वजह से गेहूं के सही से कल्ले नहीं निकाल पाते हैं. लंबाई में बढ़ने लगते हैं. इससे पौधे कमजोर रह जाते हैं.

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शाहजहांपुर. धान की फसल कटने के बाद कई इलाकों में खेत खाली हो चुके हैं और कई किसान गेहूं की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं. किसान अक्टूबर के दूसरे-तीसरे सप्ताह में ही गेहूं बोने की योजना बना रहे हैं. हालांकि कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि जल्दबाजी में गेहूं की बुवाई न करें. फिलहाल अक्टूबर के महीने में गेहूं बुवाई करना सही नहीं माना जा रहा है. सही समय पर सही विधि से गेहूं की बुवाई करने पर ही किसानों को अच्छी पैदावार और बेहतर लाभ मिल सकता है. इसलिए किसानों को मौसम के बदलाव और कृषि एक्सपर्ट्स के सुझावों को ध्यान में रखकर ही बुवाई करनी चाहिए, ताकि फसल का सही विकास हो सके और बुवाई के बाद कोई आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े.

शाहजहांपुर के किसान रनजोद सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि धान की कटाई के बाद अभी गेहूं की बुवाई करने का समय सही नहीं है. किसानों को अक्टूबर महीने के अंत तक इंतजार करना चाहिए और बुवाई की शुरुआत नवंबर के पहले सप्ताह से ही करनी चाहिए. इस समय तापमान थोड़ा अधिक है और गर्म मौसम में गेहूं बोने से पौधों की ग्रोथ पर बुरा असर पड़ता है. गर्मी के कारण गेहूं के पौधे सीधे ऊपर की तरफ तेजी से ग्रोथ करने लगते हैं और पौधों में कल्ले बहुत कम बनते हैं. अगर कल्ले कम बनेंगे तो सीधा असर पैदावार पर पड़ेगा. नवंबर के पहले सप्ताह में बुवाई करने से पौधे मजबूत बनते हैं और पहली सिंचाई के समय सही ठंड मिलने से पौधों में कल्ले अधिक निकलते हैं, जिससे बंपर उत्पादन मिलता है.

बाद में पछताओगे

रनजोद सिंह बताते हैं कि किसानों को गेहूं की बुवाई के लिए सही समय का चुनाव करना बेहद जरूरी है. अक्टूबर के महीने में अधिक तापमान होने के कारण बुवाई टालनी चाहिए. नवंबर का पहला सप्ताह किसी भी गेहूं की फसल की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त और उत्तम समय माना गया है. इस समय मौसम में जरूरी नमी और तापमान में गिरावट आ जाती है. सही समय पर बोई गई फसल की ग्रोथ बहुत अच्छी होती है और पौधे मौसम के अनुसार सही से फलते-फूलते हैं. अगर किसान अक्टूबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह में ही गेहूं की बुवाई कर देते हैं तो इससे फसल को भारी नुकसान हो सकता है. गर्म मौसम होने की वजह से गेहूं के पौधे से सही कल्ले नहीं निकाल पाते हैं और सीधे ऊपर की ओर यानी लंबाई में बढ़ने लगते हैं. इससे पौधे कमजोर रह जाते हैं और एक-दो कल्ले ही बन पाते हैं. पौधों का यह असंतुलित विकास आगे चलकर फसल की पूरी पैदावार को बुरी तरह प्रभावित करता है.

कब करें पहली सिंचाई

गेहूं की फसल में ज्यादा कल्ले निकलना बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है. जितने अधिक कल्ले पौधों में बनेंगे, फसल का फैलाव उतना ही बेहतर होगा और बालियां भी अधिक संख्या में निकलेंगी. जब गेहूं की फसल घनी और मजबूत होगी तो प्रति एकड़ अनाज का कुल उत्पादन अपने आप बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा. कल्ले अधिक होने से पौधों की जड़ें भी मिट्टी को मजबूती से पकड़े रहती हैं, जिससे तेज हवा में भी फसल के गिरने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. नवंबर के पहले सप्ताह में बोई गई गेहूं की फसल की पहली सिंचाई लगभग 22 से 25 दिनों के बाद की जाती है. नवंबर के अंत तक अच्छी ठंड की शुरुआत हो जाती है, जो गेहूं के पौधों के विकास के लिए बहुत फायदेमंद होती है. ठंड के मौसम में जब पहली सिंचाई की जाती है तो पौधे बहुत तेजी से कल्ले निकालना शुरू कर देते हैं.



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