इसमें सबसे खास बात यह है कि हर 5 में से करीब 1 नया अफोर्डेबल हाउसिंग लोन ऐसे व्यक्ति को मिला, जिसने पहले कभी कोई कर्ज नहीं लिया था. रिपोर्ट के मुताबिक 21% अफोर्डेबल हाउसिंग लोन नए-टू-क्रेडिट यानी पहली बार कर्ज लेने वाले लोगों को मिले. बड़े और महंगे घरों के लोन में ऐसे लोगों की संख्या इससे काफी कम है. यानी सस्ता घर खरीदने के बहाने बहुत से लोग पहली बार बैंकिंग और कर्ज की औपचारिक व्यवस्था से जुड़ रहे हैं.
महिलाएं भी जमकर कर रही खरीदारी
इस बाजार में महिलाओं की हिस्सेदारी भी अच्छी है. अगस्त 2025 से अगस्त 2026 के बीच दिए गए अफोर्डेबल हाउसिंग लोन की कुल रकम में महिलाओं की हिस्सेदारी 31% रही. यानी घर खरीदने के लिए लिए जा रहे छोटे और किफायती लोन में महिलाएं भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं. यह बदलाव खास तौर पर उन परिवारों में अहम है, जहां घर खरीदने का फैसला पति-पत्नी दोनों मिलकर लेते हैं.
छोटे शहर बन रहे घर खरीदने का नया ठिकाना
अब घर खरीदने का बाजार सिर्फ दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक अफोर्डेबल हाउसिंग के करीब 79% लोन देश के टॉप 10 राज्यों में हैं. लेकिन इन राज्यों में भी सबसे ज्यादा हलचल बड़े शहरों के बाहर दिख रही है. यानी टियर-2, टियर-3 शहर और बड़े शहरों के आसपास के इलाके तेजी से बढ़ रहे हैं. उत्तर प्रदेश और राजस्थान ऐसे बाजारों में उभरकर सामने आए हैं.
पहली बार घर का लोन नहीं, पहली बार इस तरह का लोन
रिपोर्ट में एक और दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है. अफोर्डेबल हाउसिंग में करीब 70% ग्राहक ऐसे हैं, जिन्होंने पहली बार इसी तरह का प्रोडक्ट लिया है. इसे न्यू-टू-प्रोडक्ट कहा जाता है. यानी जरूरी नहीं कि इन लोगों ने जिंदगी में कभी कोई कर्ज न लिया हो. लेकिन घर खरीदने के लिए इस तरह का कर्ज उन्होंने पहली बार लिया है. इससे पता चलता है कि छोटे घरों के लिए कर्ज की मांग तेजी से बढ़ रही है.
हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की पकड़ बढ़ी
इस बाजार में सिर्फ बैंक ही नहीं, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां यानी HFC भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं. अगस्त 2021 में अफोर्डेबल हाउसिंग के कुल बकाया लोन में HFC की हिस्सेदारी 26.9% थी. अगस्त 2026 में यह बढ़कर 31.4% हो गई. खासकर छोटे और मध्यम कीमत वाले घरों के बाजार में इन कंपनियों की पकड़ बढ़ी है. इसका मतलब है कि घर खरीदने वालों के पास कर्ज देने वाले विकल्प भी बढ़ रहे हैं.
अब घर गिरवी रखकर छोटे कारोबार के लिए भी कर्ज
रिपोर्ट में Micro LAP यानी प्रॉपर्टी गिरवी रखकर 25 लाख रुपये तक का कर्ज भी तेजी से बढ़ता दिखा है. अगस्त 2026 तक ऐसे कर्ज कुल एक्टिव प्रॉपर्टी लोन का 85.6% थे. इन 83.1 लाख एक्टिव लोन में कुल 4.7 लाख करोड़ रुपये बकाया थे. पिछले पांच साल में इस सेगमेंट का कारोबार करीब 20% सालाना की रफ्तार से बढ़ा है. यानी लोग घर या दूसरी संपत्ति के बदले छोटे कारोबार और जरूरतों के लिए कर्ज ले रहे हैं.
छोटे लोन में जोखिम भी, लेकिन तस्वीर सुधरी
अच्छी बात यह है कि अफोर्डेबल हाउसिंग लोन में समय पर किस्त न चुकाने यानी डिफॉल्ट के मामलों में पिछले साल सुधार हुआ है. खासकर 10 से 25 लाख रुपये के लोन में जोखिम से जुड़े आंकड़े बेहतर हुए हैं. Micro LAP में भी HFC और स्मॉल फाइनेंस बैंकों के ग्राहकों की स्थिति सुधरी है. लेकिन 10 लाख रुपये से कम के छोटे लोन में अभी भी सावधानी की जरूरत है. खासकर जिन ग्राहकों ने गोल्ड लोन भी लिया है, उनमें किस्त चूकने का जोखिम ज्यादा पाया गया.
अगले 1-3 साल में भी बढ़ सकता है सस्ते घर का बाजार
रिपोर्ट में शामिल करीब 72% लोगों का मानना है कि अगले एक से तीन साल में अफोर्डेबल हाउसिंग का बाजार अच्छा रह सकता है. इसकी वजह छोटे शहरों में बढ़ती मांग, डिजिटल तरीके से लोन की जांच, नए आंकड़ों के आधार पर कर्ज देने की व्यवस्था और छोटे लोन के लिए बढ़ती जरूरत है. साफ है कि भारत का घरों का बाजार सिर्फ बड़े शहरों और करोड़ों के मकानों से नहीं चल रहा. छोटे शहरों में लाखों रुपये के घर और छोटे कर्ज भी अब बड़ा बाजार बना रहे हैं.