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Lordiyaa Talab: पाली के ऐतिहासिक लोर्डिया तालाब में कचरे और प्लास्टिक के कारण जल संकट गहराता जा रहा था. ऐसे में पंडित जीवराज श्रीमाली ने युवाओं के साथ मिलकर सफाई अभियान चलाया और तालाब से सैकड़ों टन कचरा बाहर निकाला. उनकी यह मुहिम जल संरक्षण और ऐतिहासिक जल स्रोतों को बचाने की मिसाल बन गई.
पाली. यहां का लोर्डिया तालाब, यह महज एक जल स्रोत नहीं, बल्कि पाली का वो गौरवशाली इतिहास है जिसने दशकों तक पूरे शहर की प्यास बुझाई है. लेकिन अफसोस, देखरेख के अभाव में यही ऐतिहासिक तालाब कचरे का ढेर बन चुका था. हजारों टन प्लास्टिक और गंदगी के कारण पानी जहरीला हो रहा था, जिससे मछलियां और अन्य जलीय जीव दम तोड़ रहे थे, तो बेजुबान जानवर भी बीमार पड़ रहे थे. जब इतिहास और पर्यावरण संकट में था, तब पंडित जीवराज श्रीमाली ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने युवाओं की एक टीम बनाई और उतर पड़े तालाब के पानी में.
देखते ही देखते इस टीम ने लोर्डिया तालाब के पेट से सैकड़ों टन कचरा बाहर निकाल फेंका और नदियों-तालाबों को साफ करने की एक मिसाल कायम कर दी. राजस्थान के प्रसिद्ध सोशल मीडिया एक्टिविस्ट पंडित जीवराज श्रीमाली जो ढलती उम्र के बावजूद,आज प्रदेश के प्राचीन जल स्रोतों और नदियों की तस्वीर बदलने के लिए एक मिसाल बन चुके हैं. सोशल मीडिया पर अपनी खास पहचान बना चुके जीवराज श्रीमाली पूरे राजस्थान में ‘क्लीन रिवर और वॉटर बॉडीज’ अभियान चला रहे हैं. इस बार उनके इस भगीरथ प्रयास का गवाह बना है पाली शहर की लाइफलाइन रहा ऐतिहासिक लोर्डिया तालाब.
कभी शहर के मुख्य जल स्त्रोतो में होती थी गिनती
मारवाड़ के इस ऐतिहासिक तालाब की गिनती कभी शहर के मुख्य जल स्रोतों में होती थी. एक समय था जब यह लोर्डिया तालाब पूरे पाली शहर की प्यास बुझाता था और इसके किनारे शहर की संस्कृति और सामाजिक जीवन पनपता था. लेकिन बदलते समय और प्रशासनिक अनदेखी के चलते यह ऐतिहासिक धरोहर कचरे का घर बन गई. हजारों टन प्लास्टिक, सीवेज और कचरा डाले जाने की वजह से तालाब का पानी जहरीला हो गया था. नौबत यहां तक आ गई कि जहरीले पानी और कचरे के कारण सैकड़ों मछलियां और जलीय जीव तड़प-तड़पकर मर रहे थे, वहीं पानी पीने आने वाले बेजुबान मवेशी भी बीमार पड़ रहे थे.
तालाब के पुनर्जीवित करने का किया काम
पाली के इस ऐतिहासिक गौरव को घुटता देख पंडित जीवराज श्रीमाली शांत नहीं बैठे. उन्होंने युवाओं की एक जोशीली टीम को एकजुट किया और खुद तालाब के दलदल और कचरे में उतर गए. देखते ही देखते इस मुहिम में सैकड़ों हाथ जुड़ गए और तालाब से कई टन कचरा बाहर निकालकर इसे पुनर्जीवित करने का काम किया गया.पंडित जीवराज श्रीमाली ने तालाब की सफाई के साथ-साथ आमजन से एक भावुक अपील भी की है. उन्होंने लोगों से जलाशयों में पॉलीथिन और कचरा न फेंकने का आग्रह किया है, ताकि बेजुबान पशु-पक्षियों और जलीय जीवों की जान बचाई जा सके.
लोर्डिया तालाब का इतिहास और महत्व
पाली शहर के मध्य में स्थित लोर्डिया तालाब मारवाड़ अंचल के पारंपारिक जल प्रबंधन का एक बेजोड़ उदाहरण है. रियासत काल में जब आधुनिक पाइपलाइन और वॉटर सप्लाई सिस्टम नहीं हुआ करते थे, तब वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) के इस विशाल स्रोत से ही पूरे पाली शहर और आसपास के क्षेत्रों में पीने के पानी की आपूर्ति की जाती थी. तालाब के किनारे बने पक्के घाट, बुर्ज और प्राचीन बनावट आज भी इसके ऐतिहासिक महत्व की गवाही देते हैं. भूजल स्तर (Groundwater Level) को बनाए रखने में भी इस तालाब की भूमिका हमेशा से निर्णायक रही है.