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Anant sungh Neeraj Kumar Dispute: बिहार की सियासत में जेडीयू के अंदर नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच चल रहे विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. दिलचस्प बात यह है कि जिस विवाद में अब तक दो अलग-अलग खेमों की सक्रियता दिखाई दे रही थी, वहां अब दोनों तरफ से सार्वजनिक बयानबाजी पर खामोशी है. जानकार कहते हैं कि राजनीति में खामोशी भी कई बार बड़ी रणनीति होती है. खासकर तब, जब विवाद पार्टी के भीतर का हो. फिलहाल तस्वीर साफ है- नीरज कुमार के पक्ष की ओर से और अनंत सिंह के पक्ष से भी खामोशी है, मगर क्यों?
नीरज के साथ संजय, अनंत के साथ ललन… दोनों तरफ खामोशी क्यों?
बिहार की सियासत में जेडीयू के भीतर नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच चल रहा विवाद अब बयानबाजी से ज्यादा खामोशी की वजह से चर्चा में है. एमएलसी चुनाव को लेकर दोनों ही आमने-सामने हैं. एक दूसरे के राजनीतिक कद को देख लेने तक सियासी अदावत बढ़ चुकी थी. लेकिन, ऐसा लगता है कि वर्तमान में इस मुद्दे पर ‘अर्धविराम’ लग गया है. पटना में जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से जब नीरज-अनंत विवाद पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. पत्रकारों ने सवाल दोबारा किया, लेकिन संजय झा ने इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि जेडीयू बिहार की सभी 8 सीटों पर चुनाव जीतने जा रही है. दरअसल, संजय झा की यह खामोशी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नीरज कुमार जेडीयू के अधिकृत उम्मीदवार हैं, वहीं जेडीयू के ही विधायक अनंत सिंह के रुख को लेकर पिछले कई दिनों से सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष से जब सीधे इसी विवाद पर सवाल हुआ और उन्होंने टिप्पणी करने से परहेज किया, तो इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं.
संजय की खामोशी को अनंत की चुप्पी से जोड़कर देखिए
दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब इस विवाद में सार्वजनिक बयानबाजी पर ब्रेक लगा है. इससे पहले अनंत सिंह के रुख को लेकर भी लगातार चर्चा थी. लेकिन ललन सिंह से बातचीत के बाद अनंत सिंह की तरफ से भी सार्वजनिक बयानबाजी से दूरी बनाने की बात सामने आई. यानी एक तरफ अनंत सिंह को लेकर यह संदेश आया कि वह नीरज कुमार के समर्थन में नहीं हैं, लेकिन पार्टी हित में सार्वजनिक तौर पर उनके खिलाफ भी बयान नहीं देंगे. अब दूसरी तरफ नीरज कुमार के समर्थन में माने जा रहे संजय झा भी अनंत-नीरज विवाद पर सवाल पूछे जाने के बावजूद चुप हैं.
एक विवाद, दो चेहरे और दोनों तरफ खामोशी
यहीं से इस पूरे घटनाक्रम की राजनीतिक कहानी दिलचस्प हो जाती है. नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन अब दोनों तरफ से विवाद को सार्वजनिक बहस बनाने से बचने की कोशिश दिखाई दे रही है. अनंत सिंह की चुप्पी को ललन सिंह की पहल के बाद पार्टी हित से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि आज संजय झा की चुप्पी यह संकेत देती है कि नीरज-अनंत विवाद को लेकर पार्टी नेतृत्व भी फिलहाल सार्वजनिक टकराव बढ़ाने के मूड में नहीं है. संजय झा ने विवाद पर जवाब देने के बजाय सभी 8 सीटों पर जीत की बात करके साफ कर दिया कि फिलहाल उनका फोकस चुनाव और पार्टी के प्रदर्शन पर है.
क्या पार्टी हित में दोनों तरफ लगी ‘जुबान पर लगाम’?
सवाल यही है कि आखिर जिस विवाद पर पिछले दिनों लगातार राजनीतिक चर्चा हो रही थी, उस पर अचानक दोनों तरफ से खामोशी क्यों है? क्या ललन सिंह की पहल के बाद अनंत सिंह ने पार्टी हित में सार्वजनिक बयानबाजी से दूरी बनाई और अब संजय झा भी उसी लाइन पर विवाद को आगे बढ़ाने से बच रहे हैं? क्या जेडीयू ने तय किया है कि चुनाव तक नीरज-अनंत विवाद को सार्वजनिक मंच पर तूल नहीं दिया जाएगा? फिलहाल इतना जरूर दिख रहा है कि नीरज के पक्ष में खड़े माने जा रहे संजय झा आज सवाल पर खामोश हैं और अनंत सिंह भी ललन सिंह की पहल के बाद खामोशी की राह पर हैं.