Janpahad Dargah I उर्स में उमड़ते हैं लाखों जायरीन, हिंदू श्रद्धालुओं की संख्या मुस्लिमों से भी ज्यादा

Janpahad Dargah I उर्स में उमड़ते हैं लाखों जायरीन, हिंदू श्रद्धालुओं की संख्या मुस्लिमों से भी ज्यादा


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400 साल पुरानी दरगाह, जहां मिट जाती हैं हिंदू-मुस्लिम साथ मांगते हैं मन्नत

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Janpahad Dargah: तेलंगाना के सूर्यापेट जिले की करीब 400 साल पुरानी जानपहाड़ सैदुलु बाबा दरगाह हिंदू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमुनी तहजीब की अनोखी मिसाल है. यहां चादर और संदल के साथ श्रद्धालु नारियल भी चढ़ाते हैं. सालाना उर्स में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों से लाखों जायरीन पहुंचते हैं, जिनमें हिंदू श्रद्धालुओं की संख्या भी बड़ी रहती है.

हैदराबाद. तेलंगाना के सूर्यापेट जिले में स्थित जानपहाड़ सैदुलु बाबा की दरगाह सदियों से सांप्रदायिक सौहार्द और साझा संस्कृति की एक अनोखी मिसाल बनी हुई है. पालाकीडू मंडल के जानपहाड़ गांव में स्थित यह पवित्र मजार हज़रत जानपहाड़ सैदुलु बाबा और हज़रत मोइनुद्दीन की याद में बनी है. करीब 400 साल पुरानी इस दरगाह की सबसे खास बात यह है कि यहाँ आकर मजहब और जाति की तमाम दीवारें पूरी तरह मिट जाती हैं. इस दरगाह की परंपराएं भारतीय संस्कृति के साझा रंगों को खूबसूरती से दर्शाती हैं, सामान्य तौर पर मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर चादर और फूल पेश करने की रवायत होती है लेकिन जानपहाड़ दरगाह में सूफी और दक्षिण भारतीय स्थानीय परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.

यहां आने वाले श्रद्धालु सूफी रिवाज़ों के तहत चादर और संदल तो पेश करते ही हैं साथ ही पूरी आस्था के साथ मन्नत मांगते हुए नारियल भी फोड़ते हैं. कई परिवार अपनी मनोकामना पूरी होने पर बच्चों का मुंडन संस्कार और पारंपरिक भोज का आयोजन भी यहीं परिसर में करते हैं. सालाना उर्स-ए-शरीफ के मौके पर तो यहां का नजारा देखते ही बनता है. तीन दिवसीय उर्स के दौरान तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पड़ोसी राज्यों से लाखों की तादाद में ज़ायरीन पहुंचते हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि इस सूफी दरगाह के उर्स में जुटने वाली कुल भीड़ में हिंदू श्रद्धालुओं की तादाद मुस्लिम अकीदतमंदों से भी अधिक दर्ज की जाती है.

संदल शरीफ के जुलूस, गुस्ल-ए-शरीफ और रातभर चलने वाली कव्वालियों के बीच हर वर्ग और समुदाय के लोग एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर इबादत करते दिखाई देते हैं. स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आने वाले भक्तों का अटूट विश्वास है कि यहां सच्चे दिल से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. ज़िंदगी की उलझनों, पारिवारिक परेशानियों और मानसिक तनाव से जूझ रहे लोग जब इस दरगाह की चौखट पर सिर झुकाते हैं, तो उन्हें एक अनूठी रूहानी शांति और हौसला मिलता है. नफरत और दूरियों के इस दौर में जानपहाड़ की यह दरगाह इंसानियत, आपसी भाईचारे और साझी आस्था का वह दीप जलाए हुए है, जो पूरे मुल्क को प्रेम और एकता का पैगाम देता है.



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