पश्चिम एशिया की जंग अब सरहदों को लांघकर काफी दूर तक पहुंचने लगी है. दुनिया अब तक यही मानकर चल रही थी कि ईरान और अमेरिकी सेना के बीच शह-मात का ये खूनी खेल केवल खाड़ी देशों, लाल सागर और इजराइल के आसपास के इलाकों तक ही सीमित रहेगा. लेकिन वाशिंगटन से लेकर यूरोपीय राजधानियों में अचानक मची खलबली ने साबित कर दिया है कि तेहरान की रणनीतिक पहुंच और उसके मंसूबे अब दायरा बहुत बड़ा कर चुके हैं. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास आई एक सीक्रेट रिपोर्ट ने सुपरपावर अमेरिका के पेंटागन में ऐसी घबराहट पैदा कर दी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तुरंत अपने सबसे घातक और पावरफुल एयरक्राफ्ट को रातों-रात पीछे हटाना पड़ा.
अमेरिका ने खिसकाए अपने बी 1 बॉम्बर्स
हड़कंप तब शुरू हुआ जब दो अमेरिकी अधिकारियों ने पहचान छिपाए रखने की शर्त पर खुलासा किया कि ब्रिटेन में स्थित अमेरिकी वायुसेना के सबसे अहम एयरबेस ‘आरएएफ फेयरफोर्ड’ (RAF Fairford) पर ड्रोन हमले की एक बेहद खतरनाक साजिश रची गई थी. इस ‘कॉम्प्लेक्स ड्रोन अटैक’ के तार सीधे ईरान और उसके समर्थित नेटवर्क से जुड़ते दिख रहे हैं. खतरे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका ने बिना किसी देरी के अपने सबसे विनाशकारी ‘बी-1 बॉम्बर’ लड़ाकू विमानों को आरएएफ फेयरफोर्ड से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर खिसका दिया है.
आरएएफ फेयरफोर्ड पूरे यूरोप में अमेरिकी बॉम्बर्स का सबसे पसंदीदा और प्राथमिक ठिकाना माना जाता है, इसलिए वहां से बॉम्बर्स का हटना पश्चिमी देशों के सुरक्षा महकमे के लिए एक बहुत बड़ा झटका है.
ब्रिटिश पुलिस का बड़ा एक्शन: 22 साल का युवक गिरफ्तार
हालांकि ईरान ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बेबुनियाद और झूठा प्रचार करार दिया है, लेकिन यूरोपीय धरती पर हुई एक बड़ी गिरफ्तारी ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के दावों को मजबूत कर दिया है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ब्रिटेन की काउंटर टेररिज्म पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई. पुलिस ने लंदन से 22 साल के एक ब्रिटिश नागरिक को संदिग्ध आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने के आरोप में धर दबोचा.
मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अनुसार, ये गिरफ्तारी फेयरफोर्ड एयरबेस पर मंडरा रहे संदिग्ध आतंकी खतरे की चल रही गहन जांच का ही एक हिस्सा है. सुरक्षा एजेंसियों को मजबूत अंदेशा है कि ये युवक उस लोकल नेटवर्क या स्लीपर सेल का हिस्सा हो सकता है जो फेयरफोर्ड बेस पर ड्रोन हमले के लिए रेकी करने, लोकेशन की रेकी करने या हमलावरों को लॉजिस्टिक्स से जुड़ी मदद पहुंचाने का काम कर रहा था. फिलहाल इस 22 वर्षीय संदिग्ध से किसी अज्ञात स्थान पर बेहद कड़ी पूछताछ चल रही है.
अमेरिकी सेना की चुप्पी
जब इस पूरे घटनाक्रम और फेयरफोर्ड एयरबेस से बी-1 बॉम्बर्स को अचानक हटाए जाने के फैसले पर अमेरिकी सेना की यूरोपीय कमान के आधिकारिक प्रवक्ता से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कोई भी सीधा बयान देने से साफ इनकार कर दिया.
अमेरिकी सैन्य प्रवक्ता ने कहा, ‘खुफिया जानकारी और सैन्य ऑपरेशन्स से जुड़े सेंसेटिव मामलों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा करना बिल्कुल ठीक नहीं है. हम अपने बलों की सुरक्षा रणनीतियों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे’. प्रवक्ता ने आगे जोड़ा, ‘जैसा कि कई पिछले ऑपरेशन्स में साबित हो चुका है, बी-1 (B-1), बी-2 (B-2) और बी-52 (B-52) सहित अमेरिका के सभी बॉम्बर्स कभी भी और दुनिया में कहीं भी सटीक हमला करने की क्षमता रखते हैं. इसके लिए वa सीधे अमेरिकी महाद्वीप की अपनी मुख्य धरती से उड़ान भरकर दुश्मनों पर कहर ढा सकते हैं और अपने बेस पर वापस लौट सकते हैं’.
आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस ही निशाने पर क्यों?
लंदन के पास ग्लॉस्टरशायर में स्थित ‘आरएएफ फेयरफोर्ड’ अमेरिकी वायुसेना का कोई साधारण अड्डा नहीं है. ये एयरबेस पूरे यूरोप, रूस की सीमा और मध्य पूर्व में अमेरिकी वैश्विक ऑपरेशन्स का मुख्य रणनीतिक लॉन्चपैड माना जाता है.
जब भी अमेरिका या उसके नाटो सहयोगियों को यूरोपीय क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य संकट के दौरान अपनी ताकत का प्रदर्शन करना होता है, तो इसी बेस पर अमेरिकी वायुसेना के भारी-भरकम और घातक बॉम्बर्स – बी-1 लांसर, बी-2 स्पिरिट और बी-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस की तैनाती की जाती है. ऐसे में अगर इस एयरबेस पर ईरान या उसके प्रॉक्सी गुटों द्वारा कोई आत्मघाती ड्रोन हमला करने में कामयाबी मिल जाती, तो ये नाटो की वायु सुरक्षा की पोल खोल देता है.
ईरान का बढ़ता खतरा
अगर ब्रिटिश और अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में ईरान के शामिल होने का ये दावा सच साबित होता है, तो ये वाशिंगटन और तेहरान के बीच पहले से ही बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंचे तनाव को सीधे युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर देगा. पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में ईरान समर्थित गुटों द्वारा कॉमर्शियल जहाजों और अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन व मिसाइल हमलों की बाढ़ सी आ गई है.
रूस-यूक्रेन जंग और पश्चिम एशिया की जंगों में जिस तरह सस्ते मगर खतरनाक ‘कामिकेज’ ड्रोनों ने तबाही मचाई है, उसने अमेरिकी डिफेंस एक्सपर्ट्स की नींद उड़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब इतना ताकतवर और निडर हो चुका है कि वो यूरोप में मौजूद अमेरिकी और नाटो (NATO) के बड़े सैन्य ठिकानों को सीधे निशाना बना सकता है या उन्हें पूरी तरह अपाहिज कर सकता है.
क्या यूरोप की धरती पर शुरू हो गई है नई जंग?
ब्रिटेन के फेयरफोर्ड एयरबेस से अमेरिकी बी-1 बॉम्बर्स का इस तरह अचानक पीछे हटना कोई साधारण सैन्य फेरबदल नहीं है. इस बात का सबूत है कि ड्रोन तकनीक और प्रॉक्सी वॉरफेयर ने दुनिया के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सैन्य ठिकानों के सुरक्षा समीकरणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है.
लंदन से 22 साल के संदिग्ध की गिरफ्तारी और अमेरिकी घातक बॉम्बर्स को पीछे खिसकाना ये साफ इशारा करता है कि मध्य पूर्व की आग अब यूरोप के दरवाजे तक पहुंच गई है. जब तक ब्रिटिश और अमेरिकी जांच एजेंसियां इस साजिश की हर एक परत को उधेड़ नहीं लेतीं, तब तक पश्चिमी दुनिया और नाटो के सुरक्षा तंत्र पर ये डर लगातार हावी रहेगा.