नई दिल्ली: 6 सितंबर 2026 दिन रविवार दोपहर के 1:30 स्टूडेंट से भरी हुई एक बिल्डिंग जो कि पीजी थी, वह भर भराकर गिर जाती है. कई मजदूर और स्टूडेंट दब जाते हैं. कई को सुरक्षित निकाला जाता है, लेकिन इसमें 7 लोगों की मौत हो जाती है, जिसमें 5 स्टूडेंट्स थे. इसके बाद आसपास भगदड़ मच जाती है. फिर शुरू हो जाता है कार्रवाई का सिलसिला, जिसके बाद जर्जर पीजी और हॉस्टल्स पर कार्रवाई होती है.
यह पूरी घटना दिल्ली के सत्य निकेतन की है, जिसे कभी स्टूडेंट हब कहा जाता था. आसपास के कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले लगभग 90 फीसदी स्टूडेंट इसी सत्य निकेतन में रहते थे, लेकिन 6 सितंबर को हुई घटना के बाद इस इलाके की जो पहचान थी, वह अब खो गई है. यहां पर आने से भी लोग अब डरने लगे हैं. 6 सितंबर को गिरने वाली बिल्डिंग के बाद आखिर क्या कुछ बदला यहां. क्या स्टूडेंट की रौनक लौट कर आई या नहीं. यही जानने के लिए लोकल 18 की टीम ने ग्राउंड रिपोर्ट की तो कई हकीकत निकलकर सामने आई.
आज भी यहां पड़ा है बिल्डिंग का मलबा
सत्य निकेतन में ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान पाया गया कि जहां पर पीजी की बिल्डिंग गिरी थी. आज भी मलबा
वहीं पर पड़ा हुआ है. उसके बगल वाली जो पीजी की बिल्डिंग थी. वह भी आधी टूटी हुई है. वैसे ही वहां मौजूद है. जो बचा हुआ मलबा पीछे की इमारत में डाला गया था, वह भी वहीं पर है. आज भी इस पूरे इलाके में इस मलबे की वजह से धूल उड़ रही है. गंदगी का अंबार लगा हुआ है. धूल और गंदगी की वजह से ज्यादातर आसपास की दुकानें बंद नजर आई.
बता दें कि बिल्डिंग जहां गिरी थी, उस जगह से थोड़ी दूर पर कुछ रेस्टोरेंट और कैफे खुले हुए नजर आए, लेकिन उसमें भी रौनक नहीं थी. स्टूडेंट बिल्कुल ना के बराबर नजर आए. फिलहाल यहां पर कई सालों से चाय बेचने वाले रमेश भी अपनी चाय की दुकान अब बंद कर चुके हैं. वहां अब कोई नहीं बैठता है, पूछने पर पता चला कि वह अपने गांव चले गए हैं. इस घटना के बाद से वह लौट के ही नहीं आए. कई ऐसे पीजी हैं, जिन पर ताला लटका हुआ है. रेस्टोरेंट और कैफे कुछ खुले हुए नजर आए, लेकिन वहां पर भी सन्नाटा ही पसरा हुआ था.
लौट कर नहीं आए स्टूडेंट्स
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान लोकल 18 की टीम ने आसपास के लोगों से बातचीत की तो वो कैमरे पर आने से डर रहे थे. उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद इस पूरे इलाके का जो कारोबार था, वह ठप हो गया है. इसलिए कैमरे पर आकर कुछ भी बोलना उन्हें और नुकसान दे देगा, लेकिन उन लोगों ने बिना कैमरे पर आए बताया कि जब से यह घटना हुई है, तब से तेजी से इस इलाके का कारोबार ठप हो गया है. स्टूडेंट की वजह से यहां के कैफे और रेस्टोरेंट चलते थे.
सुरक्षित इलाके की तलाश में हैं स्टूडेंट
अब स्टूडेंट यहां पर नहीं हैं. जो एक बार लौट के गए वो दोबारा लौट के आए नहीं. उन्होंने बताया कि स्टूडेंट्स ने कहीं और पीजी और कमरे ले लिए हैं. माता-पिता भी अब अपने बच्चों को बेहतर से बेहतर कमरे में रखवाने के लिए इस इलाके की ओर आ भी नहीं रहे हैं. वह अच्छे इलाके और सुरक्षित इलाकों को ही ढूंढ रहे हैं. उन्होंने बताया कि कुछ बिल्डिंग पर यहां पर कार्रवाई होने की वजह से वह बंद हो गई हैं. इस इलाके में सन्नाटा लगातार पसरता जा रहा है. अगले 6 महीने के अंदर हो सकता है कि यहां जो रेस्टोरेंट और कैफे बचे हैं. वो भी बंद हो जाएं.