सर्वपितृ अमावस्या पर अनूठा आयोजन, आप भी निशुल्क कर सकते हैं पितरों को तृप्त, जानें सबकुछ

सर्वपितृ अमावस्या पर अनूठा आयोजन, आप भी निशुल्क कर सकते हैं पितरों को तृप्त, जानें सबकुछ


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सर्वपितृ अमावस्या पर अनूठा आयोजन, आप भी निशुल्क कर सकते हैं पितरों को तृप्त

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Khargone News: खरगोन में इस साल सामूहिक श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का आयोजन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा. आयोजन सुबह 8 बजे से दोपहर दो बजे तक चलेगा. गीता गंगा सेवा ट्रस्ट द्वारा कराए जा रहे इस आयोजन में उन लोगों के निमित्त भी श्राद्ध किया जाएगा, जिनका इस दुनिया में कोई नहीं है.

खरगोन. मध्य प्रदेश के खरगोन में सर्वपितृ अमावस्या के दिन एक अनूठा सामूहिक श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान आयोजन होने जा रहा है. शहर के गीता गंगा सेवा ट्रस्ट की ओर से होने वाले इस आयोजन में उन लोगों के निमित्त भी श्राद्ध किया जाएगा, जिनका इस दुनिया में कोई नहीं है. इसके साथ ही देश के लिए शहीद हुए जवानों, महापुरुषों और पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और अन्य जीवों के निमित्त भी तर्पण और पिंडदान किया जाएगा. आयोजन की खास बात यह है कि इसमें शामिल होने वाले लोगों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. संस्था की ओर से श्राद्ध और तर्पण के लिए जरूरी सामग्री भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी. पंडित जी की दक्षिणा भी संस्था की ओर से ही दी जाएगी. ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर या पूजन सामग्री और पंडित की व्यवस्था नहीं कर पाने वाले लोग भी इस सामूहिक आयोजन में शामिल होकर अपने पितरों के निमित्त तर्पण कर सकते हैं.

गीता गंगा सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित जगदीश ठक्कर ने लोकल 18 को बताया कि करीब 13-14 साल पहले संस्था ने महसूस किया कि धीरे-धीरे लोग श्राद्ध और तर्पण की परंपरा से दूर होते जा रहे हैं. कई लोगों की धारणा बन गई है कि मृत्यु के बाद 13 दिन के कार्यक्रम और बाद में वार्षिक श्राद्ध के बाद उनकी जिम्मेदारी पूरी हो जाती है. इसी बीच यह चिंता हुई कि कहीं तर्पण और श्राद्ध की परंपरा ही धीरे-धीरे खत्म न हो जाए.

कुंदा नदी के तट से शुरू हुआ सामूहिक तर्पण
शास्त्रों में वर्णित है कि देवी-देवताओं की पूजा छूट जाए, तो चलेगा लेकिन पितरों की पूजा नहीं छूटनी चाहिए. इसी सोच के साथ कुंदा नदी के तट पर संस्था द्वारा सामूहिक तर्पण की शुरुआत की गई. धीरे-धीरे इसमें लोगों की भागीदारी बढ़ती गई और यह आयोजन हर साल होने लगा. आज पितृपक्ष के दौरान होने वाला यह आयोजन सैकड़ों लोगों को अपने पितरों के निमित्त तर्पण करने का अवसर देता है.

पेड़-पौधों के लिए भी श्राद्ध
पंडित ठक्कर के अनुसार, सामूहिक आयोजन में सभी जाति और समाज के लोग एक साथ बैठकर अपने पितरों का श्राद्ध और तर्पण करते हैं. इस दौरान विद्वान पंडितों के मार्गदर्शन में देश के शहीदों, महापुरुषों, लावारिस मृतकों और उन लोगों के निमित्त भी श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कराया जाता है, जिनका कोई अपना नहीं है. वहीं संस्था की इस पहल में प्रकृति और जीव-जंतुओं को भी शामिल किया गया है. पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और अन्य जीवों के निमित्त भी तर्पण किया जाता है. संस्था का उद्देश्य इसके जरिए लोगों को यह संदेश देना है कि प्रकृति और जीव-जगत के प्रति भी मनुष्य की जिम्मेदारी है.

10 अक्टूबर को होगा आयोजन
इस वर्ष सामूहिक श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का यह अनूठा आयोजन 10 अक्टूबर, दिन शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा. आयोजन सुबह 8 बजे से दोपहर दो बजे तक चलेगा. इसमें शामिल होने के इच्छुक लोग पंडित जगदीश ठक्कर के मोबाइल नंबर 9753799689 पर संपर्क कर पंजीयन करा सकते हैं. पंजीयन अमावस्या से एक दिन पहले तक कराया जा सकेगा, जो अनिवार्य है. आयोजन पूरी तरह निशुल्क रहेगा. हालांकि संस्था की ओर से दान स्वीकार किया जाएगा.



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