जज्बा हो तो सुधा ऐसा! स्कूटी से नाप दिया पूरा बेलसंड, बनाया बिहार का पहला टीबी मुक्त प्रखंड, राज्यपाल से सम्मानित

जज्बा हो तो सुधा ऐसा! स्कूटी से नाप दिया पूरा बेलसंड, बनाया बिहार का पहला टीबी मुक्त प्रखंड, राज्यपाल से सम्मानित


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सिंगल मदर सुधा कुमारी ने स्कूटी से गांव-गांव घूमकर बेलसंड को टीबी मुक्त बनाया. उन्होंने जनप्रतिनिधियों को ‘निक्षय मित्र’ बनाया. डोर-टू-डोर कैंपिंग से मरीजों का इलाज हुआ. रिकवरी रेट 85% से बढ़कर 95% पहुंचा. बेलसंड बिहार का पहला टीबी मुक्त प्रखंड बना. इस शानदार उपलब्धि के लिए राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सुधा कुमारी को सम्मानित किया.

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सीतामढ़ी: साल 2013 से एक सिंगल मदर के रूप में घर और नौकरी की दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहीं सुधा कुमारी ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे बुलंद हों तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती. सीतामढ़ी जिले के बेलसंड ब्लॉक में सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर के तौर पर पदस्थापित सुधा कुमारी ने विपरीत परिस्थितियों, खराब रास्तों और सामाजिक झिझक के बावजूद स्कूटी से गांव-गांव जाकर ऐसा अभियान चलाया कि पूरे बिहार में बेलसंड का डंका बज गया. उनके इस अनोखे और समर्पित प्रयास की बदौलत बेलसंड ब्लॉक की सभी 9 पंचायतें टीबी मुक्त हो चुकी हैं, जिसके लिए हाल ही में पटना में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में राज्यपाल सैयद अता हसनैन द्वारा उन्हें प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

चुनौतियों भरा सफर और निक्षय मित्र बनाने की अनोखी पहल
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मिली सरकारी गाइडलाइंस के बाद स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों को जोड़ना सबसे बड़ी चुनौती थी. सुधा कुमारी ने हार नहीं मानी और गांव-गांव जाकर पंचायत प्रतिनिधियों व मुखिया जी से व्यक्तिगत मुलाकात की. उन्होंने जनप्रतिनिधियों को समझाया कि यह उनके अपने ही समाज और गांव के लोगों को स्वस्थ बनाने की पहल है. उनकी इस प्रेरणादायी पहल का असर यह हुआ कि बेलसंड की सभी 9 पंचायतों के मुखिया आगे आए और ‘निक्षय मित्र’ बनकर टीबी मरीजों को गोद लिया, जिससे मरीजों के पोषण और इलाज का रास्ता आसान हो गया.

लैब टेक्नीशियन संग जमीनी अभियान और डोर-टू-डोर कैंपिंग
क्षेत्रीय परिस्थितियों को देखते हुए सुधा कुमारी ने अपने लैब टेक्नीशियन के साथ मिलकर विशेष रणनीति तैयार की. कमजोर और घनी आबादी वाले इलाकों को चिन्हित कर सप्ताह में तीन-तीन दिन 3 से 4 घंटे के फील्ड कैंप लगाए गए. स्कूटी से दुर्गम इलाकों में पहुंचना और लोगों के मन से टीबी का डर निकालना बेहद कठिन था. हालांकि, बलगम जांच और आधुनिक ट्रूनैट मशीनों के प्रयोग से सटीक सैंपलिंग की गई, जिससे छुपे हुए मामलों की समय पर पहचान संभव हो सकी.

85% से बढ़कर 95% पहुंची रिकवरी रेट, एमडीआर मामलों पर भी नजर
सुधा कुमारी की देखरेख में बेलसंड में इलाज की सफलता दर जो पहले 85% थी, वह बढ़कर अब 95% तक पहुंच गई है. वर्तमान में ब्लॉक में लगभग 100 ऑन-ट्रीटमेंट सामान्य टीबी मरीज हैं, जबकि 6 मरीज सेकेंड-लाइन यानी एमडीआर श्रेणी के हैं, जिनका नियमित इलाज जारी है .उनका स्पष्ट मानना है कि यदि टीबी का सही समय पर पता चल जाए, नियमित दवा ली जाए और खान-पान का ध्यान रखा जाए, तो यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है.

पटना के राज्यस्तरीय मंच पर गूंजी सीतामढ़ी मॉडल की छाप
पटना में आयोजित भव्य सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल महोदय, स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. रवि और राज्य क्षय पदाधिकारी डॉ. बीके मिश्रा की उपस्थिति में सीतामढ़ी के बेलसंड मॉडल की सराहना की गई. पूरे बिहार में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर सुधा कुमारी को विशेष रूप से 2 मिनट का वक्तव्य देने का अवसर मिला. वरिष्ठ अधिकारियों ने यह तक सुझाव दिया कि सुधा कुमारी के इस कार्य मॉडल और अनुभवों को राज्य के अन्य जिलों में भी साझा कराया जाना चाहिए ताकि अन्य क्षेत्र भी इससे प्रेरणा ले सकें.

सफलता का संदेश: निरंतरता और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
सुधा कुमारी का कहना है कि 2022 से शुरू हुई यह यात्रा एक दिन में सफल नहीं हुई, 2023 में 2 पंचायतें और 2024 में 4 पंचायतें टीबी मुक्त हुईं, जिसके लिए उन्हें पूर्व में भी सम्मानित किया जा चुका है. उनकी इस उपलब्धि से न केवल सीतामढ़ी जिले का मान बढ़ा है, बल्कि यह देश की हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों से जूझते हुए समाज सुधार के कार्यों में जुटी हुई है.



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