दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता इस्तेमाल जितनी सहूलियत पैदा कर रहा है, उतनी ही समस्या भी दे जा रहा है. उसके इस दौर में अब किसी की भी आवाज और चेहरे की नकल करना बहुत आसान हो गया है. इस बात की चर्चा यहां पर हो रही है पीएम नरेंद्र मोदी की दोस्त और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की वजह से. दरअसल, मेलोनी अपनी आवाज का ट्रेडमार्क करवा रही हैं. डीपफेक और एआई के इसी खतरे से निपटने और अपनी पब्लिक इमेज की कानूनी सुरक्षा के लिए इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने एक अनोखा कदम उठाया है.
EU में ट्रेडमार्क के लिए आवेदन
मेलोनी ने यूरोपीय संघ के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस (EUIPO) में अपनी आवाज के ट्रेडमार्क के लिए आवेदन किया है. यह आवेदन चार सेकंड की ऑडियो क्लिप पर आधारित है, जिसमें वह दो बार कहती हैं- Io Sono Giorgia Meloni मतलब कि मैं जियोर्जिया मेलोनी हूं. हालांकि यह आवेदन अभी रिव्यू में है और इसे आधिकारिक रूप से मंजूरी मिलना बाकी है.
प्रसिद्ध नारे से जुड़ा है किस्सा
यह रिकॉर्ड किया गया वाक्य मेलोनी के 2019 के एक फेमस राजनीतिक भाषण की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं जॉर्जिया हूं, मैं एक महिला हूं, मैं एक मां हूं, मैं इटैलियन हूं, मैं ईसाई हूं. यह नारा इटली में काफी लोकप्रिय हुआ था और इस पर एक वायरल डांस रीमिक्स भी बना था. इसके अलावा Io Sono Giorgia उनकी 2021 की बायोग्राफी का टाइटल भी था.
क्या इससे डीपफेक पूरी तरह रुक जाएगा?
एक्सपर्ट्स और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भले ही यह ट्रेडमार्क अप्रूव हो जाए लेकिन यह अकेले AI जनरेटेड डीपफेक को पूरी तरह से नहीं रोक पाएगा. हालांकि यह उन लोगों के लिए अतिरिक्त कानूनी दिक्कतें जरूर पैदा कर देगा जो बिना इजाजत के उनकी आवाज की नकल करने की कोशिश करते हैं.
ट्रेडमार्क पाने वाली पहली राजनेता
यदि यह ट्रेडमार्क मंजूर हो जाता है, तो जियोर्जिया मेलोनी इस प्रकार की आवाज सुरक्षा पाने वाली दुनिया की पहली ऐसी लीडर बन जाएंगी. इससे पहले इस तरह के ट्रेडमार्क मुख्य तौर पर सिंगर और मशहूर सेलिब्रिटी की तरफ से लिए जाते रहे हैं लेकिन नेताओं की तरफ से ऐसा पहली बार किया जा रहा है.
मेलोनी का पुराना कानूनी संघर्ष
यह पहली बार नहीं है जब मेलोनी को डीपफेक या ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ कानूनी कदम उठाना पड़ा हो. साल 2024 में उन्होंने एक इंसान के खिलाफ सिविल मुकदमा दायर किया था जिस पर उनके चेहरे का इस्तेमाल करके अश्लील डीपफेक तस्वीरें ऑनलाइन शेयर करने का आरोप था. वह मामला अभी भी एक अदालत में पेंडिंग है.
आने वाले चुनाव और राजनीति
अब चूंकि इटली में अगले आम चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में यह चिंता लगातार बढ़ रही है कि असली पॉलिटिकल सामग्री और एआई की तरफ से बनाए गए फर्जी कन्टेंट के बीच अंतर कैसे किया जाए. जनरेटिव एआई के जरिए आज कोई भी किसी राजनेता की आवाज को क्लोन करके भाषण तैयार कर सकता है. इससे पहले कि लोग समझ पाएं कि यह फर्जी है, नुकसान हो चुका होता है. मेलोनी का यह कदम एआई बेस्ड Impersonation यानी रूप बदलने के खिलाफ मौजूदा कानूनों का उपयोग करने की कोशिश है.
आवाज की ट्रेडमार्क से क्या होगा?
मेलोनी ने 4 सेकंड का ऑडियो क्लिप जमा किया है जिसमें वे दो बार बोलती हैं- ‘I am Giorgia Meloni’ अगर ट्रेडमार्क मंजूर हो जाता है तो पूरे यूरोप में उनकी आवाज का एक्सक्लूसिव अधिकार उन्हें मिल जाएगा. कोई दूसरा बिना अनुमति के उनकी आवाज का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा. यह नकली कंटेंट और धोखाधड़ी से बचाव करेगा. ट्रेडमार्क 10 साल के लिए मिलता है और बाद में रिन्यू कराना पड़ता है.
कैसे होता है ये खेल?
डीपफेक एक ऐसी तकनीक है जिसमें AI की मदद से किसी इंसान का चेहरा, आवाज या पूरा वीडियो बिल्कुल असली बना दिया जाता है. ‘डीप’ शब्द असल में डीप लर्निंग से आता है, जो AI का ही एक तरीका है. इसमें कंप्यूटर लाखों तस्वीरों और आवाजों को सीखता है और फिर नकली कंटेंट तैयार करता है. उदाहरण के तौर पर किसी की कुछ सेकेंड की असली आवाज को रिकॉर्ड करने के बाद AI उसको पूरे भाषण या फिर गाने जैसी आवाज में बदल सकता है.