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Self-Help Group Digital Market: सीकर के गांव की महिलाओं के बनाए देसी उत्पाद अब स्थानीय हाट और मेलों तक सीमित नहीं रहेंगे. राजीविका बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्वयं सहायता समूहों को हाईटेक बनाने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए महिलाओं को पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ऑनलाइन बिक्री के साथ डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा. पहले चरण में एक नामी कंपनी के साथ एमओयू की तैयारी है और दिवाली के बाद जिलों में प्रशिक्षण शुरू होने की संभावना है. टैबलेट के जरिए महिलाएं अपने उत्पादों की प्रोफाइल और बिक्री का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से संभाल सकेंगी. ऑनलाइन बाजार में पहुंच बनने से बिचौलियों पर निर्भरता कम हो सकती है और शेखावाटी के बाजरा उत्पाद, पापड़, मंगोड़ी और नीम के साबुन जैसे उत्पाद देशभर के ग्राहकों तक पहुंच सकते हैं.
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए अब कमाई बढ़ाने का रास्ता गांव से निकलकर डिजिटल बाजार तक पहुंचने वाला है. राजीविका की ओर से बेहतर काम करने वाले महिला समूहों को प्रशिक्षण देकर हाईटेक बनाने की तैयारी की जा रही है. इसके तहत समूहों की महिलाओं को उत्पाद तैयार करने के साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग की जानकारी दी जाएगी. यानी अब महिलाओं के बनाए उत्पाद सिर्फ स्थानीय हाट और मेलों तक सीमित नहीं रहेंगे.
राजीविका प्रशासन की योजना के अनुसार चयनित महिला समूहों को पहले विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसमें उत्पादों को बाजार की जरूरत के अनुसार तैयार करने, आकर्षक पैकेजिंग करने, कीमत तय करने और ऑनलाइन बिक्री के तरीके बताए जाएंगे. इसके बाद समूहों के उत्पादों को अलग-अलग ऑनलाइन मंचों पर उतारने की तैयारी है. विभाग पहले चरण में एक नामी कंपनी के साथ एमओयू करने की दिशा में काम कर रहा है. जानकारी के अनुसार दिवाली के बाद जिलों में प्रशिक्षण शुरू हो सकता है.
महिला समूहों को पहले ही टैबलेट उपलब्ध करवाए जा चुके हैं. इनका इस्तेमाल अब सिर्फ हिसाब-किताब तक सीमित नहीं रहेगा. महिलाएं टैबलेट के जरिए अपने समूह की प्रोफाइल, उत्पादों की जानकारी और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से अपडेट कर सकेंगी. आगे चलकर इन्हीं उपकरणों के माध्यम से उत्पादों की ऑनलाइन मार्केटिंग और ग्राहकों तक पहुंच बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. इससे गांव की महिलाएं डिजिटल कारोबार की बारीकियां सीख सकेंगी.
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शेखावाटी की महिला समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले कई उत्पाद अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. बाजरे से तैयार खाद्य उत्पाद, पापड़, मंगोड़ी और नीम से बने साबुन जैसे उत्पादों की मांग दूसरे राज्यों तक पहुंच रही है. अभी इनकी बिक्री काफी हद तक स्थानीय बाजार और पारंपरिक माध्यमों से होती है. ऑनलाइन मंच मिलने के बाद इन उत्पादों को बड़े ग्राहक वर्ग तक पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है.
किसी भी स्थानीय उत्पाद को बड़े बाजार तक पहुंचाने में उसकी गुणवत्ता के साथ पैकेजिंग और ब्रांडिंग की भी अहम भूमिका होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण में महिलाओं को उत्पाद की पैकिंग, लेबलिंग, ब्रांड पहचान और ग्राहकों की पसंद के बारे में जानकारी दी जाएगी. इसका फायदा यह होगा कि समूहों के उत्पाद बाजार में ज्यादा पेशेवर तरीके से नजर आएंगे और ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
डिजिटल बाजार का सबसे बड़ा फायदा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की आमदनी बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है. अभी स्थानीय स्तर पर बिचौलियों और सीमित बाजार के कारण कई अच्छे उत्पाद ज्यादा ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाते. ऑनलाइन बिक्री का माध्यम मिलने से उत्पाद सीधे बड़े बाजार में पहुंच सकेंगे. इससे बिक्री बढ़ने के साथ समूहों का कारोबार मजबूत होगा और अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल सकता है.
महिला उद्यमी मंजू लोहिया का कहना है कि शेखावाटी की महिलाएं लगातार अच्छी गुणवत्ता के उत्पाद तैयार कर रही हैं और दूसरे राज्यों में भी इनकी मांग बढ़ रही है. ऐसे में यदि स्वयं सहायता समूहों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ डिजिटल मार्केटिंग की सुविधा मिले तो इसका सीधा लाभ महिलाओं की अर्थव्यवस्था को मिलेगा. राजीविका की यह पहल सफल रहती है तो गांव की महिलाओं के बनाए देसी उत्पादों को देशभर में नई पहचान मिल सकती है.