RAW and Mossad News : भारत-इजरायल के वो 5 ‘हथियार’, जिससे कांपते हैं पाकिस्तानी आतंकी और हमास, 3 दशकों से चल रहा खेल

RAW and Mossad News : भारत-इजरायल के वो 5 ‘हथियार’, जिससे कांपते हैं पाकिस्तानी आतंकी और हमास, 3 दशकों से चल रहा खेल


भारत और इजरायल का रिश्ता केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि ये आतंकवाद के खिलाफ बनी एक ऐसी लोहे की दीवार है जिससे सीमा पार बैठे पाकिस्तानी आतंकी और हमास दोनों थर-थर कांपते हैं. भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार का कहना है कि भारत और इजरायल आतंकवाद का खौफनाक दर्द झेल चुके हैं और इसके खिलाफ मिलकर लड़ते रहेंगे. उनका ये बयान दोनों देशों की उन 5 बड़ी रणनीतियों की ओर इशारा करता है, जो आतंकियों के खिलाफ किसी ‘हथियार’ से कम नहीं हैं. पिछले 30 सालों से ‘रॉ’ और ‘मोसाद’ की ये सीक्रेट जुगलबंदी पर्दे के पीछे चुपचाप चल रही है, जिसने दुश्मनों की रातों की नींद हराम कर रखी है.

भारत-इजरायल के रिश्तों पर क्या बोले इजरायली राजदूत?

भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले की तीसरी बरसी पर एक बेहद भावुक बयान दिया. उन्होंने माना कि 1,200 नागरिकों की जान जाने वाला वो हमला इजरायल की सबसे बड़ी खुफिया नाकामी थी, लेकिन इजरायल ने तब से अब तक बहुत बड़ा कमबैक किया है.

राजदूत अजार ने फ्लाईदुबई विमान में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर और इजरायली यात्रियों की जांबाजी का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और इजरायल आतंकवाद के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि भारत की खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ और इजरायल की ‘मोसाद’ के बीच ये सीक्रेट खेल केवल आज का नहीं है, बल्कि 1992 में आधिकारिक कूटनीतिक संबंध बनने से भी दशकों पहले से पर्दे के पीछे चल रहा है.

1. रॉ और मोसाद की जुगलबंदी: रीयल-टाइम इंटेलिजेंस का जाल

आतंकवाद के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार गोली नहीं, बल्कि सटीक खबर होती है. भारत की रॉ और इजरायल की मोसाद के बीच खुफिया जानकारी का ऐसा तालमेल है कि आतंकी साजिश रचते ही पकड़े जाते हैं.

  • 1992 से पहले की खुफिया दोस्ती: दोनों देशों की एजेंसियों ने आधिकारिक रिश्ते बनने से काफी पहले ही एक-दूसरे को इनपुट्स देना शुरू कर दिया था. 2008 के 26/11 मुंबई हमले के बाद ये रिश्ता और ज्यादा गहरा हो गया, क्योंकि उस हमले में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने इब्रानी भवन में इजरायली नागरिकों को भी निशाना बनाया था.
  • रीयल-टाइम अलर्ट: अगर मिडिल ईस्ट में बैठा हमास या हिजबुल्लाह भारत के खिलाफ किसी साजिश की योजना बनाता है, या फिर पाकिस्तान से संचालित लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन इजरायली ठिकानों को निशाना बनाना चाहते हैं, तो दोनों देश तुरंत रीयल-टाइम डेटा शेयर करते हैं.

2. स्पेशल फोर्सेस का खौफ: एनएसजी, मार्कोस और आईडीएफ की साझा ट्रेनिंग

इजरायल की सेना (IDF) और उसकी कमांडो यूनिट्स को दुनिया में सबसे घातक माना जाता है. भारत के नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) और नेवी के मरीन कमांडो नियमित रूप से इजरायली कमांडोज के साथ ‘ज्वाइंट काउंटर-टेररिज्म ट्रेनिंग’ करते हैं.

  1. अर्बन वारफेयर और क्लोज कॉम्बैट: घनी आबादी वाले इलाकों या संकरी गलियों में छिपे आतंकियों को बिना किसी आम नागरिक को नुकसान पहुंचाए ढूंढकर मार गिराना इजरायल की खासियत है.
  2. हॉस्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन: आतंकियों द्वारा आम लोगों को बंधक बनाने की स्थिति में उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की ट्रेनिंग भारतीय बल इजरायल से लेते हैं. यही वजह है कि जब भी सीमा पार से कोई आतंकी हमला होता है, तो भारतीय कमांडो उसी इजरायली सटीकता के साथ जवाब देते हैं.

3. आसमान और जमीन पर पहरा: हेरोन ड्रोन्स और स्पाइक मिसाइलें

पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर के रास्ते होने वाली घुसपैठ हो या गाजा से होने वाली टनल घुसपैठ, इजरायली रक्षा तकनीक ने आतंकियों का बचना नामुमकिन बना दिया है.

  • हेरोन और सर्च ड्रोन्स: भारतीय सेना सीमाओं पर आतंकियों की हरकत ट्रैक करने के लिए इजरायल के बने ‘हेरोन’ ड्रोन्स का इस्तेमाल करती है. ये ड्रोन्स रात के अंधेरे और घने बादलों के पार भी पहाड़ों में छिपे आतंकियों की लोकेशन निकाल लेते हैं.
  • स्पाइक मिसाइलें और अवाक्स: आतंकियों के मजबूत बंकरों और सटीक ठिकानों को चुटकियों में तबाह करने के लिए भारत इजरायली ‘स्पाइक एंटी-टैंक मिसाइल’ का इस्तेमाल करता है. इसके अलावा, आसमान में उड़ती हुई राडार प्रयोगशाला यानी ‘फाल्कन अवाक्स’ (AWACS) से कोई भी आतंकी हलचल छिप नहीं पाती.
  • साइबर और निगरानी टूल्स: डिजिटल दुनिया में आतंकी फंडिंग और भड़काऊ नेटवर्क को तोड़ने के लिए दोनों देश आधुनिक सॉफ्टवेयर टूल्स शेयर करते हैं.
भारतीय NSA संग कई बार हो चुकी है नेतन्याहू की बातचीत (फोटो क्रेडिट- IsraeliPM/X)

इजरायली स्मार्ट बॉर्डर फेंसिंग: कंटीले तारों में ‘लेजर’ का पहरा

भारत की सीमाएं पाकिस्तान से लगती हैं, जहां से लगातार आतंकियों और ड्रग्स की तस्करी की कोशिशें होती हैं. इजरायल ने गाजा और वेस्ट बैंक की सीमाओं को डिजिटल फेंसिंग से सुरक्षित किया है, और वही तकनीक अब भारत के काम आ रही है.

भारत ने अपनी पश्चिमी सीमाओं पर इजरायली तकनीक वाली ‘स्मार्ट फेंस’ लगाई है. इसमें नाइट-विजन कैमरे, थर्मल सेंसर और लेजर बैरियर होते हैं. अगर कोई आतंकी कंटीले तारों को बिना छुए भी दूर से पार करने की कोशिश करता है, तो कंट्रोल रूम में तुरंत अलार्म बज उठता है और सुरक्षा बल उसे वहीं ढेर कर देते हैं.

टेरर फंडिंग पर अटैक: हवाला और डिजिटल ट्रेल पर शिकंजा

आतंकवाद एक ऐसा राक्षस है जो बिना पैसों के नहीं चल सकता. हमास हो या लश्कर-ए-तैयबा, इन्हें विदेशों से मिलने वाले पैसे ही जिंदा रखते हैं.

भारत और इजरायल की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट्स (FIU) आपस में जुड़कर काम करती हैं. हवाला कारोबार, क्रिप्टोकरेंसी और बेनामी बैंक खातों के जरिए आतंकियों तक पहुंचने वाले पैसों के रास्ते को ट्रैक किया जाता है.

जब फंड की सप्लाई रुक जाती है, तो आतंकियों के लिए हथियार खरीदना और नए रंगरूटों की भर्ती करना लगभग असंभव हो जाता है.

वैश्विक मंचों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति

अंतर्राष्ट्रीय मंचों और संयुक्त राष्ट्र (UN) में जब भी आतंकवाद का मुद्दा उठता है, तो कई देश अपने राजनीतिक फायदे के लिए दोहरे मापदंड अपनाते हैं. लेकिन भारत और इजरायल दुनिया के सामने चट्टान की तरह खड़े होकर आतंकवाद पर सीधा अटैक करते हैं.

जब 7 अक्टूबर को हमास ने हमला किया, तो सबसे पहले निंदा करने वाले वैश्विक नेताओं में भारत के प्रधानमंत्री शामिल थे. ठीक उसी तरह, जब-जब उरी, पुलवामा या भारतीय सरजमीं पर आतंकी हमला हुआ है, इजरायल ने बिना किसी झिझक के भारत के सैन्य जवाब का समर्थन किया है.



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