‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पिटने के बाद भी पाकिस्तान सुधरने का नाम नहीं ले रहा है. देश कंगाली की कगार पर है, लेकिन वहां के हुक्मरानों ने जनता की भलाई के बजाय अरबों रुपये फिर से आतंकियों के ठिकाने बनाने में फूंक दिए. जब तिजोरी पूरी तरह खाली हो गई और दुनिया भर से भीख मांगने पर भी सिर्फ दुत्कार मिली, तो पाक सेना ने एक नया पैंतरा चला है. अब वो अपने कबाड़ हथियारों को बेचने के चक्कर में Fatah-4 मिसाइल का नया वर्जन टेस्ट कर रहे हैं.लेकिन सवाल ये है कि क्या इस फ्लॉप मिशन से पाकिस्तान का खाली खजाना भर पाएगा? या फिर भारत के S-400 का एक ही वार इस कबाड़ मिसाइल का चूरन बना देगा?
Fatah-4 के दम पर हवा में उछल पड़ा पाकिस्तान
भारत के हाथों ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मिली करारी हार और रावलपिंडी तक मची तबाही के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि पाकिस्तान ने अपनी पुरानी और घटिया हरकत फिर दोहराई है. कंगाली, आसमान छूती महंगाई और देश के भीतर जारी गृहयुद्ध जैसे हालातों में घिरे पाकिस्तान ने Fatah-4 मिसाइल का टेस्ट करके ऐसे ढिंढोरा पीटा है मानो कोई जंग जीत ली हो.
पाक सेना के मीडिया विंग (ISPR) ने छाती ठोककर दावा किया कि ये मिसाइल पहले के मुकाबले काफी ज्यादा दूरी तक सटीक निशाना लगा सकती है और इसमें एडवांस्ड एवियोनिक्स और नई नेविगेशन टेक्नोलॉजी ठूंसी गई है. टेस्ट के तुरंत बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सेनाध्यक्ष ने अपने वैज्ञानिकों को इस तरह बधाइयां दीं, जैसे देश की कंगाली और बदहाली एक झटके में दूर हो गई हो! लेकिन सच तो ये है कि ये पूरी कवायद सिर्फ अपनी जनता को बेवकूफ बनाने के लिए रची गई एक पटकथा भर है.
क्या है Fatah-4 का ये नया दांव और क्या है इसकी असली औकात?
पाकिस्तानी सेना Fatah-4 को एक बेहद आधुनिक ग्राउंड-लॉन्च क्रूज मिसाइल बता रही है.
- लंबी रेंज और सटीकता का दावा: पाक सेना का कहना है कि इसका ‘एक्सटेंडेड वर्जन’ दुश्मन के एयर डिफेंस को चकमा देकर बहुत दूर तक हमला कर सकता है.
- नेविगेशन और जीपीएस: इसमें नया जीपीएस और नेविगेशन सिस्टम लगाने का दावा है ताकि ये कम ऊंचाई पर उड़ते हुए राडार से बच सके.
- सैटलाइट गाइडेंस: दावा है कि ये आखिरी सेकंड में भी रास्ता बदलकर टारगेट को तबाह कर सकती है.
लेकिन रक्षा डिफेंस एक्सपर्ट्स की मानें तो पाकिस्तान की इस तथाकथित ‘तकनीकी उपलब्धि’ की कलाई तुरंत खुल जाती है. इस मिसाइल के ज्यादातर कलपुर्जे और टेक्नोलॉजी चीन से भीख में मांगी गई या चुराई गई है. बिना चीनी खैरात और स्पेयर पार्ट्स के पाकिस्तान का पूरा रक्षा ढांचा दो दिन भी टिक नहीं सकता.
भारत का S-400 कैसे बनाएगा इस मिसाइल का ‘चूरन’?
पाकिस्तान चाहे Fatah-4 पर जितना भी इतरा ले, लेकिन भारतीय वायुसेना के पास मौजूद S-400 ट्राइंफ एयर डिफेंस सिस्टम के सामने इसकी हैसियत किसी खिलौने से ज्यादा नहीं है.
- 250 से 400 किमी दूर ही पकड़: S-400 का बेहद शक्तिशाली राडार Fatah-4 जैसी क्रूज मिसाइल के लॉन्च होते ही उसे सैकड़ों किलोमीटर दूर से ट्रैक करना शुरू कर देता है.
- हवा में ही टुकड़े-टुकड़े: Fatah-4 जैसी सबसोनिक या लो-सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें S-400 की हाइपरसोनिक मिसाइलों, जो Mach 12 की रफ्तार से चलती हैं, इसका मुकाबला कभी नहीं कर सकतीं. S-400 की एक ही मिसाइल Fatah-4 को भारतीय सीमा में घुसने से पहले ही हवा में चूरन बना देगी.
- बहुस्तरीय सुरक्षा कवच: भारत के पास S-400 के अलावा आकाश, बराक-8 और बीएमडी जैसे कई लेयर वाले सुरक्षा कवच हैं, जिनके आगे Fatah-4 का टिकना नामुमकिन है.
हाथ में कटोरा, फिर भी मिसाइल दागने का शौक!
पाकिस्तान की इस हरकत पर पूरी दुनिया हंस रही है क्योंकि इस वक्त ये देश सीधे-सीधे कंगाली के मोड़ पर खड़ा है.
- IMF के कर्ज पर सांसें: पाकिस्तान के पास अपनी जनता को आटा, दाल और बिजली देने के पैसे नहीं हैं. आम आदमी एक वक्त की रोटी के लिए मोहताज है.
- आंतरिक गृहयुद्ध: बलूचिस्तान में BLA और उत्तर-पश्चिम में TTP ने पाकिस्तानी सेना की नाक में दम कर रखा है. आए दिन उनके कप्तानों और जवानों को ढेर किया जा रहा है.
ऐसी भयानक तबाही के दौर में करोड़ों डॉलर फूंककर मिसाइल का टेस्ट करना सीधे-सीधे अपनी ही भूखी अवाम के पेट पर लात मारना है. लेकिन पाक हुक्मरानों को अपनी जनता के राशन से ज्यादा भारत के खिलाफ नफरत की दुकान चलाने में मजा आता है.
पाक जनरलों का असली गेमप्लान
राजनीतिक और सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का ये मिसाइल टेस्ट तीन इरादों से किया गया है.
- अवाम की आंखों में धूल झोंकना: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की हार से भड़की जनता का ध्यान भटकाना और फर्जी देशभक्ति बेचना.
- पीट चुकी सेना की इज्जत बचाना: पाकिस्तान में सेना की साख अब तक के सबसे निचले स्तर पर है, इसलिए ये शक्ति प्रदर्शन का ड्रामा किया गया.
- ब्लैकमेलिंग की राजनीति: दुनिया को ये दिखाना कि ‘हमारे पास मिसाइलें हैं, इसलिए हमें और कर्ज दो वरना हम तबाह हो जाएंगे.’
गीदड़भभकियों से नहीं ढहते भारत के इरादे
पाकिस्तान चाहे Fatah-4 दागे या कोई और कबाड़ मिसाइल, हकीकत ये है कि युद्ध कागजी दावों और चीनी कलपुर्जों से नहीं जीते जाते. मजबूत अर्थव्यवस्था, आधुनिक स्वदेशी तकनीक और अनुशासित सेना ही असली ताकत होती है.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मुंह की खाने के बाद भी अगर पाकिस्तान नहीं सुधरा, तो अगली बार भारत का जवाब ऐसा होगा कि उसकी मिसाइलों का मलबा ढूंढने से भी नहीं मिलेगा. भारत ने साफ कर दिया है कि अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए वो किसी भी हद तक जाने को तैयार है!