Nobel Prize 2026 : हर साल नोबेल पुरस्कारों की घोषणा का इंतजार पूरी दुनिया करती है. लेकिन इसके ऐलान से पहले ही दुनिया भर के कई संभावित नामों पर चर्चा शुरू हो जाती है. नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेशन से लेकर मिलने तक की एक विस्तृत प्रक्रिया है. जो कई चरणों में संपन्न होती है. इसमें विशेषज्ञों की विस्तृत जांच भी शामिल होती है.
नोबेल पुरस्कार सिर्फ भारी-भरकम प्राइज मनी की वजह से ही मशहूर नहीं है. यह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में इसलिए माना जाता है, क्योंकि यह सिर्फ किसी उपलब्धि को नहीं, बल्कि मानवता पर उसके असाधारण और लंबे समय में पड़ने वाले प्रभाव को भी सम्मानित करता है. आइए जानते हैं नोबेल पुरस्कार मिलने की पूरी प्रक्रिया के बारे में.
कौन-कौन इंस्टीट्यूशन देते हैं नोबेल पुरस्कर
| कैटेगरी | पुरस्कार देने वाली संस्था |
| फिजिक्स | रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़ |
| केमिस्ट्री | रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़ |
| फिजियोलॉजी/मेडिसिन | करोलिंस्का इंस्टीट्यूट में नोबेल असेंबली |
| लिटरेचर | स्वीडिश एकेडमी |
| शांति | नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी |
| इकोनॉमिक साइंस | रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़ |
नोबेल पुरस्कार के लिए कैसे होता है नॉमिनेशन?
नोबेल पुरस्कार की सबसे पहली प्रक्रिया नॉमिनेशन है. कोई भी व्यक्ति अपना नॉमिनेशन खुद ही नहीं कर सकता. नोबेल कमेटी हर साल अलग-अलग देशों की यूनिवर्सिटीज, एकेडमिक्स के सदस्यों, साइंटिस्ट, पूर्व नोबेल लॉरिएट और कुछ अन्य योग्य व्यक्तियों को नॉमिनेशन के लिए इनवाइट करती है. नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेशन की प्रक्रिया थोड़ी अलग है और इसमें नॉमिनेट करने का दायरा अपेक्षाकृत अधिक व्यापक है.
नोबेल पुरस्कारों के लिए नॉमिनेशन फॉर्म आमतौर पर सितंबर में भेजे जाते हैं. अगले पुरस्कारों के लिए फॉर्म भरकर 31 जनवरी तक जमा करने होते हैं. दिलचस्प बात यह भी है कि जिन्हें नोबेल के लिए चुना जाता है, उसका नॉमिनेशन किसने किया था, नोबेल कमेटी इस बात की जानकारी कभी नहीं देती है. यह प्रक्रिया काफी गुप्त रखी जाती है.
नॉमिनेशन के बाद कैंडिडेट्स की जांच
नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेशन के बाद अगला चरण शुरू होता है. इस चरण में नोबेल कमेटी सबसे पहले जांचती है कि नॉमिनेशन किसी योग्य व्यक्ति ने किया है या नहीं. इसके बाद सभी नॉमिनेशन को एक लिस्ट में शामिल किया जाता है. शुरुआती लिस्ट में बड़ी संख्या में नाम होते हैं, तो उन्हें कई चरणों में छांटकर कम किया जाता है.
इसके बाद शॉर्टलिस्ट हुए काम के उम्मीदवारों की गहराई से जांच की जाती है. जरूरत पड़ने पर नोबेल कमेटी इस काम में देश-विदेश के विशेषज्ञां की मदद भी लेती है. यह प्रक्रिया कई महीनों लंबी होती है. इसका मकसद होता है नोबेल उम्मीदवारों के योगदान की वास्तविक अहमियत और प्रभाव का मूल्यांकन करना.
कैसे तय होते हैं फाइनल कैंडिडेट्स और विनर?
कई महीनों तक चले गहन मूल्यांकन के बाद नोबेल कमेटी अपने पसंदीदा कैंडिडेट्स के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करती है. इसके बाद सितंबर में मेटी अपनी रिकमन्डेशन संबंधित नोबेल प्राइज अवार्डिंग इंस्टीट्यूशन के सामने रखती है. ध्यान रहे कि नॉमिनेशन की प्रक्रिया एक साल पहले सितंबर में शुरू हुई थी.
ध्यान देने वाली बात है कि अधिकांश कैटेगरी में नोबेल कमेटी खुद फाइनल विनर नहीं तय करती. वह अपने रिकमेन्डेशन भेज देती है और अंतिम फैसला अवार्ड देने वाले इंस्टीट्यूशन के सदस्य लेते हैं.
नोबेल विनर का फाइनल सेलेक्शन और अप्रूवल
नोबेल कमेटी की ओर से अपने रिकमेन्डेशन पुरस्कार देने वाले इंस्टीट्यूशन को भेजने के बाद समय आता है विनर के फाइनल सेलेक्शन और अप्रूवल का. अब प्राइज देने वाले इंस्टीट्यूशन के सदस्य वोट के जरिए नोबेल लॉरिएट यानी विजेता का चयन करते हैं. निर्णय होने के बाद सबसे पहले विनर को जानकारी दी जाती है. इसके बाद अक्टूबर में सार्वजनिक घोषणा की जाती है. बता दें कि नोबेल पुरस्कार की अवार्ड सेरेमनी हर साल 10 दिसंबर को होती है.
शांति लिए के नोबेल की अलग व्यवस्था
शांति के लिए मिलने वाले नोबेल पुरस्कार की व्यवस्था अन्य से थोड़ी अलग होती है. नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी उम्मीदवारों का मूल्यांकन करने के साथ-साथ फाइनल विनर भी तय करती है. बता दें कि नोबेल नॉमिनेशन और मूल्यांकन से जुड़े डॉक्यूमेंट्स को 50 साल तक गुप्त रखा जाता है.